आनुभविक अनुसंधान - empirical research
आनुभविक अनुसंधान - empirical research
आनुभविक अनुसंधान में प्रायः प्रणालियों व सिद्धांतों को उचित स्थान दिये बगैर, मात्र अनुभव अथवा प्रेक्षण को महत्व प्रदान किया जाता है। इस प्रकार के शोध में निष्कर्षों को प्रेक्षण अथवा प्रयोग द्वारा सत्यापित किया जाता है तथा इसी आधार पर पूर्व के तथ्यों की वर्तमान व्यहारिकता को भी जानने समझने का प्रयत्न किया जाता है। आनुभविक अनुसंधान में अवलोकन द्वारा तथ्यों को प्राप्त करना अत्यंत आवश्यक होता है तथा इसी आधार पर उपकल्पना का निरूपण किया जाता है
और साथ ही यह अनुसाधन के प्रयोगात्मक प्रारूप को तैयार करने में भी सहायक सिद्ध होती है। प्रयोग व अनुभव आधारित अध्ययनों में संकलित किए गए साक्ष्य प्रदत्त उपकल्पना के लिए एक सशक्त आधार प्रस्तुत करते हैं।
इस प्रकार शोध में सर्वप्रथम अवलोकन की सहायता से घटना अध्ययन क्षेत्र को जानने का प्रयास किया जाता है तथा संबंधित कार्य-कारणों के बारे में खोजबीन की जाती है। इसके पश्चात प्राप्त जानकारी के आधार पर आगमन विधि के अनुरूप उपकल्पना का निरूपण अथवा घटना के संबद्ध में एक सामान्यीकृत व्याख्या प्रस्तुत की जाती है। उपकल्पना की निर्मिति के पश्चात निगमन विधि के तौर पर अध्ययन क्षेत्र के अनुरूप उसकी जांच की जाती है। इस जांच परीक्षण में उपकल्पना सही / गलत सिद्ध हो सकती है।
इसके पश्चात हम सम्पूर्ण प्रक्रिया को ध्यान में रखा जाता है, जिसकी सहायता से उपकल्पना की जांच की जानी है तथा अध्ययन क्षेत्र से किन प्रविधियों व तकनीकों की सहायता से तथ्यों को संकलित किया जाना है। तथ्यों के संकलन के पश्चात उनके मूल्यांकन और व्याख्या का चरण आता है। इसमें तथ्यों की व्याख्या की जाती है तथा किसी सिद्धांत अथवा सत्यापित तर्क को निरूपित किया जाता है। इस तर्कवाक्य की सहायता से वर्तमान घटना/समस्या की तार्किक व्याख्या प्रस्तुत की जा सकती है तथा साथ ही इस अनुसंधान की सहायता से एक वैज्ञानिक निष्कर्ष तक पहुँचने में मदद मिलती है।
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