एंगेल्स की आलोचना - Engels' criticism

एंगेल्स की आलोचना - Engels' criticism


एंगेल्स ने स्त्री अधीनता को इतिहास के एक पड़ाव पर उत्पन्न होने की स्थापना देकर स्त्रीवादियों के लिए जैविक निर्धारणवाद से निपटने के लिए मज़बूत हथियार मुहैया किया। गर्दा लर्नर के अनुसार, उनकी स्थापना के महत्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि स्त्री अधीनता की उत्पत्ति के प्रश्न पर होने वाली सैद्धांतिक बहस कमोबेश एंगेल्स की ही स्थापना को सही ठहराने, विकसित करने या फिर गलत सिद्ध करने पर केंद्रित रही हैं।


स्त्रीवादियों ने एंगेल्स की जिन बातों को लेकर आलोचना की है वे इस प्रकार हैं:


1. एंगेल्स ने भी लिंग के आधार पर स्त्री और पुरुष के बीच श्रम विभाजन को प्राकृतिक मान लिया। स्त्रियों के घरेलू दायरे और पुरुषों के बाहरी दायरे में संलग्न और सक्रिय होने को उन्होंने भी प्रजनन की प्रक्रिया में उनकी भूमिकाओं में भेद के साथ जुड़ा हुआ मान लिया। स्त्री बच्चे को जन्म देती है। यह प्राकृतिक है।

थोड़ी देर के लिए हम बच्चे की माँ की देखभाल की ज़रूरत को इससे जुड़ा हुआ मान सकते हैं, लेकिन घर में स्त्रियाँ इसके अलावा झाड़ू-पोंछा, चूल्हा-चौकी जैसे घरेलू कार्य निरंतर करती हैं उसके तार उनकी प्रजनक क्षमता से नहीं जुड़े हुए हैं। स्त्रीवादियों का मानना है कि एंगेल्स यह भेद नहीं कर पाए। स्त्रियों के हिस्से आए घरेलू काम-काज को उनकी प्रजनक क्षमता से जुड़ा हुआ मान कर चलने पर तो हम इसी नतीजे पर पहुंचेंगे कि स्त्रियों का घरेलू श्रम में लिप्त होना प्राकृतिक है। यानि स्त्री और पुरुष के बीच का श्रम विभाजन स्वाभाविक है, जो स्त्री मुक्ति के लिहाज से प्रतिगामी सिद्ध होगा। गर्दा लर्नर का मत है कि एंगेल्स जिन नृजातिविवरणों के आधार पर उपर्युक्त नतीजे पर पहुंचे थे वे गलत सिद्ध हो चुके हैं। न केवल अतीत में, बल्कि आज भी जो समाज शिकार-संग्रह की अवस्था में हैं उनमें आहार का औसतन 60% या उससे भी अधिक स्त्रियाँ ही जुटाती हैं। इसके साथ ही श्रम विभाजन का स्वरूप भी सभी जगह एक-सा नहीं रहा है। लर्नर के मुताबिक, विभिन्न संस्कृतियों में पुरुषों और स्त्रियों के ज़िम्मे सौंपे गए कार्यों में भारी विविधता रही है। यानि ज़रूरी नहीं कि बच्चे की देखभाल, खाना बनाने, कपड़े साफ करने आदि जैसे काम सभी संस्कृतियों में स्त्रियाँ ही करती हों। वी. गीता ने अफ्रीका और एशिया के ऐसे ग्रामीण समाजों का जिक्र किया है जिनमें बच्चों के देखभाल की ज़िम्मेदारी पड़ोसियों, बुजुर्ग पुरुष संबंधियों और यहाँ तक कि युवकों पर रहती है।


2. एंगेल्स ने यह महत्वपूर्ण सूत्र तो गढ़ डाला कि स्त्री की अधीन स्थिति का कारण निजी संपत्ति की उत्पत्ति है, लेकिन उन्होंने इस सवाल को अनुत्तरित ही छोड़ दिया पशुपालन के उपरांत पशुधन के रूप में जमा हुई संपदा कब और कैसे समूचे कबीले या गोत्र की संपत्ति न रहकर निजी हो गई? यदि निजी संपत्ति की उत्पत्ति का कारण नहीं बताया जा सकता तो स्त्री अधीनता के उससे आबद्ध होने का सूत्र सही कैसे हो सकता है?


3. उत्पादन और पुन: उत्पादन को बराबर के महत्व का और समांतर प्रक्रियाएँ मानने के बावज़ूद एंगेल्स ने अंततः उत्पादन को ही तरजीह दी।


4. क्रिश हर्मन का मानना है कि खेती की शुरुआत पशुओं को पालतू बनाए जाने के साथ ही हुई न कि बाद में, जैसा कि एंगेल्स मान बैठे। खेती का यह रूप बागवानी (होर्टीकल्चर) के स्तर का था। वनों को काटकर, झाड़ियों को जलाकर और छोटे औज़ारों से ज़मीन खोदकर की जाने वाली यह खेती मुख्यतः स्त्रियाँ ही करती थीं।

यही कारण है कि खेती की खोज का श्रेय स्त्रियों को जाता है। जब तक मनुष्य ने लोहे का आविष्कार नहीं किया था और हल तथा सिंचाई से खेती करना शुरू नहीं किया था तब तक खेती का बागवानी वाला रूप ही कायम रहा। गेल ओम्वेट लिखती हैं कि यदि एंगेल्स के इस तर्क को मान लिया जाए कि उत्पादन के साधनों (पशु) और उत्पाद पर नियंत्रण के कारण पुरुष सत्ता स्थापित हुई तो कायदे से बर्बरता की अवस्था के दौरान स्त्रियों की स्थिति हीन होने के बजाय पहले से भी ज्यादा मजबूत हो जानी चाहिए थी। आखिर, खाद्यान्न संग्रह तो वे करती ही आ रही थीं, पुन: उत्पादन पर उन्हीं का हक था, ऊपर से अब खेती ( उत्पादन का साधन) और उसके उत्पाद पर भी उन्हीं का अधिकार था। पुरुष सत्ता की स्थापना तो खेती में हल का प्रयोग शुरू होने, पुरुष के उत्पादन की प्रक्रिया पर हावी होने और राज्य के वज़ूद में आने यानि बर्बरता के अंतिम चरण में आकर होनी चाहिए थी।


5. एंगेल्स की सबसे कड़ी आलोचना रेडिकल स्त्रीवादियों ने की।

रेडिकल स्त्रीवाद के बारे में हम पहले ही विचार कर चुके हैं कि कैसे वह पारंपरिक मार्क्सवाद द्वारा स्त्री के मसले को केवल उत्पादन के पदों में समझने की आलोचना करते हुए विकसित हुआ और स्त्री-अधीनता के कारण के रूप में पुन: उत्पादन की महत्ता स्थापित की।


6. एंगेल्स ने घरेलू श्रम की महत्ता को कम करके आंका। घरेलू श्रम साधारण उपयोग मूल्य उत्पन्न करता है, इसलिए उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया, जबकि स्त्रीवादियों ने अपना पक्ष रखते हुए जाहिर किया है कि उत्पादक श्रम और उससे प्राप्त होने वाले अधिशेष मूल्य में घरेलू श्रम की बड़ी भूमिका होती है।


7. एंगेल्स ने मातृवंशीयता और मातृसत्ता को एक ही समझ लिया, जबकि दोनों में भेद है। मातृवंशीयता का अर्थ यह होता है कि वंश माता के नाम पर चलता है। इसका अर्थ यह नहीं कि ऐसी व्यवस्था में स्त्रियों का ही प्रभुत्व हो ।