एक उत्तम निदर्शन की आवश्यक विशेषताएं - Essential Characteristics of a Good Demonstration

एक उत्तम निदर्शन की आवश्यक विशेषताएं - Essential Characteristics of a Good Demonstration


निदर्शन तभी उपयोगी होता है जबकि उसका चुनाव बहुत सावधानीपूर्वक किया जाए। पी. वी. यंग ने लिखा है कि "निदर्शन का आकार ही उसके प्रतिनिधि होने की गारंटी नहीं होती। समुचित रूप से चुना गया अपेक्षाकृत छोटे आकार का निदर्शन दोषपूर्ण रूप से चुने गए बड़े आकार के निदर्शन से अधिक विश्वसनीय होता है।" इसका तात्पर्य यह है कि निदर्शन चाहे छोटा हो अथवा बड़ा, इसमें कुछ विशेषताओं का होना आवश्यक है जो वैयक्तिक पक्षपात की संभावना को कम कर सकें। इन विशेषताओं अथवा आवश्यकताओं को निम्नांकित रूप से समझा जा सकता है: 


(1) समग्र का प्रतिनिधि:


किसी भी श्रेष्ठ निदर्शन की सबसे बड़ी आवश्यकता यह है कि निदर्शन अध्ययन से संबंधित समस्त इकाइयों अथवा समग्र का उचित प्रतिनिधित्व करता हो। इसका तात्पर्य यह है

कि निदर्शन का चुनाव इस प्रकार किया जाना चाहिए जिसमें अध्ययन विषय से संबंधित सभी वर्गों और समूहों की विशेषताओं को स्पष्ट करने वाली इकाइयों का समावेश हो। सामाजिक अध्ययनों से संबंधित प्रत्येक समूह के अंदर व्यक्तियों के रहन-सहन, संस्कृति, विचारों, मनोवृत्तियों तथा व्यवहारों में इतनी भिन्नताएं होती है कि यदि एक-दूसरे से भिन्न विशेषताएं प्रदर्शित करने वाले सभी वर्गों का निदर्शन में प्रतिनिधित्व न हो तो अध्ययन अव्यावहारिक बन सकता है। लुण्डबर्ग ने लिखा है कि कोई निदर्शन प्रतिनिधि तभी हो सकता है, जबकि अध्ययन से संबंधित इकाइयों में एकरूपता हो तथा निदर्शन की प्रणाली तटस्थ रूप से उपयोग में लाई गई हो। 


(2) समुचित आकार :


निदर्शन का यद्यपि एक विशेष आकार ही इसके प्रतिनिधित्वपूर्ण होने की गारंटी नहीं होता लेकिन तो भी निदर्शन के एक समुचित आकार का निर्धारण करना अध्ययन की सफलता के लिए आवश्यक समझा जाता है।

निदर्शन यदि बहुत छोटे आकार का होता है तो इसके द्वारा प्राप्त तथ्य संपूर्ण समग्र का प्रतिनिधित्व नहीं कर पाते। दूसरी ओर, यदि निदर्शन बहुत अधिक बड़ा होता है तो उससे संबंधित सभी इकाइयों का गहन और सूक्ष्म अध्ययन करना कठिन हो जाता है। इस स्थिति में एक सामान्य नियम के रूप में केवल यह ध्यान रखना आवश्यक है कि निदर्शन के अंतर्गत आने वाली इकाइयां समग्र की प्रकृति और आकार के अनुरूप होनी चाहिए। निदर्शन इतना बड़ा अवश्य हो कि उससे संबंधित इकाइयां समग्र के प्रत्येक वर्ग की विशेषताओं का प्रतिनिधित्व कर सकें। पी.वी. यंग के अनुसार, "एक उपयुक्त निदर्शन वह है जिसमें विश्वसनीय निष्कर्षों को प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त इकाइयों का समावेश होता है।" 


(3) अध्ययन विषय के अनुरूप :


निदर्शन का अध्ययन विषय के अनुरूप होना बहुत अधिक आवश्यक है। निदर्शन में यदि ऐसी इकाइयों का समावेश हो जाता है

जिनका अध्ययन विषय से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता तो प्राप्त निष्कर्ष कभी भी वैज्ञानिक नहीं हो सकते। इसका तात्पर्य है कि यदि अध्ययनकर्ता का उद्देश्य बाल अपराध के कारणों को जानना अथवा सेवारत महिलाओं की समस्याओं का अध्ययन करना है तो निदर्शन के अंतर्गत केवल बाल अपराधियों अथवा सेवारत महिलाओं का ही समावेश होना आवश्यक है। 


(4) वैयक्तिक पक्षपात से स्वतंत्र :


एक श्रेष्ठ निदर्शन के लिए यह भी आवश्यक है कि किसी भी इकाई का चुनाव व्यक्तिगत इच्छा अथवा पसंद के आधार पर किया जाए। निदर्शन के अंतर्गत समग्र से संबंधित प्रत्येक इकाई को चुने जाने की पूरी स्वतंत्रता होना आवश्यक है। निदर्शन के अंतर्गत इकाइयों के वस्तुनिष्ठ रूप से चुने जाने के लिए अनेक प्रविधियों तथा प्रणालियों को विकसित किया जा चुका है।

अध्ययनकर्ता के लिए यह आवश्यक है कि वह इन्हीं में से किसी विशेष प्रविधि की सहायता से निदर्शन का चुनाव करें। 


(5) सजातीयता


सजातीयता का अर्थ है कि निदर्शन के अंतर्गत चुनी गयी इकाइयों में बहुत अधिक विरोधी विशेषताएं न पाई जाती हों। यह सच है कि यदि समग्र की प्रकृति विविधतापूर्ण है तो निदर्शन के लिए चुनी गई इकाइयां भी एक-दूसरे से भिन्न प्रकृति की होंगी। लेकिन साधारणतया यदि समग्र में अधिक भिन्नता नहीं है तो निदर्शन के अंतर्गत आने वाली इकाइयां भी लगभग समान प्रकृति की होनी चाहिए। 


सजातीयता अथवा समान विशेषताओं से संबंधित इकाइयों वाला निदर्शन कहीं अधिक वैज्ञानिक निष्कर्ष देने में सहायक होता है। 


(6) तर्क पर आधारित :


किसी भी अच्छे निदर्शन की एक आवश्यक विशेषता उसकी वैज्ञानिकता है। वैज्ञानिक ज्ञान जहां एक ओर किसी निश्चित कार्यप्रणाली पर आधारित होता है, वहीं इसमें तर्क का स्थान भी अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। निदर्शन से संबंधित प्रविधियां चाहे कितने भी विकसित हों, अनुसंधानकर्ता तर्क और ज्ञान का उपयोग किए बिना एक अच्छा निदर्शन प्राप्त नहीं कर सकता। तार्किक दृष्टिकोण का मुख्य अभिप्राय यह है कि एक ओर अनुसंधानकर्ता इकाइयों का इस प्रकार चयन करें जो संपूर्ण समग्र का प्रतिनिधित्व करती हों और दूसरी ओर विषय की प्रकृति के अनुसार ही निदर्शन के आकार तथा उसकी चुनाव विधि का निर्धारण किया जाना चाहिए। निदर्शन के अंतर्गत यदि कोई विशेष इकाई पूर्णतया अव्यावहारिक और निरर्थक प्रतीत होती हो तो निदर्शन में से उसे निकाल देना अच्छा रहता है। 


(7) व्यावहारिक अनुभव पर आधारित :


एक उत्तम निदर्शन केवल तर्क पर ही आधारित नहीं होता बल्कि इसमें अध्ययनकर्ता के व्यावहारिक अनुभवों का समावेश होना भी आवश्यक होता है। निदर्शन के चुनाव में अक्सर ऐसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं जिनका समाधान व्यावहारिक अनुभव की सहायता से ही किया जा सकता है। केवल नियमों पर आधारित रहने से अक्सर एक श्रेष्ठ और उपयोगी निदर्शन को प्राप्त कर सकना बहुत कठिन हो जाता है।


इस प्रकार स्पष्ट होता है कि श्रेष्ठ निदर्शन एक अत्यधिक तुलनात्मक शब्द है। किसी निदर्शन में उपयुक्त तत्वों का समावेश जितना अधिक होता है, बहुत सीमा तक उपयोगी अथवा उत्तम बन जाता है।