शोध की नैतिकता - Ethics of Research
शोध की नैतिकता - Ethics of Research
शोध कार्य किसी समस्या को खोजने उसके निवारण हेतु किया जाता है। इसलिए शोध समाज को और उन्नत बनाने हेतु करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण होता है। शोध, समाज की कमियों उनके बीच की समस्याओं को जानने या अध्ययन हेतु महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज समाज के विकास के लिए अतिआवश्यक पहलु है कि उस समाज का अध्ययन अथवा शोध किया जाए। तभी कही जाकर, किसी समाज के समानान्तर विकास हेतु हम एक सार्थक योजनाओं का निर्माण कर सकते हैं। ऐसे में आवश्यक है कि शोध, चाहे वह विज्ञान से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ा हो अथवा सामाजिक विज्ञान से, उसकी अपनी एक नैतिकता अथवा आदर्श प्रक्रियाओं के तहत होना समाज को बेहतर परिणाम देने हेतु सार्थक शोध की श्रेणी में रखा जाता है।
वर्तमान में तमाम शोध कार्यों में शोध की नैतिकताओं को नजरअंदाज कर परिणाम प्राप्त करना एक अकादमिक समस्या के रूप में लगातार देखा जा रहा है। आज उच्च शोध तो किए जा रहे हैं किंतु कही ना कही उन शोध प्रक्रियाओं में शोध की नैतिकताओं की कमी पाई जाती है। ऐसे में यह आवश्यक है की शोध क्या है? शोध क्यों किया जाता है? और शोध की नैतिकता के कौन कौन से मुख्य बिंदु है जिनका पालन करना शोध और समाज दोनों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण और आवश्यक हैं। शोध की नैतिकता के मुख्य बिंदु निम्न हैं: के
(A) शोध द्वारा हानि ना हो किसी भी शोध, खासकर सामाजिक विज्ञान के शोध में यह नैतिकता रखी जाती है कि अध्ययन से किसी भी पशु मनुष्य और पर्यावरण को हानि नहीं हो। मनुष्य के हानि से तात्पर्य है
कि अध्ययन के दौरान किसी व्यक्तिगत रूप से मनुष्य, समूह, समुदाय के संस्कृति को लेकर ठेस ना पहुंचे। अध्ययन में यह सावधानी रखनी चाहिए कि किसी समुदाय के सांस्कृतिक, धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने वाले कार्यों से बचा जाए।
(B) शोध समाज के लिए लाभप्रद हो किसी शोध का उद्देश्य और नैतिकता यही है कि शोध समाज के लिए और उसके विकास के लिए लाभप्रद साबित हो। किसी शोध का उद्देश्य अप्रत्यक्ष रूप से समाज के लिए लाभ देना ही होता है। ऐसे में सदैव शोध का स्वरूप और कार्य ऐसा होना चाहिए कि प्राप्त परिणाम नैतिकता पर आधारित हो और शोध बंद किताब ना होकर समाज के लिए किसी ना किसी तरह से लाभ देने वाला साबित हो।
(C) पूर्व शोध की कटाक्ष कमियों से बचना किसी भी क्षेत्र में किए जाने वाले आगामी शोध के लिए सहायता, पूर्व में किए गए शोध से काफी मदद मिलती है। ऐसे में जिस क्षेत्र में शोध किया जाना है पूर्व शोध कार्य में कमियां निकलना नैतिकता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा होता है। हो सकता है कि पूर्व के शोध हेतु पर्याप्त साधन और निर्देशन सहित संसाधनों की कमी रह जाने से कुछ कमिया रह गई हो इससे यह साबित नहीं होता कि पूर्व का शोध आगामी शोध हेतु सहायतार्थ ना हो। शोध की नैतिकता है कि ऐसे शोध की कमियों को निकालने के बजाय उससे कैसे लाभ लिया जा सकता है इस बात पर ध्यानाकर्ष होना चाहिए।
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