शोधार्थी की नैतिकता - Ethics of Researchers
शोधार्थी की नैतिकता - Ethics of Researchers
एक शोधार्थी को अपने व्यक्तित्व में नैतिक गुणों का समावेश करना चाहिए। शोध मूल्यों की सम्पूर्ण गुणवत्ता शोधार्थी के व्यवहार, रूचि, परिश्रम एवं जीवन-मूल्यों पर निर्भर करता है। शोध प्रक्रिया के दर्शन को तीन प्रमुख अंगों में वर्गीकृत किया जाता है- एपिस्टमोलाजी, मेटाफिजिक्स, और एथिक्सा शोध में नैतिकता का तात्पर्य सौन्दर्यबोध से है जिसके अंतर्गत शोधार्थी उन सभी मानदंडों का परिपालन करता है जो किसी शोध को शुद्धता, मानवीयता एवं विशिष्टता जैसे गुणों से युक्त करता है। एक शोधार्थी को शोध के लिए निम्नलिखित नैतिक पहलुओं पर विचार करना चाहिए। वैज्ञानिक पद्धति : वर्तमान समय में सामाजिक घटनाओं एवं व्यवहारों के वास्तविक ज्ञान आर्जित करने के लिए वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग अतिआवश्यक हो गया है। अतः शोधार्थी को वैज्ञानिक पद्धति के द्वारा जाँच या परिक्षण करना चाहिए।
समस्या समाधान शोधार्थी को शोध समस्या समाधान के कार्य सभी तथ्यों के निर्धारण और अपनी योग्यता से करनी चाहिए।
ईमानदारी और विश्वसनीयता: शोध ईमानदारीपूर्ण और विश्वसनीय प्रक्रिया है।
मानवीयता गुण : शोध एक सतत एवं स्वाभाविक प्रक्रिया है। शोध मानवीयता गुणों से परिपूर्ण होता है तथा दीर्ध अतीत के मानवीय अनुभवों का परिणाम है।
शोधार्थी में निम्नलिखित त्रुटियाँ शोध ग्रंथ के नैतिक मूल्य पर प्रश्न चिन्ह लगा देती है- पूर्वाग्रह और पक्षपात, भ्रान्तियाँ, काल्पनिक अवधारणाए, प्रदूषित तथ्य, निकृष्ट प्रकार के औचित्यकरण ।
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