नियमहीनता के सिद्धांत का मूल्यांकन - Evaluation of the principle of rulelessness
नियमहीनता के सिद्धांत का मूल्यांकन - Evaluation of the principle of rulelessness
नियमहीनता का सिद्धांत, यद्यपि अभी पूर्ण नहीं है और उसकी अनेक आलोचनाएँ की जा सकती है और की गई है जिनका उल्लेख हम ऊपर कर चुके हैं, समाजशास्त्र के क्षेत्रा में बहुत अधिक महत्त्वपूर्ण हैं। इसका सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान यह है कि इसने इस तथ्य पर बल दिया है कि नियमहीनता भी नियम व्यवस्था के ही समान सामाजिक घटना है और उसकी उत्पत्ति, विकास एवं विस्तार के कारणों एवं कारकों की खोज सामाजिक संरचना या सामाजिक व्यवस्था या समाज में ही करना चाहिए। इससे स्पष्ट है कि समाज ही नियमहीनता के लिए उत्तरदाई है। अन्य प्रकार के विभिन्न समाज-विरोधी व्यवहार के सिद्धांत जो मूल प्रवृत्तियाँ, वंशानुसंक्रमण आदि पर बल देते थे निर्बल हो गए हैं और सही दिशा में कारणों की खोज प्रारंभ होना संभव हो सका है। समाजशास्त्रीय कारकों पर इस सिद्धांत के कारण बल दिया जाने लगा है। इस सिद्धांत का प्रभाव सुधारात्मक एवं पुननिर्माण की प्रक्रियाओं पर भी हुआ है। समाज व्यवस्था में सुधार और पुननिर्माण की गतिविधियों को बल मिला है और सामाजिक संरचना का गंभीरता से विश्लेषण प्रारंभ हुआ है। विचलित व्यवहार के समाजशास्त्र के क्षेत्रा में तो इस सिद्धांत का और भी अधिक महत्त्वपूर्ण स्थान है। कोहेन ने उचित ही लिखा है - "इसमें संदेह नहीं है कि विचारों का वह पुंज जिसे नियमहीनता का सिद्धांत कहा जाता है पिछलों पच्चीस वर्षों में विचलन के समाजशास्त्र में सर्वाधिक प्रभावशाली एवं महत्त्वपूर्ण प्रतिपादन है।"
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