परिवार का विकास क्रम, पितृसत्तात्मक परिवार - Evolution of family, patriarchal family

परिवार का विकास क्रम,  पितृसत्तात्मक परिवार - Evolution of family, patriarchal family

 पितृसत्तात्मक परिवार : पुरुषों की सत्ता स्थापित हुई तो परिवार का यह रूप वज़ूद में आया। इसमें परिवार के मुखिया पुरुष के अधीन उसकी पत्नी, उसके बच्चे और कुछ दास होते थे। इन सब पर उसकी निरंकुश सत्ता होती थी। पितृत्व सुनिश्चित करने के लिए स्त्री की यौनिकता पर कठोर नियंत्रण ज़रूरी हो गया था। इसलिए परिवार के ऐसे रूप का विकसित होना लाज़िमी था जिसमें उसे पुरुष की निरंकुश सत्ता के अधीन कर दिया जाए। एंगेल्स के अनुसार, परिवार के मातृ-अधिकार आधारित रूप का चोला उतारकर पितृ-अधिकार आधारित एकनिष्ठ रूप का चोला पहनने के बीच की संक्रमणकालीन अवस्था में पितृसत्तात्मक परिवार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


5. एकनिष्ठ विवाह वाला परिवार : परिवार का यह रूप युग्म परिवार से प्रस्फुटित हुआ। कृषि की शुरुआत और विनिमय प्रक्रिया के सुव्यवस्थित रूप लेते जाने के साथ-साथ वर्ग-व्यवस्था ने आकार लेना आरंभ किया तो मनुष्य सभ्यता की अवस्था में पहुँचा। इस अवस्था में एकनिष्ठ विवाह सुदृढ हुआ।

युग्म परिवार की अपेक्षा इसमें विवाह का संबंध ज़्यादा दृढ़ हो गया है। अब स्त्री विवाह-विच्छेद के बारे में सोच भी नहीं सकती थी। पुरुष को पूर्व की भांति विवाह विच्छेद की आज़ादी बरकरार रही है। स्त्री से अब यह अपेक्षित था कि वह पति के प्रति वफादार रहे। किसी अन्य पुरुष का उसके मन में ख्याल आना भी अनैतिक हो जाता है। यदि कोई स्त्री पहले की तरह ही आचरण करने की कोशिश करती तो उसे दंडित किया जाता है। एंगेल्स के शब्दों में अब परिवार आर्थिक इकाई हो जाता है।


इस तरह हम देखते हैं कि एंगेल्स ने स्त्री की अधीनस्थ स्थिति के लिए मुख्य तौर पर दो कारण बताए पहला, निजी संपत्ति का प्रादुर्भाव और दूसरा, उत्पादन के स्थल के रूप में बाहरी दायरे का घरेलू दायरे की जगह ले लेना और इसलिए, स्त्री का उससे दूर होते जाना। यही कारण है कि एंगेल्स ने स्त्री की मुक्ति के लिए निजी संपत्ति के खात्मे और स्त्रियों की उत्पादन में भागीदारी को ज़रूरी माना। अपनी इन स्थापनाओं के साथ एंगेल्स न केवल समाजवादी व्यवस्थाओं बल्कि दुनिया भर के वामपंथी संगठनों और पार्टियों के स्त्री मुक्ति कार्यक्रम के लिए पथ-प्रदर्शक बने हुए हैं।