प्रयोगात्मक अनुसंधान - experimental research
प्रयोगात्मक अनुसंधान - experimental research
प्रयोगात्मक अनुसंधान, अनुसंधान की एक प्रमुख विधि है। प्रयोगात्मक अनुसंधान मे कार्य कारण सम्बन्ध स्थापित किया जाता है। कार्य कारण सम्बन्ध स्थापित करने के लिए दो स्थितियों को संतुष्ट करना होता है। पहली स्थिति मे यह सिद्ध करना होता है कि यदि कारण है तो उसका प्रभाव होगा। यह स्थिति आवश्यक है पर पर्याप्त नहीं। दूसरे मे हमे यह सिद्ध करना होता है कि यदि कारण न हो और फिर भी प्रभाव है तो उसका अर्थ यह हुआ कि प्रभाव का वह कारण नहीं है जिसकी हम अपेक्षा कर रहे थे। प्रयोगात्मक अनुसंधान मे कारण की उपस्थिति प्रभाव को दर्शती है तथा कारण की अनुपस्थिती प्रभाव को नहीं दर्शाती है।
इन्ही दोनो स्थितियों को संतुष्ट करने के बाद हम सही कार्य कारण सम्बन्ध स्थापित कर सकते है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि प्रयोगात्मक अनुसंधान मे दो समूह होते है? - एक प्रयोगात्मक समूह तथा दूसरा नियंत्रित समूह।
प्रयोगात्मक समूह मे शोधकर्ता द्वारा स्वतंत्र चर मे जोड़-तोड़ किया जाता है। इस जोड़-तोड़ का प्रभाव आश्रित चर पर देखा जाता है। नियंत्रित समूह मे शोधकर्ता द्वारा कोई जोड़-तोड़ नहीं किया जाता है और यह भी सिद्ध किया जाता है कि यदि कारण नहीं है तो इसका प्रभाव भी नही है।
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