भारतीय पृष्ठभूमि में परिभ्रमण सिद्धांत द्वारा सामाजिक परिवर्तन की व्याख्या - Explanation of social change in Indian background through travel theory

भारतीय पृष्ठभूमि में परिभ्रमण सिद्धांत द्वारा सामाजिक परिवर्तन की व्याख्या - Explanation of social change in Indian background through travel theory


अभिजात वर्ग के परिभ्रमण की उपरोक्त अवधारणा को भारतीय पृष्ठभूमि पर भी लागू किया जा सकता है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण "भारतीय जाति प्रथा" है। पहले जातीय संस्तरण में ब्राह्मणों की स्थिति सबसे ऊपर थी और सम्पूर्ण जाति-व्यवस्था इन्हीं कि प्रतिष्ठा पर निर्भर थी। प्राचीन भारत में पुरोहित राजाओं का भी उल्लेख मिलता है। वैसे भी राज पुरोहित को राजनीतिक मामलों में पर्याप्त क्षमताएँ प्राप्त थीं और राजा लोग इन पुरोहितों की सलाह व आज्ञा को शायद ही अमान्य करते थे। इस रूप में ब्राह्मण शासक वर्ग तक को नियन्त्रित करने वाले होते थे। सामाजिक व धार्मिक क्षेत्र में भी इसकी प्रचुर शक्ति होती थी। इसके विपरीत. हरिजनों की स्थिति ऐसी थी जिन्हें कि जातीय संस्तरण में सबसे अधर्म या निम्नतम स्थान दिया  था और वे असंख्य सामाजिक, धार्मिक व राजनीतिक निर्योग्यताओं के शिकार थे। परन्तु धीरे-धीरे हरिजनों की सामाजिक स्थिति ऊपर की ओर उठती गई और आज वे, कम-से-कम वैधानिक दृष्टिकोण से ब्राह्मणों के बराबर दर्जे पर पहुँच गए हैं। आज वे अन्य उच्च जातियों के साथ-साथ उच्च अफसर हैं, विधानसभा के सदस्य हैं, मिनिस्टर हैं,

आर्थिक संस्थाओं के संचालन हैं। दूसरी ओर ब्राह्मणों का प्रभुत्व आज पर्याप्त घट गया है, वे अपने पहले की बुद्धिमत्ता, कुशलता, सामर्थ्य और शौर्य को खोकर धीरे-धीरे नीचे की ओर उतरते जा रहे हैं अर्थात् उनकी पूर्व प्रतिष्ठा व स्थिति से उनका पतन हो रहा है और उनके स्थान को निम्न जाति के सदस्य लेते जा रहे हैं। इस प्रकार भारत की सामाजिक पृष्ठभूमि पर ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर आने-जाने का परिभ्रमण हो रहा है। उसी प्रकार अंग्रेजी शासनकाल में भारतवर्ष में जो •लोग शासक थे, शक्तिमान तथा प्रभावशाली थे, आज उनका पतन हो चुका है और उनके रिक्त स्थानों पर आज वे लोग हैं जिनको कि अंग्रेज लोग दबाकर रखना चाहते थे, जिनको जेल में बन्द कर देते थे और जिन पर लाठी व गोलियों की वर्षा करते थे तथा जिनको वे (काला आदमी) या (गुलाम) की संज्ञा देते थे। वही (गुलाम) आज राजा है, शासक है, शक्तिवान् और प्रभावशाली है और जो राजा थे उनका आज भारतीय सामाजिक व्यवस्था ने नाम तक मिट गया है। वे चले गए हैं. उनका (कब्रिस्तान) मात्र भारत में रह गया है। भारतीय पृष्ठभूमि पर अभिजात वर्ग के परिभ्रमण का इससे उत्तम उदाहरण है और क्या हो सकता है।