अन्वेषणात्मक अनुसंधान अभिकल्प के चरण - Exploratory Research Design Stages
अन्वेषणात्मक अनुसंधान अभिकल्प के चरण - Exploratory Research Design Stages
अन्वेषणात्मक अनुसंधान अभिकल्प में निम्न चरणों को अपनाया जाता है।
क) साहित्यों का सर्वेक्षण
अन्वेषणात्मक अनुसंधान अभिकल्प में सर्वप्रथम साहित्यों का सर्वेक्षण किया जाता है। हालांकि यह पहले भी बताया जा चुका है कि इस प्रकार के अभिकल्प का प्रयोग तब किया जाता है जब है संबंधित क्षेत्र का अधिक ज्ञान न हो। परंतु सामाजिक शोध से संबंधित बहुत ही कम ऐसे क्षेत्र हैं, जो शोध आदि से अछूते बचे हों। अतः संबंधित क्षेत्र से जुड़े चरों व मुद्दों से संबंधित साहित्यों के बारे में अध्ययन कर शोधकर्ता उसके बारे में ज्ञान अर्जित करने का प्रयास करता है। साथ ही अनेक चरों व मुद्दों के बारे में जानकारी प्राप्त कर संबंधित क्षेत्र के बारे में गहन अंतर्दृष्टि प्राप्त करने का प्रयास भी करता है।
ख) अनुभव सर्वेक्षण
साहित्यों के अध्ययन के पश्चात शोधकर्ता अगले चरण के रूप में अनुभव सर्वेक्षण करता है। इसमें वह अध्ययन क्षेत्र में जाकर प्राथमिक रूप से जानकारी संकलित करता है तथा प्राप्त जानकारी के आधार पर अध्ययन क्षेत्र और प्रमुख चरों के बारे में समझ विकसित करता है। इसके अलावा वह अनुभव सर्वेक्षण की सहायता से ही शोध की दिशा और रूपरेखा को निर्मित कर पाता है। साथ ही इसके आधार पर ही शोधकर्ता द्वारा शोध की अग्रिम तैयारी क्रियान्वित की जाती है।
ग) उत्तरदातों का चयन
अन्वेषणात्मक अनुसंधान अभिकल्प में तीसरे चरण के रूप में उत्तरदाताओं का चयन किया जाता है।
शोधकर्ता द्वारा किया गया अनुभव सर्वेक्षण उत्तरदाताओं के चयन हेतु लाभकारी सिद्ध होता है तथा इसी के आधार पर उत्तरदाताओं को चिन्हित किया जाता है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण चरण होता है तथा सही उत्तरदाताओं के चयन द्वारा ही शोध को गुणवत्तापूर्ण तथा सही दिशा में ले जाया जा सकता है। अप्रासंगिक उत्तरदाताओं के चयन से शोध के त्रुटिपूर्ण होने की संभावना रहती है।
घ) प्रश्नों का निर्माण
उत्तरदाताओं के चयन के पश्चात यह आवश्यक होता है कि शोधकर्ता द्वारा उपयुक्त प्रश्नों की निर्मिति की जाय। सटीक व सीमित प्रश्नों की सहायता से शोधकर्ता संबंधित विषय पर जानकारी प्राप्त करता है। यदि प्रश्नों की निर्मिति सही तरीके से नहीं होती है, तो शोध की वैधानिकता पर प्रश्न चिन्ह लग सकता है।
ङ) तथ्यों का विश्लेषण पर्याप्त वैज्ञानिक तरीके से तथ्यों के संकलन के पश्चात शोधकर्ता द्वारा उनका विश्लेषण किया जाता है और इसके पश्चात यदि आवश्यक हो तो शोधकर्ता द्वारा उपकल्पना निरूपित की जाती है।
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