मनोवृत्ति परिवर्तन को प्रभावित करने वाले कारक - factors influencing change in attitude

मनोवृत्ति परिवर्तन को प्रभावित करने वाले कारक - factors influencing change in attitude


जैसा कि पहले ही बताया गया है कि मनोवृत्ति की दिषा और मात्रा में परिवर्तन होते हैं। यहाँ उन कारकों

की चर्चा की जा रही है जो इसे प्रभावित करते हैं। 


1. अतिरिक्त सूचना: मनोवृत्ति में औपचारिक और अनौपचारिक दोनों तरह की सूचना का प्रभाव होता है। औपचारिक सूचना जैसे कि षिक्षा, प्रचार आदि तथा अनौपचारिक जैसे व्यक्तिगत प्रत्यक्ष अनुभव, दूसरों से बातचीत आदि। सूचना के विभिन्न स्रोत हो सकते हैं जैसे कि समाचार पत्र, टेलिविजन, रेडियो। आजकल सोषल नेटवर्किंग साईट भी इसमें बहुत प्रभावी भूमिका निभा रही हैं जैसे- फेसबुक, ट्विटर, वाट्स एप आदि।


2. समूह में परिवर्तन: जिस समूह में व्यक्ति रहता है, उस समूह का प्रभाव उसकी मनोवृत्ति पर पड़ता है। यदि व्यक्ति अपना समूह बदलकर दूसरे समूह में शामिल होता है तो उसकी पूर्व की मनोवृत्ति में भी परिवर्तन हो जाता है।

इसके अनेक उदाहरण दिन प्रतिदिन देखने को मिलते हैं। जैसे किसी राजनैतिक दल को छोड़कर दूसरे राजनैतिक दल में शामिल हो जाना, अपना धर्म बदल कर दूसरे धर्म को अपना लेना, एक व्यवसाय को छोड़कर दूसरा व्यवसाय शुरू कर देना आदि।


न्यूकाम्ब ने एक अध्ययन के द्वारा यह बताया है कि यदि संदर्भ समूह में परिवर्तन कर दिया जाता है तो व्यक्ति की मनोवृत्ति में परिवर्तन हो जाता है। इन्होंने अपने अध्ययन में देखा कि जिन विद्यार्थियों की में पूर्व में अनुदार मनोवृत्ति थी उनमें नये समूह जैसे कि कालेज के वातावरण में रहने पर उनकी मनोवृत्ति उदार हो गयी। क्यों कि कालेज के अधिकारी उदारता की मनोवृत्ति को प्रोत्साहित करते थे जिससे वहाँ के विद्यार्थियों में उदारता की मनोवृत्ति विकसित होती थी। समूह संबद्धता में परिवर्तन से मनोवृत्ति परिवर्तन होता है और यह दो कारकों पर निर्भर करती है। एक तो उस समूह की विषेषता अर्थात समूह के मानक, मूल्य एवं विष्वास आदि। तथा दूसरा उस व्यक्ति की सदस्यता की विषेषतायें। यदि समूह की विषेषतायें उसे महत्त्वपूर्ण और आकर्षक लगती है तब समूह के अनुरूप मनोवृत्ति में परिवर्तन भी होगा। यदी व्यक्ति की सदस्यता अर्थात उसकी समूह में स्थिति को महत्व दिया जाता है तो उसकी मनोवृत्ति में परिवर्तन हो जाता है। होनात्स (1950) के अध्ययन के अनुसार यदि नये समूह में व्यक्ति की स्थिति ऊँची है तो वह अनुरूपता प्रदर्षित करता है।


3. संचारः मनोवृत्ति परिवर्तन में संचार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विषेषकर अनुनयात्मक संचार मनोवृत्ति परिवर्तन का बहुत महत्वपूर्ण और प्रमुख कारण है। मनोवृत्ति परिवर्तन में अनुनयात्मक संचार के महत्व को दिखलाने के लिये समाज मनोवैज्ञानिकों ने कई महत्वपूर्ण अध्ययन किये ही अनुनय का अर्थ ऐसे प्रयास से होता है जो दूसरों की मनोवृत्ति में विभिन्न प्रकार के संदेषों के माध्यम से परिवर्तन करता है। मनोवृत्ति में परिवर्तन तब होता है जब संबंधित विषय के बारे में सूचना पर्याप्त हो। होमलैण्ड, जेनिस एवं केली (1953) ने अनुनयात्मक संचार की मनोवृत्ति परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका को दिखाने के लिये कई प्रयोग एवं शोध किये। इनके शोधों के परिणाम स्वरूप कई महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकले। उन्होंने चार मुख्य कारक बताये जिनपर मनोवृत्ति परिवर्तन निर्भर करता है। ये चार कारक इस प्रकार हैं।


4. संचारक की विषेषतायें: संचारक की विषेषतायें अर्थात सूचना देने वाले की विषेषतायें मनोवृत्ति परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यदि सूचना देने वाला विष्वसनीय है (त्मकपइसम ब्वउउनदपबंजवत) तो, उसकी सूचना पर व्यक्ति अधिक विष्वास करता है जिससे उसकी मनोवृत्ति में परिवर्तन सरल हो जाता है। इस तथ्य को होमलैण्ड तथा विष (1951) ने अपने एक प्रयोग के द्वारा दिखलाया है। इसमें कालेज के छात्रों को एक ही तरह की सूचनायें पढ़वायी गयी और फिर अलग-अलग समूह में बांटकर एक समूह से कहा गया कि इन सूचनाओं का स्रोत विष्वसनीय है

तथा दूसरे समूह को बताया गया कि इन सूचनाओं का स्रोत कम विष्वसनीय है। परिणाम में यह पाया गया कि विष्वसनीय स्रोत बताने पर संबंधित समूह की मनोवृत्ति में अधिक परिवर्तन आया तथा कम विष्वसनीय स्रोत के बताये जाने वाले समूह में बहुत ही कम छात्रों की मनोवृत्ति में परिवर्तन हुआ। इस प्रयोग के एक और पहलू जिसे स्लीपर प्रभाव कहते हैं, का भी पता चला जिसमें समय बीतने पर (लगभग एक माह बाद ) दोनों समूह की मनोवृत्ति देखी गयी, जिसमें पाया गया कि उच्च विष्वसनीय संचारक का प्रभाव कम तथा निम्न विष्वसनीय संचारक का प्रभाव उच्च हो गया।


संचारक का आकर्षक होना भी मनोवृत्ति परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस कारक पर भी विभिन्न विद्वानों ने कई अध्ययन किये जिनमें चिकिन (1979) तथा पलाक एवं सहयोगियों ने अपने अध्ययन में पाया कि शारीरिक रूप से सुंदर लोगों द्वारा दी गयी सूचना का प्रभाव दूसरे लोगों पर अधिक होता है जबकि जो लोग कम सुंदर होते हैं या आकर्षक नहीं होते, उनकी सूचना का प्रभाव दूसरे लोगों पर कम पड़ता है। इसी प्रकार जो लोग हमारे समान होते हैं उनको हम अधिक पसंद करते हैं,


फलस्वरूप हम उनकी बातों से अधिक प्रभावित होते हैं और मनोवृत्ति में परिवर्तन होता है। (पप) सूचना का स्वरूप एवं विषेषताः मनोवृत्ति परिवर्तन हेतु व्यक्ति को दी जाने वाली सूचना का स्वरूप एवं विषेषतायें मनोवृत्ति परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अर्थात मनोवृत्ति परिवर्तन सूचना के स्वरूप पर भी बहुत निर्भर करता है।


(क) अगर सूचना ऐसी है जिससे व्यक्ति में भय या कोई अन्य नकारात्मक संवेग उत्पन्न होता है तो इसका प्रभाव मनोवृत्ति परिवर्तन में पड़ता है। जैसे यदि कोई सूचना ऐसी है कि जिसमें यह बताया जाता है कि अमुक वस्तु के सेवन से आपको गम्भीर बीमारी हो सकती है तो इससे व्यक्ति की मनोवृत्ति में सरलता से परिवर्तन हो जाता है। सिगरेट पान मसाले, अथवा अन्य मादक द्रव्यों पर यह सूचना कि इसके सेवन से आपको कैंसर हो सकता है या आपके शरीर का कोई आंतरिक अंग खराब हो सकता हैं इत्यादि प्रकार की सूचनाये व्यक्ति में भय उत्पन्न करने वाली होती हैं जिससे व्यक्ति उस वस्तु के सेवन करने से बचता है। 


(ख) एक-पक्षीय और द्वि-पक्षीय सूचना: एक पक्षीय सूचना या संदेष का अर्थ सूचना का केवल धनात्मक या केवल ऋणात्मक पक्ष ही व्यक्ति को बताना ।

द्विपक्षीय संदेष का मतलब किसी सूचना के दोनों पक्षों अर्थात धनात्मक तथा नकारात्मक, दोनों पक्षों से अवगत कराना। शोधों से स्पष्ट हुआ है कि केवल एक पक्ष बताने से संगत परिवर्तन होता है। जबकि सूचना के दोनों पक्षों को बताने पर मनोवृत्ति में असंगत परिवर्तन होता है।


(ग) संचार की शैली: केवल संदेष ही महत्वपूर्ण नहीं होता अपितु संदेष देने की शैली भी मनोवृत्ति परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विभिन्न शोधकर्ताओं जैसे जिलमैन (1972) ने अपने शोधों से स्पष्ट किया है कि यदि संदेष देने वाला अपने वक्तव्य में प्रष्नवाचक वाक्यों का प्रयोग करता है तो इससे मनोवृत्ति परिवर्तन होता है।


कुछ विद्वानों एपल, स्ट्रीटर एवं क्राउस ने अपने शोधों से यह स्पष्ट किया कि यदि संदेष देने वाला व्यक्ति धारा प्रवाह न बोलकर रूक-रूक कर अपनी बात बोलता है तो मनोवृत्ति परिवर्तन, धारा प्रवाह बोलने से कम प्रभावी होता है।


(घ) सूचना का क्रम: यह देखा गया है कि किसी व्यक्ति, वस्तु अथवा घटना के बारे में जो सूचना दी जाती है वह मनोवृत्ति परिवर्तन में ज्यादा प्रभावषाली होती है, जबकि बाद वाली सूचना उतनी प्रभावी नहीं होती है।

5. लक्षित व्यक्ति की विषेषतायें: आपने देखा होगा कि एक ही वक्ता के एक ही (या एक जैसे) संचार का प्रभाव सभी स्रोताओं पर एक जैसा नहीं होता। जैसे किसी राजनैतिक सभा या रैली में नेता द्वारा बोलीगयी बातों का प्रभाव सभी स्रोताओं पर एक जैसा नहीं होता। इससे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि अवष्य ही स्रोताओं या संदेष ग्रहण करने वालों में ही कुछ ऐसी विषेषतायें विद्यमान होती है जो संदेष प्राप्ति या संदेष के प्रभाव में अन्तर करती हैं। इस प्रकार के प्रभाव में स्रोता या संदेष प्राप्तकर्ता की वैयक्तिक विषेषतायें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।


(क) व्यक्तित्वः विभिन्न अध्ययनों में यह देखा गया है कि जिन व्यक्तियों में आत्मसम्मान का स्तर ऊँचा होता है उन व्यक्तियों का मनोवृत्ति परिवर्तन कठिन होता है क्यों कि जिन व्यक्तियों का आत्म-सम्मान का स्तर ऊँचा होता है उनमें आत्म-विष्वास भी अधिक होता है। फलस्वरूप, दूसरे की बातों का प्रभाव उन पर अधिक नहीं होता। आत्म सम्मान से तात्पर्य अपने स्व या आत्म के मूल्यांकन से होता है। यह आत्म का एक पक्ष है जो व्यक्ति के स्वयं के मूल्यांकन को बताता है। व्यक्ति श्रेष्ठ या अच्छा है यहाँ, यह मायने नहीं रखता बल्कि वह अपना मूल्यांकन सकारात्मक व्यक्ति के रूप में करता है तो उसका आत्म-सम्मान का स्तर ऊँचा होगा।

इसी प्रकार व्यक्ति यदि अपनी गतिविधियों या गुणों में अच्छा और कुषल है लेकिन वो अपने आप को कमजोर आंकता है तो उसके आत्म सम्मान का स्तर निम्न होगा। कुछ व्यक्तियों का ऐसा स्वभाव होता है किवे किसी भी अनुनयात्मक संचार अथवा संदेष को आसानी से ग्रहण कर अपनी मनोवृत्ति में परिवर्तन कर लेते हैं। (सीयर्स तथा हिटनी, 1975)


(आ) प्रचार टीवी, रेडियो समाचार पत्र, सिनेमा इत्यादि पर आजकल विज्ञापन दिखाना बहुत ही सामान्य हो गया है। जिसका एक मात्र उद्देष्य दर्षकों या श्रोताओं की मनोवृत्ति में परिवर्तन लाना या मनोवृत्ति का विकास करना है ताकि आप उस कंपनी के उत्पाद अधिक से अधिक क्रय करें। आजकल चुनाव में भी प्रचार की बहुत ही बड़ी भूमिका हो गयी है। विभिन्न राजनैतिक दल प्रचार के माध्यम से अपने नेता को विजयी बनाने के लिये प्रचार का सहारा लेते हैं ताकि मतदाताओं की मनोवृत्ति अपने पक्ष में परिवर्तित या विकसित की जा सके और चुनाव जीता जा सके। भारत सरकार और राज्य की सरकारें विभिन्न सामाजिक और स्वास्थ्य के मुद्दों को प्रचार के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाती हैं ताकि लक्षित व्यक्ति की मनोवृत्ति में परिवर्तन या विकास कर उन सामाजिक या स्वास्थ्य मुद्दों में अपना उत्कृष्ठ अथवा अपेक्षित सहयोग कर सकें। प्रचार लिखित अथवा मौखिक, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष किसी भी रूप में हो सकता है।


(अ) भूमिका निर्वहनः एक व्यक्ति जब षिक्षक बन जाता है तो उसकी भूमिका भी पहले से बदल जाती है। अब उसे एक आदर्ष नागरिक की भूमिका निभानी पड़ती है। ऐसा देखा गया है कि जिस तरह की भूमिका व्यक्ति निभाता है वैसी ही मनोवृत्ति उसमें विकसित हो जाती है।


(ख) अभिप्रेरणा: यदि लक्षित व्यक्ति को बताये जा रहे संदेष से कुछ लाभ होता है तो उसमें मनोवृत्ति परिवर्तन सरल और तेज हो जाता है। उदाहरण के लिये योग से स्वास्थ्य अच्छा रहता है। इसलिये, व्यक्ति योग के प्रति अपनी सकारात्मक मनोवृत्ति बनाता है। परिणाम-स्वरूप वह प्रतिदिन सुबह योग करता है।


हमने देखा है कि मनोवृत्ति परिवर्तन को प्रभावित करने वाले कई कारक हैं। कुछ कारक व्यक्ति •या लक्ष्य से संबंधित, कुछ स्रोत से संबंधित तो कुछ संचार और संचार माध्यम से संबंधित हैं। यहाँ मुख्य कारकों की चर्चा की गयी है।