जनजातीय समुदायों में परिवर्तन के कारक - Factors of Change in Tribal Communities

 जनजातीय समुदायों में परिवर्तन के कारक - Factors of Change in Tribal Communities


जनजातीय समुदायों के जीवन में परिवर्तन के लिए उत्तरदायी कारक निम्न इस प्रकार हैं- 


1. गैर-जनजातीय समुदायों से संपर्क जनतातीय जीवन में परिवर्तन का सबसे बड़ा कारण गैर जनजातीय समुदायों से संपर्क है। यह संपर्क परिवर्तन की तमाम प्रक्रियाओं का परिणाम एवं जनजातियों के बीच उनकी संस्कृति में बदलाव लाने वाला सबसे बड़ा कारक है। जनजाति-जाति सातत्य भी वर्तमान परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिक है।


2. औद्योगीकरण - औद्योगीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे वस्तुओं का उत्पादन हस्त-उपकरणों के स्थान पर संचालित मशीनों के आधार पर किया जाता है। शक्ति संचालित मशीनों का प्रयोग न केवल कारखाना अपितु यातायात, संचार, परिवाहन, तथा खेती आदि में किया जाता है। औद्योगीकरण को उघोगवाद की स्थापना की प्रक्रिया के रूप में भी परिभाषित किया जाता है। उघोगवाद और औद्यौगीकरण दोनो ही उत्पादन की ऐसी विधियों के संक्रमण का संकेत देती हैं जो पारंपरिक व्यवस्था की तुलना में आधुनिक समाजों में अधिक धन सम्पदा को अर्जित करने की क्षमता विकसित करता है।


3. नगरीकरण - नगरवाद के लक्षणों के विकास एवं प्रसार की प्रक्रिया नगरीकरण कहलाती है। लुई वर्थ ने ग्रामों के नगरों में बदलने की प्रक्रिया को नगरीकरण की संज्ञा दी है। इसी प्रकार कुछ विद्वानों ने ग्रामीण जनसंख्या के नगर की ओर निष्क्रय की प्रक्रिया को नगरीकरण का नाम दिया है, वास्तव में नगरीकरण की प्रक्रिया का प्रयोग कई अर्थों में किया जाता है। जैसे नगरीय होने, नगरों की ओर जाना, कृषि कार्य को छोड़कर अन्य कार्यों को अपनाना तथा व्यवहार प्रतिमानो में समान्तर परिर्वतन आदि।


4. आधुनिकीकरण आधुनिक जीवन शैली को अपनाने की प्रक्रिया को आधुनिकीकरण की संज्ञा दी जाती है। वर्तमान में जनजातियों के बीच आधुनिकीकरण को उनके जीवन में अमूलचूल परिवर्तन लाने वाली प्रक्रिया कहा जा सकता है।


5. संस्कृतिकरण जाति व्यवस्था भारतीय समाज का अभिन्न अंग है। जाति व्यवस्था में रहकर जब कोई व्यक्ति या समूह उच्च जाति के क्रिया-कलापों को अपनाता है तो इस प्रक्रिया को संस्कृतिकरण कहते हैं।


एम. एन. श्रीनिवास ने अपनी पुस्तक Religion And Society Among The Coorgs of South India' में जाति के गतिशीलता की प्रक्रिया को व्यक्त करते हुए संस्कृतिकरण की अवधारणा दी और बताया कि जब कोई निम्न जाति अपने रीति-रिवाजों, कर्मकाण्डों एवं विचारधारा को उच्च जाति के अनुसार करने लगता है, तो उसे संस्कृतिकरण कहते हैं। जनजातीय समुदाय भी परिवर्तन की इस प्रक्रिया से गुजर रही है जिसे दूसरे शब्दों मे गैर-जनजातिकरण (Detribalization) कहते हैं।


6. वैश्वीकरण सामाजिक-आर्थिक संबंधों के सम्पूर्ण विश्व तक विस्तार को वैश्वीकरण कहा जाता है। वर्तमान में मानव जीवन के अनेक पक्ष, जिन समाजों में हम रह रहे हैं, उनसे हजारो मील दूर स्थित संगठनों और सामाजिक ताने-बाने से प्रभावित होने लगे हैं। इस प्रकार विश्व एक एकीकरण समाज का रूप धारण करता जा रहा है। इस संबंध में सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि विषयवाद के द्वारा एक ऐसी नवीन चेतना का उदय हो रहा है, कि सम्पूर्ण विश्व एक गाँव की तरह प्रतीत होता है। इस प्रक्रिया ने जनजाति जीवन में भी परिवर्तन लाया है।


7. जनजजातिय विकास नीति एवं योजनाएं हमारे देश में विकास हेतु नियोजित परिवर्तन के मॉडल को अपनाया गया जिसके तहत जनजातीय विकास हेतु शिक्षा, स्वाथ्य एवं आजीविका के क्षेत्र में नीति एवं योजनाएं लागू की गई इन नीति एवं योजनाओं के परिणामस्वरूप जनजातीय जीवन में व्यापक परिवर्तन हुआ।