शिक्षा की विशेषताएँ / कार्य - Features / Functions of Education

शिक्षा की विशेषताएँ / कार्य - Features / Functions of Education


शिक्षा की विशेषताएँ शिक्षा के कार्य निम्नानुसार है


1. शिक्षा उन्नति के रूप में शिक्षा का मुख्य कार्य उन्नति करना है। जॉ ड्र्यूवी ने अपनी पुस्तक 'डैमोक्रेसी एण्ड एजुकेशन' में लिखा है कि “उन्नति करना जीवन की विशेषता है। और शिक्षा का इसके अलावा कोई लक्ष्य नहीं कि जो उसे ग्रहण करे, उसका विकास करें।" हम यह कह सकते है कि जीवन विकास है और जीवन को विकास की ओर उन्मुख करना शिक्षा की जिम्मेदारी है।


2. शिक्षा मानव के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करती है शिक्षा के द्वारा बालक का शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक चारित्रिक, समाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से विकास करती है। महात्मा गांधी के अनुसार, “शिक्षा से मेरा अभिप्राय है बालक के शरीर मन व आत्मा का पूर्ण विकास ।”


3. शिक्षा आत्म निर्भर बनाती है- शिक्षा व्यक्ति को इस योग्य बनाती है कि वह अपने पैरों पर खड़ा हो सके तथा अपनी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति स्वयं कर सके उसे किसी पर निर्भर न रहना पड़े। प्रो. बागले के अनुसार “शिक्षा को व्यक्ति को आत्म निर्भर बनाना चाहिए जिससे वह किसी पर भार न बने।" आत्मनिर्भर बनने से व्यक्ति में आत्मविश्वास आता है और वह प्रसन्न रहता है।


4. शिक्षा वातावरण से अनुकूलन एवं समायोजन सिखाती है- शिक्षा व्यक्ति को इस योग्य बनाती है कि वह वातावरण के साथ अनुकूलन व समायोजन कर सकें।


5. शिक्षा बाक का सामाजीकरण करती है शिक्षा का एक मुख्य कार्य है बालक के व्यक्तित्व के सामाजिक पक्ष को विकसित करना। शिक्षा को इस प्रकार शिक्षित करती है कि वह समाज के नियम कायदों को समझे एवं उनके साथ अनुकूलन या समायोजन करें। वह समाज के मूल्य एवं परम्पराओं को अपने व्यक्तित्व में समाहित करें।


6. शिक्षा बालक का चारित्रिक विकास करती है शिक्षा बालक के अन्दर सगुणों का विकास करती है। शिक्षा बालक के अन्दर शाश्वत मूल्यों व सामाजिक मूल्यों के प्रति आस्था की भावना उत्पन्न करती है जिससे बालक बालक का व्यवहार बदलता है।


7. शिक्षा उत्तम नागरिक बनाने में सहायता प्रदान करती है शिक्षा के द्वारा छात्रों में आदर्श नागरिक के गुणों सच्च चरिता अनुशासन, निष्पक्ष चिन्तन, देशभक्ति, सहयोग, त्याग, सहानुभूति, सहनशीलता एवं बन्धुत्व का विकास करती है। 


8. शिक्षा आवश्यकताओं की पूर्ति करती है व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के शिक्षा द्वारा करता है मनुष्य की व्यक्तिगत,

सामाजिक आर्थिक मनोवैज्ञानिक सभी आवश्यकतायें शिक्षा के द्वारा ही पूर्ण होती है। शिक्षित होकर मनुष्य अपनी समस्याओं का हल प्राप्त करता है। 


9. शिक्षा राष्ट्रीय भावना का विकास करती है शिक्षा के द्वारा राष्ट्रीय भावना, भावात्मक एकता, राष्ट्रीय सम्पति की सुरक्षा, राष्ट्रीय चरित्र, राष्ट्र भक्ति का विकास होता है शिक्षा राष्ट्रहित में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करती है। 


10. शिक्षा अन्तर्राष्ट्रीयता का विकास करती है शिक्षा मनुष्य में विश्व नागरिकता की भावना उत्पन्न करती है विश्व शान्ति के प्रति प्रेम का विकास कर विभिन्न देशों की संस्कृति, साहित्य का ज्ञान कराती है।