अंतर्वस्तु विश्लेषण के गुण - Features of Content Analysis
अंतर्वस्तु विश्लेषण के गुण - Features of Content Analysis
1. अदृश्य तथा अप्रतिक्रियात्मक विधि- अंतर्वस्तु विश्लेषण विधि के द्वारा अध्ययन किए जाने वाले प्रयोज्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है और ना ही प्रयोग शोधकर्ता को किसी भी रूप में प्रभावित कर सकता है। शोध की प्रत्यक्ष विधियां साक्षात्कार, अवलोकन, प्रयोग आदि में शोधकर्ताओं का प्रयोग के साथ सीधा संबंध होता है। प्रत्यक्ष विधियों के प्रयोग में कई बार अस्वाभाविकता और कृत्रिमता उत्पन्न हो जाने के कारण वास्तविक तथ्यों का संकलन कठिन होता है। यह अस्वाभाविकता शोधकर्ता की उपस्थिति या बाह्य परिवेश जहां साक्षात्कार या अवलोकन किया जा रहा है कि प्रभाव से उत्पन्न हो सकती है।
2. इस विधि के विफल होने का कोई भय नहीं होता अर्थात जहां सूचनादाता साक्षात्कार के लिए तैयार नहीं होते या सूचनादाता उपलब्ध नहीं है जैसे सूचनादाता जीवित ही नहीं है
या वह बहुत दूर रहते हैं या उनके व्यवहार का अवलोकन संभव नहीं है किंतु उनके बारे में कुछ दस्तावेज फिल्म या अन्य सामग्री उपलब्ध है सुचनादाता से संबंधित द्वितीयक सामग्री का प्रयोग कर उनके बारे में परिणाम निकाले जा सकते हैं। अज्ञात लेखकों के बारे में जानकारी हासिल करना, शत्रु द्वारा प्रचारित किए गए प्रचार के बारे में निष्कर्ष निकालना, अंतरराष्ट्रीय संकट की स्थिति में नेताओं के विचारों को जानने के लिए यह विधि बहुत उपयोगी सिद्ध हुई है।
3. ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक शोधों के लिए विश्वसनीय विधि- ऐसे व्यक्ति जो हमारे प्रश्नों के उत्तर देने के लिए उपलब्ध नहीं है या किसी काल विशेष में विवाह, परिवार, राज्य, सामाजिक मूल्यों का क्या रूप था इन विषयों की व्यवस्थित जानकारी इस विधि द्वारा उपलब्ध लिखित सामग्री के विश्लेषण से प्राप्त की जा सकती है।
4. अन्य विधियों की पूरी विधि के रूप में इस विधि को अन्य विधियों की एक पूरक विधि या किसी शोध के प्रारंभिक विचार प्रकल्पना की रचना के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है।
एक चीनी कहावत है कि "अच्छी से अच्छी याददाश्त से धुंधली लिखावट साफ होती है।" एक शोधकर्ता प्रश्नावली साक्षात्कार से प्राप्त तथ्यों की तुलना या उनकी प्रमाणिकता की जांच इस विधि के द्वारा प्राप्त तथ्यों से कर सकता है।
5. इस विधि का प्रयोग ऐसे सामाजिक समूह के अध्ययन में भी किया जा सकता है इनके साथ संपर्क स्थापित करना दुष्कर होता है। यहीं नहीं इस विधि की पुनरावृत्ति भी की जा सकती है जबकि कई बार घटना विशेष की अवधि समाप्त हो जाती है यह सूचना दाता बार-बार उन्हीं प्रश्नों का उत्तर देने के लिए तैयार नहीं होता।
6. जहां कहीं प्रयोग अध्ययन महत्वपूर्ण होता है वहां इस विधि का प्रयोग किया जाना आवश्यक होता है। मनोविश्लेषणात्मक साक्षात्कारो प्रक्क्षेपि विधियों से प्राप्त तथ्यों अथवा कई अन्य प्रकार के विश्लेषण में भी इस विधि की निर्विवाद उपयोगिता सिद्ध हुई है।
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