नृजातीय अध्ययन की विशेषताएं - Features of Ethnic Studies
नृजातीय अध्ययन की विशेषताएं - Features of Ethnic Studies
• इसके अतिरिक्त इससे प्राप्त उत्तर बहुत ही विश्वसनीय एवं वैध होते हैं इससे किसी व्यक्ति या समुदाय के विषय में समग्र ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। नृजातीय वैज्ञानिक अध्ययन में तथ्य या डाटा इकट्ठा करने के लिए वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग का उपयोग किया जा सकता है।
• समूह विशेष या संस्कृति विशेष के गहन विवेचन की कला और विज्ञान से लोगों का गहन अध्ययन किया जाता है यह लोगों के समग्र अनुभवों की प्रस्तुति करता है।
• इसके द्वारा स्वभाविक स्थिति प्राकृतिक अवस्था में लोगों का अध्ययन किया जाता है क्रमबद्ध विधियों द्वारा शोधकर्ता कि क्षेत्र में सीधी सहभागिता होती है
इसके द्वारा साधारण क्रियाओं और सामाजिक अर्थों को ग्रहण करना होता है न कि अर्थों का बाहर ओपन करना होता है। अर्थात अध्ययन क्षेत्र में उपलब्ध हर संभव सूत्र के द्वारा आंकड़ों को एकत्र करना नृवैज्ञानिक का महत्वपूर्ण कार्य होता है।
• नृवैज्ञानिक अध्ययन में शोधकर्ता कि एक लंबे समय तक क्षेत्र के लोगों और दैनिक जीवन में सहभागिता होती है प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से घटनाओं का साक्षी होता है जो कहां जाता है वह सुनना होता है और उसी में वह अपने विवेक के अनुसार प्रश्न भी कर सकता है।
• इससे अध्ययन करते समय इस बात का ध्यान देना चाहिए कि प्रयोज्य के ऊपर अपनी संस्कृति और भाव (प्रेम, घृणा आदि) नहीं लादना चाहिए इसमें अध्ययन करता का जो अनुभव होता है
वही ज्ञान होता है और यह अनुभव उनके साथ रहकर ही प्राप्त किया जा सकता है अर्थात शोधकर्ताओं पूर्ण रूप से अपने आप को उनके जैसा बना लेना चाहिए है।
• इसमें शोधकर्ता को ध्यान देना होता है कि उसके शोध का लाभ किसे प्राप्त होता है यहां ध्यान देना चाहिए कि जिस पर अध्ययन किया जा रहा है इसका लाभ उन्हीं को मिले।
• इस अध्ययन के माध्यम व्यवहार, भाषा और वस्तुओं में निकटता का पता लगाया जाता है।
• प्रस्तुत शोध प्रविधि के माध्यम से गहन वर्णन और स्वाभाविक परिस्थिति का बोध एवं वास्तविकता की खोज की जाती है।
• इसमें शोधकर्ता को उस परिस्थिति में जाकर ध्यान से वह सावधानीपूर्वक अवलोकन उसके वास्तविक रूप में करना होता है।
शोधकर्ता अपनी संस्कृति से हटकर दूसरी संस्कृति का अध्ययन करते हैं और उसकी गहनता के साथ अध्ययन करना होता है। शिकागो के एक नूवैज्ञानिक ( के मैकमेरिया) ने भारत के गांव का अध्ययन किया तथा उन्होंने कहा कि भारतीय समाज के व्यक्ति आपस में मिल जुल कर रहते हैं. साथ ही एक दूसरे की हर संभव मदद के लिए तत्पर रहते हैं। उन्होंने भारत के गांव का अध्ययन करके अपनी एक व्याख्या में कहा कि "Indians are devidual not individual" अनुसंधानकर्ता को व्यक्ति की आंतरिक आवश्यकता को समझने के लिए सूझबूझ का उपयोग करना चाहिए न कि बाहरी तत्वों पर ध्यान देना चाहिए।
यह पूरी तरह से इंद्रियानुभविक है। शोधकर्ता को उन्हीं की नजर से देखना चाहिए था जो समझते हैं और बताते हैं वही सत्य होता है तात्पर्य है कि शोधकर्ता को व्यक्तिनिष्ठ दृष्टिकोण का उपयोग करना चाहिए। यह रेखीय विधि नहीं है या एक चक्रीय विधि है। अर्थात शोधकर्ता पुनः उस समूह में जाकर उनसे पूछताछ कर सकता है कि यह अध्ययन किया गया है वह सही है या कि कुछ और है।
रिचर्ड्सन (2000) ने नृजातीय शोध के कुछ महत्वपूर्ण मानकों की व्याख्या की- ठोस योगदान, सौंदर्यपरकता, वैचारिकता, प्रभाविकता, यथार्थ की अभिव्यक्ति इत्यादि।
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