मुस्लिम कालीन शिक्षा व्यवस्था की विशेषताएं - Features of Muslim era education system
मुस्लिम कालीन शिक्षा व्यवस्था की विशेषताएं - Features of Muslim era education system
मुस्लिम काल में शिक्षा के उद्देश्य निम्नलिखित थे-
• इस्लाम धर्म का प्रसार करना
• इस्लामी संस्कृति का प्रसार करना
• ज्ञान का प्रसार करना
• मुस्लिम शासन को मजबूत करना
• सांसरिक सुखों की प्राप्ति
• नैतिकता का विकास
● मुस्लिम शिक्षा का प्रारम्भ विस्मिल्लाह रस्म से होता था। बालक की उम्र 4 वर्ष 4 माह 4 दिन होने पर उसे नये कपड़े पहनाकर मौलवी साहब के पास ले जाते थे। मौलवी साहब कुरान की कुछ आयतें पढ़ते थे और बच्चा उनकों दुहराता था यदि बालक उन आयतों को नहीं दुहरा पाता था तब विस्मिल्लाह शब्द कहना ही पर्याप्त समझा जाता था तथा बालक की औपचारिक शिक्षा प्रारंभ हो जाती थी। मौलवी साहब को कुछ नजराना देकर बालक को मकतब में प्रवेश करा दिया जाता था। धनी एवं सम्पन्न लोग मौलवी साहब को घर बुलाकर यह रस्म पूरी करते थे। मुस्लिम संस्कृति की विस्मिल्लाह रस्म वैदिक काल के उपनयन संस्कार तथा बौद्ध काल के प्रव्रज्या संस्कार से मिलती जुलती थी।
● मुस्लिम का काल में शिक्षा की दो प्रमुख संस्थायें मकतब तथा मदरसा थी। मकतब में प्रारम्भिक शिक्षा दी जाती थी जबकि मदरसों में उच्च शिक्षा देने की व्यवस्था थी।
विस्मिल्लाह की रस्म के बाद बालक मकतब में शिक्षा लेने के लिए प्रवेश करते थे। मकतब मस्जिदों से जुड़े रहते थे तथा मौलबी ही इसमें अध्यापक होते थे। मकतब से शिक्षा प्राप्त कर छात्र मदरसों में प्रवेश लेते थे इनका संचालन व्यक्तिगत समितियों या समाज के धनी लोगों द्वारा किया जाता था। पाठ्यक्रम मकतबों में दी जाने वाली प्रारम्भिक शिक्षा में लिखना पढ़ना, साधारण गणित, पत्र व्यवहार अर्जी नवीसी, अरबी फारसी की शिक्षा प्रदान करके उनमें जीविकोपार्जन की क्षमता विकसित की जाती थी। मदरसों में दी जाने वाली शिक्षा का पाठ्यक्रम दो भागों में बटा था लौकिक एवं धार्मिक। लौकिक शिक्षा के अन्तर्गत अरबी, व्याकरण, साहित्य, तर्कशास्त्र, दर्शन शास्त्र कानून ज्योतिष शास्त्र गणित इतिहास भूगोल यूनानी चिकित्सा कृषि आदि विषय आते थे। धार्मिक शिक्षा के अन्तर्गत कुरान हरीस (परम्पराएँ) तथा फिक (धर्मशास्त्र) का अध्ययन छात्रों को कराया जाता था।
• शिक्षण विधि - इस काल में शिक्षा मौखिक दी जाती थी रटन्त एवं स्मरण पर अधिक बल दिया जाता था।
शिक्षक प्रायः व्याख्यान प्रश्नोत्तर व वाद-विवाद विधियों की सहायता से शिक्षण कार्य करते थे। बौद्ध काल की तरह मुस्लिम काल में मानीटर प्रणाली प्रचलित थी अध्यापक की अनुपस्थिति में बड़ी कक्षा के छात्र छोटे को पढ़ाते थे। राज दरबार में बड़े विषयों पर शास्त्रार्थ भी होता था। शिक्षा का माध्यम अरबी एवं फारसी था। शिल्पकला के छात्र करके सीखने के सिद्धान्त का पालन करते थे।
• अध्यापक छात्र संबंध- मुस्लिम काल में प्राचीन काल की तरह छात्र एवं अध्यापक में घनिष्ठ संबंध होते थे। शिक्षक को समाज में अत्यन्त सम्माननीय स्थान दिया जाता था। मदरसों के साथ छात्रावास होने के कारण अध्यापक छात्रों के व्यक्तिगत सम्पर्क में रहते थे। मुस्लिम काल के अन्त में यह संबंध धीरे-धीरे खत्म होने लगा और छात्र अनुशासनहीनता करने लगे। औरंगजेब ने भरे दरबार में अपने अध्यापक शाह सालेह का अपमान किया था।
• परीक्षा प्रणाली - इस काल में कोई औपचारिक परीक्षा प्रणाली नहीं थी शिक्षक के द्वारा छात्रों के ज्ञान को पर्याप्त समझने पर शिक्षा समाप्त समझी जाती थी। छात्रों के द्वारा असाधारण ज्ञान न योग्यता का प्रदर्शन करने पर उन्हें कामिल आलिम फाजिल आदि उपाधियों से नवाजा जाता था। साहित्य के छात्रों को कालिम, धार्मिक शिक्षा के छात्रों को आलिम एवं तर्क एवं दर्शन के छात्रों को फाजिल की उपाधि दी जाती थी। राज दरबार में नौकरी पाने के लिए उन्हें दरबार में अपनी योग्यता सिद्ध करनी होती थी।
• अनुशासन एवं दण्ड - मुस्लिम काल में छात्र अत्याधिक अनुशासित थे। नैतिक व व्यवहारिक शिष्टाचार, विनयशीलता तथा आत्मानुशासन सभी छात्रों के लिए अनिवार्य था। दैनिक पाठ याद न करने, झूठ बोलने पर. अनैतिक आचरण करने पर कठोर शारीरिक दण्ड दिया जाता था।
• नारी शिक्षा - मुस्लिम काल में पर्दा प्रथा के कारण नारी शिक्षा का विकास काफी कम हुआ। कम आयु की लड़कियाँ मकतबों में जाकर प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त कर लेती थी। परन्तु उच्च शिक्षा की घर पर ही व्यवस्था होती थी। इसलिए उच्च शिक्षा केवल शाही तथा उच्च घरानों तक ही सीमित थी।
• व्यवसायिक शिक्षा-मुस्लिम काल में ललितकला, हस्तकला तथा वास्तुकला जैसी व्यवसायिक शिक्षा को पर्याप्त प्रोत्साहन मिला। परन्तु इस प्रकार की शिक्षा के लिए कोई औपचारिक शिक्षा संस्थाएं नहीं थी। इन कलाओं को दस कारोबारों के साथ काम करके छात्रगण इनका प्रशिक्षण लेते थे। इस काल में सैनिक शिक्षा का भी पर्याप्त विकास हुआ इस समय घुड़सवारी, तीरंदाजी, युद्ध संचालन व अस्त्र शस्त्रों का प्रशिक्षण दिया जाता था।
• छात्रावास मुस्लिम काल में मदरसों में पढ़ने के लिए छात्र दूर-दूर से आते थे इसलिए अधिकांश मदरसों के साथ छात्रावास की व्यवस्था रहती थी।
इन के लिए समाज के धनी लोगों द्वारा जमीन प्रदान की जाती थी जिसकी आय से ये चलते थे। वैदिक कालीन आश्रमों बौद्धकालीन मठों की अपेक्षा मुस्लिम कालीन छात्रावासों में जीवन अधिक सुखदायक एवं सुविधा सम्पन्न था। ये आबादी के बीच शहर में होते थे।
• वित्त व्यवस्था राज्य एवं समाज के धनी सम्पन्न लोगों की सहायता मे से शिक्षण संस्थाएं चलती थी।
छह सौ वर्षों तक मुस्लिम शिक्षा पद्धति भारत वर्ष में खूब प्रचलित रही। पाश्चात्य शिक्षा पद्धति के प्रसार के साथ-साथ मुस्लिम शिक्षा संस्थाएं लुप्त होने लगी। आज भी मकतब एवं मदरसें चलाये जा रहे हैं परन्तु उनकी शिक्षा जीवन उपयोगी नहीं है। निःसन्देह मुस्लिम शिक्षा ने भारतीय जीवन प्रणाली पर ऐसी अमिट छाप छोड़ी है जिसका आभास आधुनिक समय में भी स्थान-स्थान पर हो जाता है। मुस्लिम शिक्षा में धार्मिक एवं सांसरिक शिक्षा का अनोखा समन्वय था। इस समय इतिहास का लेखन बड़ी तेजी से हुआ मुस्लिम काल की सबसे बड़ी उपलब्धि उर्दू भाषा की उपत्ति थी। परन्तु शिक्षण कार्य फारसी एवं अरबी में होने के कारण अधिकांश समय भाषा सीखने में खर्च हो जाता था। पर्दा प्रथा के कारण महिलाएं शिक्षा के अवसरों से वंचित थी।
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