मात्रात्मक अनुसंधान अभिकल्प की विशेषताएँ - Features of Quantitative Research Design
मात्रात्मक अनुसंधान अभिकल्प की विशेषताएँ - Features of Quantitative Research Design
मात्रात्मक अनुसंधान अभिकल्प की प्रमुख विशेषताओं को हम निम्न बिन्दुओं के आधार पर समझ सकते हैं -
1- यह मात्रात्मक अथवा परिमाणात्मक अथवा सांख्यिकीय सूचनाओं पर आधारित होता है। इसके तहत प्रयुक्त प्रविधियों व तकनीकों में सर्वेक्षण, संरचित साक्षात्कार, अवलोकन, रिपोर्ट आदि के आधार पर अध्ययन किया जाता है।
2- मात्रात्मक अनुसंधान अभिकल्प के अंतर्गत मुख्यतः निगमनात्मक पद्धति का प्रयोग किया जाता है।
3- इसका उपयोग पूर्व के स्थापित सिद्धांतों अथवा अवधारणाओं की जांच के लिए किया जाता है तथा उसकी वर्तमान समय की प्रासंगिकता को जांच कर उसमें संशोधन किया जाता है अथवा उसे अस्वीकृत कर दिया जाता है।
4- मात्रात्मक अनुसंधान अभिकल्प का प्रयोग उपकल्पना के परीक्षण हेतु किया जाता है तथा इसी आधार पर उपकल्पना की सत्यता की पहचान की जाती है।
5- मात्रात्मक अनुसंधान अभिकल्प अपेक्षाकृत वस्तुनिष्ठ प्रकृति का होता है तथा इसमें पक्षपात व भावनात्मक जुड़ाव की संभावनाएं कम रहती हैं। अर्थात् यह किसी भी घटना अथवा स्थिति अथवा समस्या के प्रत्यक्ष तौर पर दिखाई देने वाले परिणाम अथवा प्रभाव का वैज्ञानिक प्रस्तुतीकरण होता है।
6- मात्रात्मक अनुसंधान अभिकल्प के तहत सांख्यिकीय परीक्षण तथा विश्लेषण की संभावना रहती है। ऐसी संभावना इसलिए भी और बलवती रहती है क्योंकि इस प्रकार के अभिकल्प में संख्यात्मक आंकड़ों की उपलब्धता रहता है तथा इन्हीं आंकड़ों के आधार पर वैज्ञानिक निष्कर्ष को प्रस्तुत करने का प्रयोजन रहता है।
7- गुणात्मक अनुसंधान अभिकल्प के अंतर्गत अधिकाधिक विषयों के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। अर्थात् इसमें शोध करने हेतु अनेक घटनाओं/समस्याओं के बारे में ज्ञान अर्जित करने की संभावनाएं रहती हैं, हालांकि प्रायः इसमें गहन जानकारी का अभाव पाया जाता है।
8- समान्यतः गुणात्मक अनुसंधान अभिकल्प में प्रश्नों के उत्तर प्राप्त करने के निश्चित विकल्प रहते हैं।
9- गुणात्मक अनुसंधान अभिकल्प में प्राप्त हुये शोध के परिणामों की वैधता तथा विश्वासनीयता की निर्भरता पूरी तरह से प्रयोग किए गए वैज्ञानिक तकनीकों व यंत्रों पर रहती है। इसका तात्पर्य यह है कि इसमें प्रायः अनुसंधानकर्ता द्वारा किया गया प्रयास, उसकी योग्यता व परिश्रम आदि गौण रहते हैं।
10- इसमें शोध हेतु अधिक समय की आवश्यकता रहती है. क्योंकि इसमें तथ्यों के संकलन हेतु अधिक आंकड़ों व उत्तरदाताओं की सहायता से निष्कर्ष प्रस्तुत किया जाता है। परंतु इसमें तथ्यों के संकलन में जितना अधिक समय लगता है, उतने ही कम समय में विश्लेषण कार्य सम्पन्न हो जाता है।
11- अधिक उत्तरदाताओं के क्षेत्र को शामिल करने के कारण इसमें सामान्यीकरण की संभावनाएं अपेक्षाकृत अधिक रहती हैं।
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