द्वितीयक समूह की निम्न विशेषताएं - Features of secondary group
द्वितीयक समूह की निम्न विशेषताएं - Features of secondary group
(i) बड़ा आकार द्वितीयक समूह का आकार बड़ा होता है इसका मतलब यह हुआ कि इस में सदस्यों की संख्या काफी अधिक होती है।
(ii) औपचारिक संबंध- ऐसे समूह के सदस्यों में विचारों का आदान-प्रदान होता है वह प्रत्यक्ष रूप से ना होकर अप्रत्यक्ष रूप से एवं औपचारिक ढंग से अर्थात नियम कानून के अनुसार होता है।
(iii)- अप्रत्यक्ष संबंध- दीपक समूह के सदस्यों के बीच जो संबंध स्थापित होता है वह आमने-सामने के संपर्क के आधार पर नहीं होता है बल्कि कुछ अप्रत्यक्ष साधनों के द्वारा होता है जैसे समाचार पत्र, रेडियो, टेलीविजन, सिनेमा आदि के द्वारा।
(iv) संविदात्मक संबंध- संविदात्मक संबंध एक प्रकार का अवैयक्तिक संबंध होता है जिसमें एक सदस्य को दूसरे सदस्य के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं होती है।
(v) विशिष्ट उद्देश्य ऐसे समूह का निर्माण किसी खास उद्देश्य की प्राप्ति के ख्याल से होता है प्राथमिक समूह के समान यहां कोई सामान्य उद्देश्य नहीं होता है इनका निर्माण ही किसी खास उद्देश्य स्वार्थ की पूर्ति करने के लिए होता है।
(vi) सीमित उत्तरदायित्व द्वितीयक समूह के सदस्यों के बीच संबंध औपचारिक होता है। इसका अर्थ यह हुआ कि प्रत्येक सदस्य की भूमिका परिभाषित होती है।
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