समाजमिति विधि की विशेषताएं - Features of the Sociometric Method

 समाजमिति विधि की विशेषताएं - Features of the Sociometric Method


समाजमिति एक ऐसी तकनीक है जिसमें किसी समूह के प्रत्येक व्यक्ति से व्यक्ति के आत्मनिष्ठ अनुभवजन्य मापदंड के आधार पर निर्मित उसकी उन भावनाओं को ज्ञात किया जाता है जो वह दूसरे व्यक्तियों के बारे में गोपनीय रीति से रखता है। यह तकनीकी सीमित सामाजिक परिवेशों में बहुत सीमित संख्या वाले सामाजिक समूहों के अध्ययन के लिए उपयोगी है। अंतर वैयक्तिक संबंधों का अध्ययन करने के लिए ही इस विधि का उपयोग किया जा सकता है। व्यक्ति प्रत्यक्षीकरण के अध्ययन में व्यक्ति के गुणों की विशेषताओं की रेटिंग कराकर प्रोडक्ट प्राप्त करने की इस तकनीकी से मिलती जुलती है।

यह तकनीकी अनुसंधानकर्ता के दृष्टिकोण से अत्यंत सरल, कम खर्चीली और थोड़े समय में प्रचुर मात्रा में प्रदत्त संकलित कराने वाली है। प्रयोग के दृष्टिकोण से उसके विकल्पों की गोपनीयता बने रहने का आश्वासन मिल जाने के बाद अत्यंत रुचिकर और अध्ययन में भाग लेने के लिए प्रेरणादायी है। मात्र यही एक ऐसी तकनीक है जिसके माध्यम से एक ही समय किसी समूह के अंतर क्रियात्मक प्रतिरूप और उस समूह में प्रत्येक व्यक्ति के रोगात्मक संक्रत्य का निरूपण करने के लिए प्रदत्त प्राप्त किया जा सकता है।


समाजमिति तकनीक का प्रयोजन समूह में व्यक्ति विशेष के सामाजिक सम्बन्धों का अध्ययन करना है। इसके द्वारा विशेषकर, एकाकी और उपेक्षितों तथा अस्वीकृत व्यक्तियों की व्यक्तित्व सम्बन्धी समस्याओं का पता लगाने के लिए किया जाता है।

व्यक्तियों के सामाजिक व्यवहार का आकलन करने हेतु यह तकनीक सूचना प्राप्त करने का एक उपयुक्त माध्यम है। इस तकनीक में यह प्रयास किया जाता है कि समूह के सदस्यों में, उनसे यह पूछकर कि वे विभिन्न स्थितियों में किसे चुनेंगे या नहीं चुनेंगे। इस तकनीक का प्रयोग विभिन्न शिक्षण स्थितियों में, सामाजिक समायोजन, सामूहिक गतिकीय, अनुशासन तथा अन्य सामाजिक सम्बन्धों की समस्याओं के अध्ययन में प्रयोग किया जाता है। समूहों के अन्दर सामाजिक सम्बन्धों के मापन के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार की तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। शिक्षा के क्षेत्र में निम्नलिखित तकनीकों का प्रयोग मुख्य रूप से किया जाता है।