बौद्ध काल में महिला शिक्षा - female education in buddhism

 बौद्ध काल में महिला शिक्षा - female education in buddhism


बौद्ध काल में उत्तर वेदिक काल के कर्मकाण्डों की समाप्ति और बौद्ध धर्म के उदय के साथ-साथ स्त्रियों की दशा पहले से थोड़ा सुधार हुआ। बौद्ध काल के प्रारम्भिक वर्षों में स्त्रियों को मठो में प्रवेश नहीं दिया जाता परन्तु बाद में महात्मा बुद्ध ने स्त्रियों को संघ के रूप में प्रवेश देकर स्त्री शिक्षा के एक नये अध्याय की शुरूआत की। भगवान बुद्ध द्वारा प्रतिपादित सिद्धान्तों में नारी को कहीं भी पुरुष से कम नहीं बताया परन्तु इस समय भी महिला शिक्षा जन सामान्य की महिलाओं तक नही पहुँच सकी बल्कि केवल धनी, सम्पन्न, कुलीन घरानों की स्त्रियों तक ही सीमित रह गई थी। इस काल में संघमित्रा जैसी विदुषी महिला ने स्त्रियों का नाम रोशन किया।