प्रजनन संबंधी बहस - fertility debate

प्रजनन संबंधी बहस - fertility debate


एक व्यवस्थित प्रक्रिया के तहत स्त्रियों के अधीनीकरण के लिए पितृसत्तात्मक संरचना को ज़िम्मेदार मानते हुए फायरस्टोन यह भी स्वीकारती हैं कि इसकी जड़ में सेक्स की जीववैज्ञानिक असमानता है। पुनरुत्पादन में स्त्रियों की भूमिका का सामाजिक विकास में अहम योगदान रहा है। इसीलिए वे सेक्स-वर्ग संघर्ष की भी बात करती हैं, जबकि मार्क्स एवं एंगेल्स वर्ग संघर्ष को ही प्रमुखता देते हैं। गर्भधारण, बाल जन्म और उनके पालन पोषण की समस्याएँ स्त्रियों को प्राकृतिक रूप से कुछ हद तक कमज़ोर करती हैं। नतीजन उत्तरजीवता के लिए पुरुषों पर निर्भरता बढ़ती है और इसी का फायदा उठाकर पुरुषों ने अधीनता के सार्वभौमिक ढाँचे को मज़बूती प्रदान की। इस वर्चस्व के ढाँचे को तोड़ने और स्त्रियों के इस उत्पीड़न को समाप्त करने के लिए फायरस्टोन क्रांतिकारी कदम उठाते हुए प्रजनन में स्त्री की भूमिका समाप्त कर देने का प्रस्ताव रखती हैं। वे लिंग-वर्ग प्रणाली के इस उत्पीड़न को समाप्त करने की संभावना को टेक्नोलॉजिकल क्रांति में देखती हैं। जब ग्लास की डिशों में गर्भधारण हो सकेगा और ग्लास के गर्भाशयों में गर्भावस्था पूरा होने तक रखा जा सकेगा। इसी के साथ समाधान स्वरूप एक और प्रस्ताव यह है कि ढीले-ढाले पारिवारिक संरचनाओं का निर्माण हो जहाँ वयस्कों और उनकी संताने साथ मिलकर रहा करेंगे तथा बच्चे की देख-रेख उनका लालन-पालन सामूहिक जिम्मेदारी होगी।