सामंती समाज - feudal society
सामंती समाज - feudal society
सामंती समाज गुलाम समाज के बाद उभरता है। प्रौद्योगिकी विकसित हो जाती है। कृषि कार्य के लिए चेन में बँधे गुलामों की आवश्यकता नहीं होती है। किसानों के परिवार, भूमि से जुड़े मजदूर कृषि कार्य करने के लिए पर्याप्त थे। इस युग में राजा. सामंत. पुरोहित, व्यापारी, शिल्पकार, सेवक, किसान और जमीन से जुड़े मजदूर अथवा भूदास वर्ग थे। जमीन के मालिक शासक वर्ग थे। इस युग में धर्म बड़ा शक्तिशाली हुआ। इसलिए पुरोहित शक्तिशाली हो गए। भारत में पुरोहित वर्ग लंबे समय से शक्तिशाली रहा है। अधिकतर भारतीय पुरोहित वर्ग ने भू-संपत्ति पर भी नियंत्रण किया। आरंभिक मध्य काल में यूरोप में अनेक राज्यों में पुरोहित वर्ग ने राज्य पर नियंत्रण कर लिया और निरंकुश राज की स्थापना की। सामंतवाद के संबंध में भी बड़ा विवाद है।
भारत में सामंतवाद के संबंध में रामशरण शर्मा ने भारतीय सामंतवाद नामक पुस्तक लिखी। विवाद इस बात पर है कि सामंतवाद का आरंभ किस संस्था को माना जाए। शास्त्रीय दृष्टि से भू-राजस्व सामंतवाद का आधार है। आर.एस. शर्मा ने कहा कि भूमिदान सामंतवाद का आधार था। यूरोप में कार्ल मार्क्स के पहले भी इतिहास के युगों का वर्णन इस रूप में किया जा रहा था। मार्क्स की विशेषता यह थी कि उन्होंने इतिहास की व्याख्या आर्थिक आधार पर की। फ्रेडरिक एंगेल्स ने कहा कि इतिहास की आर्थिक व्याख्या मार्क्स का सबसे महत्वपूर्ण योगदान है। इस संदर्भ में यह महत्वपूर्ण है कि जार्ज हीगल ने इतिहास के दर्शन की चर्चा इतिहास के युगों के आधार पर की। हीगल ने कहा कि एक युग एक विचार अथवा एक बाद अथवा एक थीसिस से प्रभावित और निर्देशित होता है। मार्क्स ने कहा इतिहास का एक युग उत्पादन की एक शैली से प्रभावित और निर्देशित होता है।
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