शोधार्थी के अध्ययन क्षेत्र में क्रिया संबंधी गुण - Field Activity Quality of Scholar

शोधार्थी के अध्ययन क्षेत्र में क्रिया संबंधी गुण - Field Activity Quality of Scholar


शोध के मध्य वास्तविक रूप से अध्ययन स्थल पर जाकर तथ्य और सूचनाओं को संचित करना जरूरी होता है। इसलिए इससे जुड़े भिन्न-भिन्न व्यावहारिक क्रियाओं का ज्ञान जरूरी होता है। इस संदर्भ में शोधकर्ता के भीतर कुछ गुणों का होना जरूरी माना जाता है जो निम्न प्रकार हैं -


(A) अध्ययन-पद्धतियों, उपकरणों एवं विविध प्रविधियों का ज्ञान :


एक सफल शोधकर्ता के लिए यह आवश्यक है कि उसे इस बात का संपूर्ण ज्ञान हो कि किस प्रकार के शोध कार्य में किन-किन प्रक्रियाओं तथा उपकरणों से काम लेना जरूरी होता है।

साथ ही शोधकर्ता को इस बात की भी जानकारी होनी चाहिए कि हरेक प्रक्रिया की कौन-कौन सी सीमाएं हैं और उस पद्धति के द्वारा काम करने से अध्ययन कार्य में किन-किन त्रुटियों के पनपने की संभावना बनी रहती है। इस प्रकार का ज्ञान शोधकर्ता को सबसे उपयुक्त पद्धतियों तथा यंत्रों का चुनाव करने में मदद करते हैं। उचित समय पर सटीक ज्ञान शोध कार्य में उत्पन्न होने वाले संभावित अशुद्धियों में सुधार के प्रति शोधकर्ता को सावधान भी रखता है। 


(B) व्यक्ति, समय एवं स्थान का बोध :


शोधकर्ता को अपने शोध कार्य के समय विविध पेशों. विविध श्रेणी के लोगों से मिलना होता है।

लेकिन इसके लिए अध्ययन स्थान में जाकर अनायास, बिना पूर्व निर्णय के किसी भी व्यक्ति से किसी भी वक्त कहीं पर भी मिलकर सूचना प्राप्त करने का प्रयत्न निष्फल अथवा संदेह युक्त परिणामों को उत्पन्न करने वाला होता है। साथ ही साथ शोधकर्ता को इस बात की भी साधारण जानकारी होनी चाहिए कि किस विषय से जुड़े वास्तविक तथ्यों को प्राप्त करना सुविधाजनक होगा. किस समय और किस जगह पर उनसे मिलने पर यह जवाब देने के लिए आसानी से तत्पर हो जाएंगे अर्थात सूचना प्राप्त करने के विषय में उनका सक्रिय व संपूर्ण सहयोग अर्जित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए. शोधकर्ता को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि गन्ने का व्यवसायी जहाज की खबर नहीं दे सकता, सार्वजनिक त्यौहार के वक्त जानकारी देने वालों से उनके पारिवारिक जीवन के बारे में जानना संभव नहीं है और थाने के पास खड़े चोरों से उनकी करतूतों के बारे में पूछना मूर्खतापूर्ण कार्य होगा। अतएव एक सफल शोधकर्ता का समय, मनुष्य और स्थान के बारे में पर्याप्त ज्ञान होना आवश्यक है। 


(C) प्रशिक्षण एवं अनुभव

किसी भी व्यक्ति को अध्ययन स्थान पर सूचना एकत्रित करने हेतु छोड़ देने मात्र से ही सही तथ्यों का संकलन असंभव है, जब तक कि उसे अध्ययन स्थान पर काम करने का एहसास ना हो या उसे इस काम के लिए वास्तविक रूप में प्रशिक्षित ना किया गया हो। समुचित प्रशिक्षण प्राप्त एक अनुभवी शोधकर्ता ही अध्ययन पद्धतियों, अध्ययन कार्य के समक्ष विद्यमान समस्याओं से भली-भांति वाकिफ शोधकर्ता ही शोध कार्य को व्यवस्थित तरीके से अंतिम लक्ष्य तक ले जाने में सफल रहते हैं। इस प्रकार शोधकर्ता के प्रमुख गुणों पर प्रकाश डालने से यह स्पष्ट होता है कि उसे निश्चित रूप से एकाधिक गुणों से संपन्न होना चाहिए। इसका यह आशय बिल्कुल नहीं है कि सभी शोधकर्ता सर्वगुण संपन्न होते हैं और जरूरी नहीं गुणों की अंतिम सूची तैयार की जा सकती है। लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि शोधकार्य कोई साधारण काम नहीं है। शोधकार्य सामान्य लोगों के द्वारा संपन्न नहीं किया जा सकता। इस काम के लिए योग्य, अनुभवी, कुशल, साहसी एवं उत्साही लोगों की जरूरत होती है। 


(D) संगठन शक्ति :


समस्त गुणों के साथ-साथ एक सफल व कुशल शोधकर्ता में संगठन शक्ति का होना भी बहुत जरूरी है।

शोधकार्य कोई चलते-फिरते किए जाने लायक कार्य नहीं है। उसके लिए सुव्यवस्थित आयोजन तथा उत्तम संगठन की जरूरत होती है। शोधकर्ता के अंदर इन आवश्यकताओं की पूर्ति करने की क्षमता व योग्यता का होना जरूरी होता है। सामाजिक शोधों में अधिकांशतः एक से अधिक कार्यकर्ताओं की जरूरत होती है। अतः शोधकर्ता को इस बात की जानकारी होनी जरूरी है कि किस कार्यकर्ता को कौन सा कार्य सौंपने पर अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। वर्तमान प्रवृत्ति यह है कि सामाजिक शोध कार्य में अंतः वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाई जा रही है जिससे कि कई विद्वानों की विशेषज्ञता का सहयोग व मदद प्राप्त करना जरूरी होता है। अतः शोधकर्ता को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि किस प्रकार उनका अधिकाधिक मदद व सहयोग अपने लाभ के लिए अर्जित किया जा सकता है। उपरोक्त समस्त कार्य शोधकर्ता की सांगठनिक क्षमता पर आधारित होता है। अतएव एक उत्तम शोधकर्ता के अंदर सांगठनिक गुण आवश्यक माना जाता है। 


(E) साधन संपन्नता :


आधुनिक शोध कार्य में धन के साथ-साथ अन्य कई तरह के साधनों, जैसे- कैमरा, टेप रिकॉर्डर, कंप्यूटर, मानचित्र आदि की भी जरूरत होती है। अतः शोधकर्ता हेतु इन साधनों की विद्यमानता ही काफी नहीं है वरन इनके प्रयोग का सही ढंग भी ज्ञात होना चाहिए। शोध के क्रम में कई बार शोधकर्ता को सूचनाएं हासिल करने हेतु सरकारी और गैर सरकारी विभागों के अधिकारियों से सहायता लेनी पड़ती है।