प्रथम छवि - first image

प्रथम छवि - first image


समान्यतया सभी व्यक्तियों की मान्यता है कि किसी भी व्यक्ति की प्रथम छवि में किसी प्रकार का बदलाव प्रायः नहीं होता। ऐश (1946) ने एक प्रायोगिक प्रक्रिया में छवि निर्माण में प्राथमिकता प्रभाव को दर्शाया। उन्होने दो प्रयोज्य समूहों को लिया। जिसमें एक समूह को उसने किसी काल्पनिक व्यक्ति के शीलगुणों को धनात्मक से ऋणात्मक क्रम में और दूसरे समूह को ऋणात्मक अनुक्रम में पढ़वाया। इन दोनों अनुक्रमों को नीचे प्रस्तुत किया गया है।


प्रथम समूह द्वितीय समुह


बुद्धिमान


उद्यमी


आवेशवान


शंकालु


जिद्दी


ईर्ष्यालु


ईर्ष्यालु


जिद्दी


शंकालु


आवेशवान


उद्यमी


बुद्धिमान


ऐश ने परिकल्पना का निर्माण किया कि यदि प्राथमिक स्तर पर प्राप्त सूचना महत्वपूर्ण होती है तो यह पूर्वकथन किया जा सकता है कि प्रथम अनुक्रम में सूचना प्राप्त करने वाले प्रयोज्य कल्पित व्यक्ति कि धनात्मक छवि निर्मित करेंगे। प्राप्त परिणाम के कारण परिकल्पना की पुष्टि होगी। प्रथम समूह के प्रयोज्यों ने उस कल्पित व्यक्ति को सामाजिक, प्रिय एवं खुशदिल व्यक्ति के रूप में देखा। एंडरसन (1986). बर्नस्टाइन एवं शूल (1982). वाथर (1988) एवं अन्य शोधकर्ताओं ने भी अपने अध्ययनों के द्वारा प्राथमिक प्रभाव की पुष्टि की।