सामाजिक संज्ञान के मूलभूत अभिग्रह - fundamentals of social cognition
सामाजिक संज्ञान के मूलभूत अभिग्रह - fundamentals of social cognition
सामाजिक संज्ञान से संबन्धित अध्ययनों की प्रारम्भिक अवस्था में मनोवैज्ञानिकों की मान्यता थी कि मनुष्य तर्क प्रधान प्राणी है और सामाजिक संज्ञान या निर्णय करने के लिए वह समस्त उपलब्ध सूचनाओं का प्रक्रमण तार्किक आधार पर करता है। इसलिए प्रारम्भ में मनोवैज्ञानिकों द्वारा किये गये सामाजिक निर्णयों अथवा अनुमानों की तुलना अनुमान के तार्किक मॉडलके आधार पर प्रत्याशित अनुमानों के साथ करते थे।
तार्किक मॉडल का तात्पर्य यह है कि सामाजिक संज्ञान के लिए सूचनाओं के प्रक्रमण एवं एकीकरण के तार्किक एवं परिशुद्ध तरीके होते हैं।
आइन हार्न एवं होगा (1981) ने स्पष्ट किया कि सही और बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय के उदेश्य से आवश्यक है कि व्यक्ति जहां तक संभव हो सामाजिक सूचनाओं का उपयोग सावधानी और तार्किक रीति से करे। इसी दृष्टिकोण से अनुमान के तार्किक मॉडल को सामाजिक अनुमान का मानक माना गया। अनेक अध्ययनों के आधार पर ज्ञात हुआ कि वास्तव में लोग सामाजिक सूचनाओं का संग्रह एवं प्रक्रमण अतार्किक ढंग से करते हैं।
अनेक अध्ययनों से प्राप्त प्रदत्तों एवं तथ्यों के आधार पर सामाजिक संज्ञान के संबंध में अनेक मूलभूत अभिग्रहों को स्वीकार किया गया है।
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