जाति व्यवस्था का भविष्य - future of caste system
जाति व्यवस्था का भविष्य - future of caste system
जाति व्यवस्था में निरंतर अनेक परिवर्तन हो रहे हैं तथा नवीन शक्तियों के उभरने से जाति व्यवस्था के अस्तित्व पर सवाल खड़ा करना कोई नई बात नहीं है। निःसन्देह जाति व्यवस्था ने अपने परंपरागत स्वरूप को खो दिया है तथा लोगों में उसके प्रति आस्था कम हुई है। जाति व्यवस्था के नियमों की कठोरता में भी कमी आयी है, आज जाति व्यवस्था अत्यंत लचीली हो गयी है। परंतु दूसरी ओर जाति व्यवस्था में अनुकूलन तथा निरंतरता का गुण भी पाया जाता है तथा यही कारण है कि जाति व्यवस्था का अस्तित्व इस वैज्ञानिक तथा तार्किक युग में भी बना हुआ है। परंतु अभी भी प्रश्न वही है कि क्या भारतीय समाज में जाति व्यवस्था नष्ट हो जाएगी? अथवा उसका स्वरूप परिवर्तित हो जाएगा। यदि स्वरूप परिवर्तित होगा तो जाति व्यवस्था का भविष्य का स्वरूप कैसा होगा?
स्वतंत्र भारत के संवैधानिक प्रावधान, औद्योगीकरण, नगरीकरण, धार्मिक सुधार आंदोलन, पश्चिमी शिक्षा, सभ्यता तथा संस्कृति आदि कारकों ने जाति व्यवस्था की संरचना और प्रकार्यों में अनेक परिवर्तन किए हैं
तथा इसका परिणाम यह हुआ कि जाति व्यवस्था में वर्ग व्यवस्था की विशेषताएं जन्म लेने लगीं। कुछ राजनीतिज्ञों तथा प्रगतिवादी विद्वानों का मानना है कि जाति व्यवस्था समाप्त हो रही है तो कुछ इस बात पर जोर देते हैं कि जाति व्यवस्था स्वतः ही समाप्त हो जाएगी। हालांकि ए सारी बाते निरधार हैं. क्योंकि जाति व्यवस्था में अनुकूलन की प्रवृत्ति पायी जाती है। श्रीनिवास ने स्पष्ट किया है कि मद्रास, उड़ीसा, आंध्र, मैसूर, गुजरात, बिहार तथा उत्तर प्रदेश में जाति व्यवस्था में एक नई जागरूकता का प्रसार हो रहा है और नवीन संगठनोन की निर्मिति ने जाति व्यवस्था को शक्ति प्रदान किया है। इसी प्रकार योगेंद्र सिंह का मानना है कि जाति व्यवस्था में होने वाले परिवर्तनों को समुत्थान तथा लचीलेपन के तौर पर देखना चाहिए। जाति एक लंबे समय तक राजनीति अर्थव्यवस्था तथा संस्कृति आदि क्षेत्रों में आधुनिकीकरण करने वाली सामाजिक संरचनाओं के व्यवस्थित संचालन हेतु संस्थात्मक आधार निर्मित करती रहेगी।
श्रीनिवास ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मैं साफ तौर पर बताना चाहता हूँ कि यदि आप सोचते हैं कि जाति से सरलता से मुक्ति पाया जा सकता है तो यह एक गंभीर त्रुटि है।
जाति एक बहुत ही शक्तिशाली संस्था है तथा यह समाप्त होने से पूर्व बहुत ही खून खराबा करेगी।"
हम इस बात के लिए पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि जाति एक ऐसी संस्था है जिसमें गतिशीलता का गुण पाया जाता है। इसी गुण की वजह से जाति व्यवस्था इतने परिवर्तन होने के बाद भी निरंतर बनी हुई है। यह समय के साथ साथ परिवर्तित होती रही है तथा स्वयं को परिस्थिति के अनुरूप परिवर्तित करती रही है। इन आधारों पर यह कहा जा सकता है कि जाति व्यवस्था के समाप्त होने के आसार नहीं है, फिलहाल तो बिलकुल नहीं।
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