गर्दा लर्नर के स्त्रीवादी आलोचना - Garda Lerner's Feminist Criticism

गर्दा लर्नर के स्त्रीवादी आलोचना - Garda Lerner's Feminist Criticism


गर्दा लर्नर ने विल्सन जैसे समाज जीवविज्ञानियों की इस आधार पर आलोचना की है कि वे मानव सभ्यता के विकास के क्रम में स्त्री और पुरुष के जीवन-यापन के तरीकों से लेकर अन्य परिक्षेत्रों में आए बदलावों को नज़रअंदाज़ करते हैं। वे यह नहीं देखते कि तकनीकी के स्तर पर हुए विकास की वजह से आज बच्चे आहार और देखभाल के लिए केवल माँ पर निर्भर नहीं रह गए हैं। आज का बच्चा बोतल डिब्बा बंद आहार और आया अथवा केयर सेंटर के भरोसे बड़ा किया जा सकता है। इसके साथ ही, चिकित्सा विज्ञान के विकास ने बाल मृत्यु दर भी कम कर दिया है। इससे पहले यह उम्मीद नहीं की जा सकती थी कि जो शिशु जन्मा है वह जिंदा भी रहेगा। इसलिए स्त्रियाँ लगातार कई बच्चों को जन्म देने के लिए मज़बूर थीं। अब वे एक या दो बच्चे जन्म देकर फुरसत पा जाती हैं। इस फुरसत ने उन्हें उन कार्यों में शिरकत होने का अवसर दिया है, जिसे पारंपरिक तौर पर उनके लिए वर्जनीय माना जाता था।


विल्सन जैसे परंपरावादी इस हकीकत को नज़रअंदाज़ कर जाते हैं और स्त्रियों को प्रजनन और बच्चों को पाल-पोस कर बड़ा करने जैसे पारंपरिक दायित्वों को पूरा करने में ही बंधे रहना देखना चाहते हैं। यदि तकनीकी ने पुरुषों के शारीरिक श्रम को हल्का कर उन्हें मुक्त किया है तो स्त्रियों से यह उम्मीद कैसे की जा सकती है वे इसी तकनीकी का सहारा न लेकर अपनी पाषाणकालीन पुरखिनों की ही अवस्था में बनी रहें। जहाँ तक समूची मानव प्रजाति के विकास की राह पर बने और बचे रहने के लिए स्त्री और पुरुष के बीच श्रम विभाजन की ज़रूरत की बात है तो हो सकता है कि यह उस समय ज़रूरी रहा हो जब आधुनिक मानव का प्रकृति के बरक्स प्रादुर्भाव हो रहा था। लेकिन, आज मनुष्य जिस अवस्था में है उसमें श्रम विभाजन का कोई औचित्य नहीं रह गया है।