गारो जनजाति - Garo tribe

गारो जनजाति - Garo tribe


गारो जनजाति मुख्यतः मेघालय, असम, नागालैण्ड, त्रिपुरा एवं पश्चिम बंगाल में निवास करती है, बहुत कम संख्या में मिजोरम में भी इस जनजाति को देखा जा सकता है, मेघालय गारो हिल्स से लेकर के खांसी हिल्स तक इनके आवास देखे जा सकते हैं। असम में ब्रह्ममपुत्र के आस-पास अंगलोन, गोलपारा एवं कामरूप जिलो में इस जनजाति का निवास है, नागालैण्ड के कोहिमा एवं चमकोहिमा क्षेत्र में गारो जनजाति निवासरत है। त्रिपुरा के दक्षिणी क्षेत्र एवं पश्चिम बंगाल के जलपाइगुड़ी तथा कूचबिहार जिले यह जनजाति निवासरत है।


गारो जनजाति की मात्र भाषा गारो है, जो कि तिब्बतन वर्मन भाषा परिवार के बोडो समूह की भाषा है। लिपि के तौर पर ये लोग रोमन लिपि का प्रयोग करते हैं, गारो के अतिरिक्त असमी, बगंला एवं हिंदी भाषा का भी इनके द्वारा प्रयोग किया जाता है। प्रजातीय दृष्टिकोण से यह जनजाति मंगोलाड प्रजाति के अंतर्गत आती है। ये लोग छोटे कद काठी के लोग है जिनका माथा चौड़ा, चेहरा गोल, आंख तथा नाक छोटे होते हैं।

इसके अतिरिक्त बहुत सी घरेलू एवं जंगली सब्जीयां कंद-मूल इत्यादि का भी प्रचुर मात्रा में प्रयोग किया जाता है, इसके अतिरिक्त गाय एवं सुअर का मांस भी इनके भोजन का प्रमुख हिस्सा है। गारो जनजाति को बहुत से उप-समुदायों में विभक्त किया जा सकता है परंतु इन सभी में आधारभूत सामाजिक सरंचना, प्रथागत सामाजिक व्यवस्था एवं कृषि की तकनीक आदि में एकरूपता दिखाई देती है, इन सभी समूहों में समुदाय के प्रति एक सामान्य सजगता पाई जाती है। गारो जनजाति मातृवंशीय एवं मातृसत्तात्मक जनजाति है।


मुख्यतः गारो जनजाति पांच मातृवंशीय समूहों में विभक्त है, जिनके नाम इस प्रकार हैं- संगमा, मराक, मोमिन, अरिंक और सीरा गोत्र के आधार पर यह जनजाति बहिर्विवाही समुदाय है, अर्थात इस समुदाय में एक ही गोत्र में विवाह वर्जित है। गारो जनजाति के प्रमुख गोत्र मंडा, रंगमुधू, टगरी, अजीवो, नेगमाईयां, अंगकोम, चिरोन, दीयो. दांको, डारिंग, दावा, चवकोम, रेमा, रहसोम, भोरोम, रंगेसा एवं बोलवारी इत्यादि।


गारो जनजाति की गोत्र संरचना में सबसे महत्वपूर्ण इकाई “महारी” है। जो किसी समूह के माचोम के अंतर्गत विवाह संबंधों को निर्धारित करती है। महारी किसी परिवार के मुखिया के निर्धारण एवं परिवार में पति-पत्नि के दायित्वों के नियमन एवं नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस जनजाति में प्रायः एक विवाह का प्रचलन है परंतु कभी-कभी बहुपत्नि विवाह भी देखा जा सकता है, इस प्रकार के विवाह प्रथम पत्नि एवं महारी की स्वीकृति से होते हैं। महारी की स्वीकृति से विवाह विच्छेद एवं पुर्नविवाह को भी स्वीकृति है। विवाह-विच्छेद के बाद बच्चों के लालन-पोषण की जिम्मेदारी मां की होती है, इस समुदाय में विधवा एवं विधुर पुर्नविवाह को स्वीकारिता है।


गारो जनजाति में परिवार का स्वरूप एकल परिवार का है। इसके अतिरिक्त अभिसारित परिवार पाए जाते हैं। क्योंकि गारो जनजाति मातृवंशीय एवं मातृसत्तात्मक है इसलिए पूरी संपत्ति परिवार की महिला के अधिकार में होती है।

एवं महारी के द्वारा यह संपत्ति मां से पुत्री को हस्तांतरित होती है सामान्यतः सबसे छोटी पुत्री को संपत्ति का अधिकार मिलता है। इस प्रकार संपत्ति का स्वामित्व महिला के पास है एवं पुरूष इसकी सुरक्षा नियंत्रण एवं प्रबंधन करता है।


"एकिंग” पहाड़ी क्षेत्रों में एक महारी के स्वामित्व के अंतर्गत क्षेत्र की समस्त भूमि को महारी के न्याय अधिकार में मानता है। एकिंग का नियंत्रण एवं प्रबंधन समुदाय का मुखिया नोकमा करता है, जो गांव वालों से गहरा समन्वय रखता है। एकिंग के अंतर्गत भूमि को छोटे-छोटे हिस्सों में बाटकर गांव के प्रत्येक परिवार को कृषि हेतु दिया जाता है। गारो परिवार में किसी बच्चे के जन्म के पूर्व बहुत से जानवरों एवं पक्षियों की बलि दी जाती है। गांव का पुजारी जिसे कमाल कहा जाता है, उसके द्वारा यह कार्य किया जाता है। पहाड़ी क्षेत्र में पहले स्थानांतरित कृषि की जाती थी परंतु अब स्थायी कृषि की जा रही है। इस जनजाति के अधिकांश लोग धान, मक्का, जूट, सरसों इत्यादि की खेती करते हैं। कुछ लोग सरकारी नौकरी और कुछ चाय के बगानों में नौकरी करते हैं। इस जनजाति का परंपरागत धर्म सांगसरेक है, जो किसी आलौकिक सत्ता में विश्वाश को स्वीकार करता है। इनकी ज्यादा धार्मिक गतिविधियां आत्माओं को प्रसन्न करने के लिए होती है, ताकि इनके द्वारा परिवार या समुदाय को नुकसान न पहुचाया जाए। क्रिष्चियन धर्म अपनाने वाले गारो परिवार के जीवन में व्यापक धार्मिक परिवर्तन हुआ है।

यद्यपि ये लोग भी गोत्र एवं प्रथागत कानून जैसे आधारभूत सामाजिक, सांस्कृतिक व्यवस्था का अनुसरण करते हैं। पहाड़ी क्षेत्र के गारो मैदानी क्षेत्र के अन्य जनजातीय समुदायों हिंदू, मुस्लिम, कोच तथा व्यपारियों से अधिक संबंध रखते हैं एवं यहां अपने द्वारा बनाए गए बांस की चटाई, मिर्च, अदरक, टोकरी इत्यादि बेचते हैं। कपड़े की बुनाई इनका परंपरागत कार्य था जिसे हैडलूम ने प्रभावित किया है। इस समुदाय के परंपरागत युवा ग्रह नॉकपानते वर्तमान में समाप्त प्रायः है।


इस जनजाति का मूल पूर्वज एक स्त्री को माना जाता है। इनकी वंश परंपरा पूर्णतः पत्नी पक्ष पर केंद्रित रहती है, अनेकानेक आयामो से यह जनजाति समूह स्त्री प्रधान है। माँ की संपत्ति की उत्तराधिकारी सामान्यतः छोटी बेटी होती है। इसके पति को “नोक्रोम" कहा जाता है। नोक्रोम अपनी पत्नी और सास की संपत्ति का उपभोग तो कर सकता है, किंतु किसी अन्य को हस्तांतरित करने का उसे कोई अधिकार नहीं हैं। नोक्रोम का चुनाव अत्यन्त सावधानी से किया जाता है। मां सबसे छोटी बेटी के पति के चयन हेतु मामा के बेटे को क्रमश: प्राथमिकता देते हैं। इसके पीछे कारण संपत्ति को परिवार अथवा नातेदारी से बाहर जाने से रोकना होता है। इनकी सामाजिक प्रस्थति अत्यंत सुद्रढ़ है तथा आर्थिक अधोसंरचना सामाजिक प्रस्थति का केंद्र बिंदु है।