लिंग (सेक्स) और जेंडर - Gender and Gender

लिंग (सेक्स) और जेंडर - Gender and Gender


लिंग और जेंडर दो विभिन्न श्रेणियाँ हैं। लिंग प्राकृतिक है इसलिए स्थिर है। यह शारीरिक भिन्नता का द्योतक है। कोई भी स्त्री या पुरुष के रूप में पैदा होती होता है। जेंडर सामाजिक निर्मिति है। यह स्त्रीत्व और पुरुषत्व गुणों, व्यवहार के तरीकों, भूमिकाओं एवं दायित्वों आदि को अभिव्यक्त करता है। हर समाज ही यह तय करता है पुरुषत्व और स्त्रीत्व क्या है? जैसे ही संतान का जन्म होता है परिवार में जेंडर निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है। उदाहरण के लिए बच्ची को खिलौने के रूप में गुड़िया और बच्चे को गेंद या कार दी जाती है। शर्मीलापन, नम्रता, मृदुता, त्याग, कमज़ोरी जैसे गुण स्त्रीत्व के वहीं बहादुरी, नायकता, शक्ति पुरुषत्व के गुण माने जाते हैं। पुरुष तार्किक, हिंसक/आक्रामक, घर चलाने वाला तथा स्त्री भावुक, दब्बू घरेलू और माँ मानी जाती है। ये सामाजिक रूप से बनी हुई जेंडर की रूढ़ छवियाँ हैं। ये लिंग की भांति प्रकृति प्रदत्त नहीं है। मसलन अगर स्त्री खाना बना सकती है तो पुरुष भी बना सकता है।


इसी तरह अगर पुरुष ट्रक चला सकता है तो स्त्री भी चला सकती है। क्योंकि पुरुष गाड़ी चलाने के लिए अपनी शारीरिक शक्ति नहीं लगाता। यह जेंडर निर्मिति एकरूपीय (मोनोलिथिक) नहीं है। जेंडर निर्मिति देश एवं काल के अनुरूप बदल जाती है। पितृसत्ता की सफलता यह है कि ये सामाजिक निर्मितियाँ इस तरह से 'तटस्थ' प्रस्तुत की जाती है जैसे कि ये हमारे जैविक गुण हों। जाति, वर्ग, संस्कृति, धर्म राष्ट्र आदि विभिन्न तत्व जेंडर निर्मिति करते हैं। मूल्यों के विभिन्न समूह (सेट्स) हैं जो समाज में पुरुषत्व एवं स्त्रीत्व अस्मिताओं की पुनर्रचना करते हैं। इन्हीं से ही भारतीय स्त्री पुरुष या मराठी स्त्री पुरुष या दलित स्त्री पुरुष आदि अस्मिताओं का निर्माण होता है।