समूह की संरचना - group structure
समूह की संरचना - group structure
डोनर स्टाइलतथा डोनर स्टाइल (stile and stile 1984) के अनुसार समूह संरचना से इस बात का उल्लेख होता है कि समूह किस प्रकार संगठित है तथा उनके सदस्यों के स्थान या पद एक दूसरे से किस प्रकार संबंधित है। शेखर तथा बैटमैन 1974 के अनुसार समूह संरचना से तात्पर्य किसी समूह के सदस्यों की अंतर क्रियाओं के विभिन्न पहलुओं की विशेषताओं को स्पष्ट करने वाली उच्च सनरूफ इन अनियमितताओं से होता है जो सदस्यों की भावनाओं, प्रत्यक्षीकरण एवं उनकी क्रियाओं में पाई जाती है।
उपयुक्त परिभाषाओं के आधार पर यह कहा जा सकता है कि समूह संरचना से तात्पर्य समूह के उन गुणों से होता है जिसके आधार पर हमें यह पता चलता है कि समूह का आकार कैसा है. समूह में सदस्यों की व्यक्तिगत भूमिका कैसी है, सदस्यों के बीच आपस में संबंध किस तरह का है तथा समाज के अन्य समूह के साथ उसका संबंध कैसा है स्पष्ट है कि समूह की संरचना के आधार पर हमें समूह के बारे में अनेकों लाभदायक सूचनाएं मिलती हैं क्योंकि समूह सरचना एक बहुआयामी असम प्रत्यय है।
समूह के संरचना के आवश्यक तत्व निम्नलिखित हैं-
1- समूह का आकार समूह की संरचना का सबसे महत्वपूर्ण तत्व समूह का आकार है। समूह के आकार से तात्पर्य समूह में सदस्यों की संख्या से है। जब समूह में सदस्यों की संख्या कम होती है तो उसे छोटा समूह कहा जाता है। जैसे परिवार जिसमें पति पत्नी के अलावा बच्चे भाई बहन आदि सम्मिलित होते हैं। एक छोटा समूह वैसे समूह को कहा जाता है जिस में सदस्यों की संख्या मात्र दो होती है जैसे पति - पत्नी का समूह, मालिक और उसके नौकर का समूह आदि। जैसे जैसे समूह में सदस्यों की संख्या बढ़ती जाती है समूह का आकार बढ़ता जाता है। समाज मनोवैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययनों से स्पष्ट हो गया है कि समूह का आकार जैसे-जैसे बढ़ता जाता है समूह की संरचना की जटिलता भी वैसे-वैसे बढ़ती जाती है क्योंकि उनके सदस्यों के बीच अंतर क्रियात्मक संबंधों की संभावना बढ़ती जाती है।
2- समूह में व्यक्ति की भूमिकाएं प्रत्येक समूह में प्रत्येक सदस्य की एक निश्चित भूमिका होती है व्यक्ति किसी समूह का सदस्य बनता है तो वह किस तरह से दूसरों सदस्यों के साथ व्यवहार करेगा यह बहुत कुछ समूह संरचना के स्वरूप एवं उसके संरचना के अंतर्गत उसके द्वारा की जाने वाले भूमिका पर निर्भर करता है
जैसे जब समूह की संरचना औपचारिक होती है तो सदस्यों की अंतर क्रिया है एक निश्चित नियम द्वारा निर्देशित होती हैं तथा एक से दूसरे सदस्य का प्रतिक्षण उसके द्वारा की जाने वाली पूर्व निश्चित एवं परिभाषित भूमिका के रूप में ही करता है।
3- समूह संबंध- समूह संबंध समूह संरचना का तीसरा प्रमुख तत्व है। समूह संबंध से तात्पर्य सदस्यों के बीच आपसी संबंध से होता है। समाज मनोवैज्ञानिक एवं समाज शास्त्रियों का सामान्य मत यह है कि समूह प्राय: असमजातीय नहीं होते हैं और वे अक्सर कार्यात्मक रूप से कुछ छोटे-छोटे खंडों में बैठे होते हैं और ऐसे खंड प्रायः रूपी होते हैं। ऐसे खंडों को उप समूह कहा जाता है जैसे विश्वविद्यालय के सदस्यों के समूह।
4- संचार संरचना समूह संरचना की एक प्रमुख विशेषता समूह के संचार का स्वरूप होता है संचार से तात्पर्य समूह के सदस्यों को सूचना देने तथा प्राप्त करने की प्रक्रिया से होती है। संचार संरचना का आकार अन्य बातों के अलावा समूह के आकार पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर करता है। यदि समूह का आकार काफी छोटा है, तो सदस्यों में संचार प्रत्यक्ष होता है परंतु यदि समूह का आकार बड़ा है, जैसे कि औपचारिक समूह में पाया जाता है
तो सदस्यों के बीच संचार का स्वरूप भी जटिल हो जाता है। ऐसी परिस्थिति में एक सदस्य पदानुक्रम में अपने ठीक ऊपर या नीचे के सदस्य से तो प्रत्यक्ष रूप से संचालित स्थापित कर पाता है परंतु उससे दूर के सदस्यों के साथ संचार केवल अन्य सदस्यों के माध्यम से ही कर पाता है। अतः ऐसी समूह संरचना में संचार बाधित होती है। सचमुच में बाधक संचार की जटिलता से ही समूह संरचना की जटिलता का अंदाज हो जाता है।
5- विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच संबंध- किसी भी समाज में बहुत तरह के सामाजिक समूह होते हैं। किसी समूह विशेषकर बड़े समूह की संरचना को समझने के लिए विभिन्न सामाजिक समूह के संबंध के बारे में जानना आवश्यक है। जैसे अगर किसी राज्य को एक बड़ा समूह मान लिया जाए तो यह आवश्यक है कि इसकी संरचना हम सही सही तभी समझ सकते हैं जब इस बड़े समूह के विभिन्न समूहों,धार्मिक संगठनों, मजदूरों का समूह मंत्रियों का समूह दुकानदारों का समूह आदि को आपसी संबंधों के बारे में सही सही जाने जाहिर है कि इन विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच का संबंध है यदि सौहार्दपूर्ण होगा तो हम उस बड़े समूह अर्थात राज्य की सरचना को ठीक तरह से समझ पाएंगे क्योंकि यह अधिक स्पष्ट होगा।
ऊपर किए गए वर्णन से स्पष्ट है कि समूह की संरचना की व्याख्या समाज में वैज्ञानिकों ने विभिन्न तत्वों के रूप में किया है। इन सभी तत्वों पर ध्यान देकर ही किसी समूह संरचना की व्याख्या की जा सकती है।
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