महिला शिक्षा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि - Historical Background of Women's Education

 महिला शिक्षा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि - Historical Background of Women's Education


भारत में महिला शिक्षा का इतिहास बहुत पुराना हैं। इसे समझने के लिए हम महिला शिक्षा के इतिहास को पाँच भागों या काल में विभाजित कर सकते है। (1) वैदिक काल (2) बौद्ध काल (3) मध्य प्राचीन काल या मुस्लिम काल (4) ब्रिटिश या अंग्रेजी काल (5) वर्तमान काल या स्वतंत्रता के बाद का काल


प्राचीन काल या वेदिक काल 


पूर्व वैदिक काल महिलाओं को समाज में उच्च स्थान प्राप्त था महिलाओं को पुरुषों के समान शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार था। गुरु कुल में लड़के लड़किया शिक्षा प्राप्त करते थे। उन्हें अपना वर स्वयं चुनने का अधिकार प्राप्त था।

पुरुषों के समान वे सभी शास्त्रार्थों में भाग लेती थी। इस काल में गार्गी, मैत्रेयी, आत्रेय, शकुन्तला जैसी विदुषी स्त्रियों की चर्चा इस काल में मिलती है। परन्तु शिक्षित महिलाओं की संख्या ज्यादा नहीं थीं इस कारण यह हो सकता है कि इस समय महिला शिक्षा अत्यन्त सीमित थी तथा केवल समाज के उच्च वर्ग की लड़कियों/महिलाओं को ही शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्राप्त होता था। इस समय महिलाओं को अलग से शिक्षा न देकर पुरुषों के साथ सह शिक्षा दी जाती थी। महिलाओं को भी ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता था।


उत्तर वैदिक काल में महिलाओं की शिक्षा में कुछ शिथिलता आई। इस काल में महिलाओं के अधिकार में क्रमिक परिवर्तन दिखाई दिया।

स्मृति काल में स्त्रियों को सभी प्रकार की शिक्षा वेद के ज्ञान से वंचित कर दिया था। उस समय यह सोच विकसित हो गई की स्वतंत्रता से कुलीन स्त्रियाँ भी बिगड़ जाती हैं। उस समय के साहित्य में एक दोहा में कहा गया है कि स्त्री को बचपन में पिता के संरक्षण में यौवनावस्था में पति के संरक्षण में एवं वृद्धावस्था में पुत्र के संरक्षण में रहना चाहिए अर्थात् स्त्री कभी भी स्वतंत्र नहीं है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि इस काल (उत्तर वैदिक) में स्त्री को शिक्षा के अधिकार से वंचित कर दिया था। परन्तु इस काल में भी शैव्या, उर्मिला सीता, विद्योत्तमा, चुड़ाला जैसी अनेक नारियों ने अपनी विद्धवता, त्याग व समर्पण से अपने आपको समाज में प्रतिष्ठित किया।