प्रक्षेपी विधि का इतिहास - history of projectile method
प्रक्षेपी विधि का इतिहास - history of projectile method
प्रक्षेपी विधि के इतिहास पर। 1400 ए.डी में में लियोनार्दो द विन्सी ने कुछ ऐसे बच्चों का चयन किया, जिन्होंने कुछ अस्पष्ट प्रारूपों में विशिष्ट आकार तथा पैटर्न की खोज की। इस खोज से यह स्पष्ट हुआ कि उन बच्चों में रचनात्मकता का गुण विद्यमान था। इसके बाद सन् 1800 के उततरार्द्ध में बिने ने एक खेल जिसका नाम उन्होंने स्लोटो बताया के माध्यम से बच्चों की निष्क्रिय कल्पना को मापने का प्रयत्न किया। स्लोटो खेल में बच्चों को कुछ स्याही के धब्बे देकर उनसे पूछा जाता था कि इन धब्बों में उन्हें क्या आकार या प्रारूप दिखाई देता है। इसके उपरान्त सन् 1879 में गाल्टन द्वारा एक परीक्षण का निर्माण किया गया। जिसका नाम था "शब्द साहचर्य परीक्षण |
केन्ट तथा रोजानोफ्फ द्वारा परीक्षण कार्यों में गाल्टन द्वारा निर्मित परीक्षण का प्रयोग किया गया। सन् 1910 में युग द्वारा नैदानिक मूल्यांकन के लिये इसी प्रकार के परीक्षण का प्रयोग किया गया। इविंगहोंस ने बुद्धि मापने के लिये वाक्यपूर्ति परीक्षण का उपयोग किया। धीरे-धीरे इन अनौपचारिक प्रक्षेपीय प्रतिधियों ने औपचारिक प्रक्षेपी परीक्षणों को जन्म दिया। जो अपेक्षाकृत अधिक मानकीकृत थे और इनके माध्यम से पहले की तुलना में अधिक अच्छे ढंग से मानसिक योग्यताओं का मापन करना संभव हो सका।
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