शोध साहित्य की पहचान - Identification of Research Literature
शोध साहित्य की पहचान - Identification of Research Literature
शोध कार्य हेतु विषय के कुंजी शब्दों से संबंधित योग्य एवं प्रभावशाली साहित्य की खोज करने के लिए यह आवश्यक है कि जिस समस्या के विषय में खोज किया जा रहा हो उसके और शोधकर्ता के व्यापक विषय में आवश्यक जानकारी हो, ताकि शोधकर्ता अपने खोज में कुछ मानदंडों का गठन कर सके। शोध विषय के अनुरूप कौन-कौन से लिखित माध्यमों के द्वारा विषय से संबंधित पूरी जानकारी प्राप्त हो रही है। शोध विषय के अनुरूप हमारे शोध को दिशा प्रदान करने के लिए कौन-कौन से सहायक सामग्री के द्वारा अध्ययन की सहायता मिल रही है। प्रमाणित सूचियों के द्वारा उपलब्ध ज्ञान के भंडार से महत्वपूर्ण तत्वों की सहायता ली जाती है।
साहित्य के अंतर्गत विद्वानों के लेख, शोध पत्र, शोध प्रबंध पुस्तकें, जर्नल अथवा पत्रिकाएं, सम्मेलन संबंधी कागजात. इंटरनेट इत्यादि आते हैं।
जिन्हें हम साहित्य की श्रेणी में रखते हैं। जिनका एक प्रारूप के तहत समीक्षा अथवा पुनरावलोकन किया जाता है, जिसमें प्रासंगिक साहित्य का संग्रहण एवं अध्ययन, महत्वपूर्ण साहित्य का विहंगावलोकन/निरीक्षण, मुख्य अवधारणाओं और पत्रों पर प्रकाश डाला जाता है। इन मुख्य साहित्यों का विवरण कुछ इस प्रकार है :
(1) लेख: किसी विषय पर आधारित लिखा गया विचार एक लेख होता है। लेख के अंतर्गत समाज के अंतर्गत महसूस किए गए घटित घटना का विवरण, प्राथमिक आधार पर आलोकित घटना का विवरण एवं द्वितीयक स्रोतों के आधार पर प्रस्तुत किए गए विवरण एक लेख के अंतर्गत आते हैं।
(2) शोध पत्र एवं शोध प्रबंध किसी महत्वपूर्ण विषय पर प्राथमिक स्रोतों यथा अवलोकन, साक्षात्कार, वैयक्तिक अध्ययन, प्रश्नावली अथवा अनुसूची के माध्यम से अथवा द्वितीयक स्रोतों से प्राप्त आंकड़े अथवा तथ्यों की सहायता से किया गया शोध कार्य एक शोध प्रबंध अथवा शोध पत्र की श्रेणी में गिना जाता है।
(3) पुस्तकें : पुस्तकें किसी ग्रंथ के केंद्रीय भाग के रूप में होती हैं। पुस्तकों में प्रकाशित सामग्री महत्वपूर्ण तथा अच्छी गुणवत्ता वाली होती है और परिणाम अन्य शोधों के साथ एकीकृत किए गए होते हैं। यह ज्ञान के एक सामग्री भंडार का निर्माण करते हैं। पुस्तकें विभिन्न विषयों पर प्रकाशित होती हैं। कुछ पुस्तकें आनुभविक अध्ययन पर आधारित तो कुछ पुस्तकें द्वितीयक स्रोत पर आधारित होती है, जो एक मोटी ग्रंथ के रूप में प्रकाशित होती है।
(4) जर्नल अथवा पत्रिकाएं किसी विद्वान के द्वारा अथवा किसी शैक्षणिक संस्थान के द्वारा किए गए शोध के उपरांत उसके विस्तृत विवरण को प्रकाशित करवाया गया हो। एक जर्नल या पत्रिका में कई शोध पत्र प्रकाशित हुए रहते है। इस प्रकार की सामग्री को जर्नल अथवा पत्रिकाएं कही जाती है। (5) सम्मेलन संबंधी कागजात : विभिन्न मुद्दों पर आयोजित सम्मेलनों में विभिन्न विद्वानों के द्वारा
प्रस्तुत किए गए प्रबंध अथवा रिपोर्ट जो किसी विशेष क्षेत्र में हुए हाल के शोधों की जानकारियां प्रदान करते हैं। इन सम्मेलनों में किए गए चर्चाओं, व्याख्यानों से संबंधित विवरण पत्रिका में प्रकाशित होती हैं। (6) इंटरनेट आज के समय में लिखित रूप में अथवा दृश्य-श्रव्य रूप में विभिन्न विषयों अथवा मुद्दों पर जानकारियां अपलोड होती है।
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