अतार्किक क्रिया - illogical verb
अतार्किक क्रिया - illogical verb
पैरेटो की सैद्धान्तिक व्यवस्था में तार्किक क्रिया का कोई स्थान नहीं है। जब वे तार्किक क्रिया का उल्लेख करते हैं तो उनका उद्देश्य यह बताना है कि सामाजिक यथार्थता को जानने के लिए मनुष्य की संपूर्ण क्रियाओं में से पहले हम तार्किक क्रिया को निकाल लें। उनकी व्याख्या में तार्किक क्रिया वह है जिसमें वस्तुपरक व व्यक्तिपरक दोनो उद्देश्य समान हो जाये। यहीं नहीं इन दोनों के संबंध भी तर्कपूर्ण होने चाहिए। यह कहने के बाद ये अतार्किक क्रिया को परिभाषित करते हैं। वास्तव में वे समाजशास्त्र की परिभाषा को अतार्किक क्रिया द्वारा समझाते हैं। इसकी परिभाषा इन्होंने नकारात्मक रूप में दी है। (पैरेटों के अतार्किक क्रिया से तात्पर्य उन सभी क्रियाओं से है जो तार्किक नहीं है। दूसरे शब्दों में संपूर्ण क्रिया में से तार्किक क्रिया को घटा देते हैं जो शेष बचता है वह अतार्किक क्रिया है।) सूत्र रूप में वे कहते है कि यदि संपूर्ण प्रकार की क्रिया में से तार्किक क्रिया को हटा दे तो शेष अतार्किक क्रिया होगी। इन्होंने गणितीय सूत्र में इसे इस तरह से लिखा है-
अतार्किक क्रिया= संपूर्ण क्रिया - तार्किक क्रिया।
यद्यपि उन्होंने संपूर्ण क्रिया को कही परिभाषित नहीं किया है।
फिर भी इसका अर्थ यह है कि समाज की मूर्त प्रघटनाओं के बारे में जो भी क्रियाएँ हैं, वे सभी संपूर्ण क्रिया की श्रेणी में आते हैं इस संपूर्ण क्रिया में व्यक्तिपरक और वस्तुपरक दोनों प्रकार की क्रियाएँ सम्मिलित है। प्राथमिक विश्लेषण के लिए तार्किक क्रियाओं से पैरेटों का कोई सरोकार नहीं है। ये तो अतार्किक क्रियाओं की पहचान करने के बाद अपना विश्लेषण कर देते हैं।
सिद्धांत निर्माण की इस प्रक्रिया में पहुँचकर वे अतार्किक क्रिया की परिभाषा इस तरह से देते हैं कि तार्किक क्रियाएँ कम से कम अपने मुख्य लक्षण में तार्किकता की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप पैदा होती है। जबकि अतार्किक क्रियाएँ मस्तिष्क की दशा-संवेग तथा अचेतन में अवस्था प्रारम्भ होती है। मस्तिष्क की इस दशा का सरोकार मनोवैज्ञानिक से है।
पैरेटो ने तार्किक क्रियाओं को तो बड़े ही स्पष्ट और सुदृढ़ आधार पर रखा है। ये क्रियाएँ तर्क पर खड़ी होती हैं। लेकिन जब वे अतार्किक क्रियाओं की परिभाषा देते हैं तब कहते हैं
कि मनुष्य की जो भी मानसिक दशा होती है- भावात्मकता, संवेगात्मक. हर्ष, क्रोध यह सभी अतार्किक क्रियाओं का अध्ययन मनोविज्ञान के क्षेत्र में आता है। इसका स्पष्ट अर्थ यह है कि पैरेटो समाजशास्त्र व मनोविज्ञान में कोई अंतर नहीं करते। टॉलकट पारसन्स इस संदर्भ में पैरेटो के इस मनोविश्लेषण पर टिप्पणी करते हुये कहते हैं कि ऐसा लगता है कि ये केवल आर्थिक सिद्धांत को ही तार्किक व वैज्ञानिक मानते हैं। अर्थशास्त्र के अतिरिक्तत जो भी अन्य समाजविज्ञान है, पैरेटों की दृष्टि में सभी एक श्रेणी में आते हैं। उनकी समझ के अनुसार आर्थिक सिद्धांत एक तरफ है और शेष सिद्धांत चाहे समाजशास्त्र, मनोविज्ञान या इतिहास हो, दूसरी श्रेणी में आते हैं। इस दृष्टि से यह विवाद उठाना कि अतार्किक क्रियाएँ जब मनोविज्ञान का अध्ययन क्षेत्र है तो उन्हें समाजशास्त्र के साथ पैरेटों ने क्यों जोड़ा। पैरेटों की दृष्टि में यही मानकर चलना चाहिए कि अतार्किक क्रिया का अध्ययन चाहे मनोविज्ञान ही क्यों न करता हो समाजशश्त्री है।
लेविस कोजर के अनुसार अतार्किक क्रिया:- (अतार्किक क्रिया केवल वह क्रिया है जो पैरेटों की परिभाषा में तार्किक नहीं है। संपूर्ण क्रिया से तार्किक क्रिया निकाल दीजिए, जो अवशिष्ट है वही अतार्किक क्रिया है।)
पारसन्स ने अतार्किक क्रिया को अत्यधिक बृहद पृष्ठभूमि में रखा है। वे कहते हैं कि मनुष्य की सभी क्रियाओं को हम (1) कहते हैं। ये क्रियाएँ बहुत विस्तृत और विशाल है। इन क्रियाओं में हम रोजी रोटी के लिए सुबह से शाम तक जुटे रहते हैं। इसी तरह लोग विभिन्न क्रियाओं में संलग्न रहते हैं। इन सभी से क्रियाओं को हम (I) की श्रेणी में रखते हैं। अब इस संपूर्ण क्रिया (1) में से तार्किक क्रिया जिसका नाम (स्) है. निकाल देते हैं.तो शेष बचता है यानी जो अवशिष्ट है, वह अतार्किक क्रिया है। इसे इस प्रकार से समझा जा सकता है कि हम अपने व्यवसाय, परिवार, समुदाय, वर्ग आदि में कई क्रियाएँ करते हैं। इनमें अधिकांश क्रियाएँ तार्किक है। लेकिन जब हम मनोरंजन करते है, लिखते हैं. चित्र बनाते हैं, तथा साहित्य, कला आदि से संबंधित क्रियाएँ करते हैं वह ही अतार्किक क्रिया है।
पैरेटो की परिभाषा में समाजशास्त्र एक ऐसा समाजविज्ञान है जो मनुष्य की अतार्किक अन्तः क्रिया का अध्ययन करता है। तार्किक अन्तः क्रियाओं का अध्ययन तो अर्थशास्त्र करता है एवं अतार्किक क्रियाओं का अध्ययन समाजशास्त्र की विषयवस्तु है। पैरेटों कहते हैं कि क्रिया तो अतार्किक है परन्तु इसको अध्ययन करने की पद्धति तार्किक है।
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