शोध में साहित्य पुनरावलोकन का महत्त्व - Importance of Literature Review in Research
शोध में साहित्य पुनरावलोकन का महत्त्व - Importance of Literature Review in Research
साहित्य का पुनरावलोकन शोधकर्ता के लिये उसके शोध कार्यों को दिशा निर्देश देने का कार्य करता है। साहित्य पुनरावलोकन से शोध को अंतरदृष्टि प्राप्त होती है। शोध साहित्य में अध्ययन के दौरान ज्ञात होता है कि इस शोध में आगे और भी कार्य हो सकता है इस आधार पर पूर्व के शोध साहित्य के उद्देश्य व प्रविधियों को लेकर उस शोध के कार्यों पर आगे भी काम किया जा सकता है। साहित्य पुनरावलोकन यह भी बताता हैं
कि किसी घटना या प्रभाव का अध्ययन किस क्षेत्र में किया गया है
और किस क्षेत्र में नहीं किया गया है एवं किस क्षेत्र में किए जाने की आवश्यकता है। साहित्य पुनरावलोकन शोध से संबन्धित महत्वपूर्ण जानकारियाँ उपलब्ध कराता है। जिस क्षेत्र में शोध किया जाना है और उसके बारें में कम जानकारी हो या उसका बिलकुल अभाव हो तो शोध साहित्य के अध्ययन से उसके बारे में अच्छे से जानकारियाँ उपलब्ध हो जाती है। साथ ही साथ अध्ययन या शोध में तथ्यों या आंकड़ों को किस प्रकार और कैसे प्राप्त किए जाएंगे उसके लिये उद्देश्य, शोध के प्रश्न व प्रविधियों को लेकर या उनके विचार व दृष्टिकोणों को उपयोगी बनाया जाएगा। एक शोध हेतु साहित्य पुनरावलोकन महत्वपूर्ण ही नहीं अपितु दिशानिर्देश के रूप में अतिआवश्यक भी है।
वर्तमान में विभिन्न क्षेत्रों में किए जाने वाले विभिन्न प्रकार के शोधों का मुख्य आधार साहित्य पुनरावलोकन कर आगे बढ़ना है। पूर्व के किए गए कार्य वर्तमान में किए जाने वाले भावी अध्ययन को उस विषय की सामान्य जानकारी प्रविधियों, और निकले परिणामों से रूबरू करा कर मार्ग प्रस्तुत करता है। यदि किसी भावी शोध हेतु साहित्य पुनरावलोकन की सहायता नहीं लिया जाए तो शोध में आने वाली विभिन्न समस्याओं और भटकाव का सामना करना पड़ता है और शोध की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा होता है।
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