ग्रामों का महत्व - Importance of Village
ग्रामों का महत्व - Importance of Village
कोई भी देश ऐसा नहीं है जहां ग्रामीण समुदाय नहीं है। प्रत्येक देश में कृषि कार्य ग्रामीणों द्वारा ही किया जाता है ग्राम ही वहाँ की प्राचीन संस्कृति का आधार है। सांस्कृतिक परिवर्तन एवं विकास का अध्ययन करने के लिए समुदाय का ही अध्ययन करना होता है, वहीं उद्योग के लिए कच्चे माल का उत्पादन करते है। भारत जैसे देश में जहाँ अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण है. ग्रामों का महत्व और भी बढ़ जाता है। गाँव के महत्व महत्व को हम निम्नांकित शीर्षक के अंतर्गत प्रकट कर सकते हैं -
(1) अधिकांश जनसंख्या का निवास (Inhabitation of Large Population)
भारत में उत्तर प्रतिशत जनसंख्या ग्रामों में ही निवास करती हैं इन गांव की संख्या लगभग 5.7 लाख% है अतः ग्राम ही वास्तविक भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं वहीं भारतीय सभ्यता और संस्कृति की आत्मा है।
(2) संस्कृति का आधार स्थल (Base ground of Culture)
भारतीय संस्कृति का अवलोकन करना है तो ग्रामों की ओर जाना होगा। ग्रामों में ही हमें वैदिक संस्कृति से लेकर मध्यकालीन संस्कृति के दर्शन होंगे। नगरीय संस्कृति तो विभिन्न संस्कृतियों का मिश्रण मात्र है। किंतु ग्रामीण संस्कृतिभारतीय संस्कृति का शुद्ध रूप प्रस्तुत करती है। यदि हम प्राचीन कला, धर्म, प्रथा, रीति-रिवाजों, रूढ़ियों, विश्वासों का अध्ययन करना है तो हमें गांव का अध्ययन करना ही होगा।
(3) आर्थिक महत्व (Economic Importance) -
गाँव का प्रत्येक देश के लिए महत्व भी है। वे उत्पादन के स्रोत हैं, गांव ही सारे देश के लिए अन्न पैदा करते हैं, हमारी अन्न समस्या का प्रमुख कारण गांव का पिछड़ापन और कृषि में उत्पादन के परंपरागत तरीकों का अपनाया जाना है।
समस्या के समाधान के लिए कृषि व्यवस्था की उन्नति करनी होगी और इसके लिए आधुनिक वैज्ञानिक साधनों, बीज एवं खादों के बारे में ग्रामीणों को ज्ञान कराना होगा। गाँव कच्चे माल के भी स्रोत है, उद्योगों के लिए कपास, जूट, तिलहन. गन्ना आदि गांव में ही पैदा होती है, पशुपालन का कार्य भी गांव में अधिक होता है। वही नगरों को दूध एवं घी प्रदान करते हैं। कृषि से ही विदेश में जाने वाला आधार माल प्राप्त होता है। देश की आय का लगभग आधा भाग कृषि और उससे संबंधित व्यवसाय से ही प्राप्त होता है।
(4) श्रम का स्रोत (Source of Labour)
ग्राम श्रम शक्ति का मूल स्रोत हैं। विभिन्न उद्योगों में काम करने के लिए नगरों में ग्रामीण लोग ही लगे हुए हैं। अनेक निर्माणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन ग्रामीण मजदूरों से ही हुआ है और हो रहा है। बड़े-बड़े कारखाने और बांध, भवन, पुल आदि के निर्माण में ग्रामीणों का श्रमिकों के रूप में महत्वपूर्ण योगदान है।
रेलवे, बंदरगाह, चाय के बागान, खानों और कारखानों में ग्रामीण लोग ही श्रमिकों के रूप में कार्य करते हैं। ग्रामीण श्रमिक ही हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है।
(5) मानवीय शक्ति का स्रोत (Source of Human Power)
ग्राम ही मानवीय शक्ति की स्रोत हैं। हमारी सेना में काम करने वाले सिपाहियों में अधिकांश लोग गांव के ही निवासी होते हैं। जहाँ नगरीय लोग केवल बौद्धिक कार्यों में संलग्न है वहां ग्रामीण लोग शारीरिक शक्ति के कार्यों में ग्रामीण राष्ट्र की मानवीय शक्ति की वृद्धि करते हैं। प्राकृतिक और स्वच्छ वातावरण में रहने के कारण ए लोग सामान्यतः निरोग, शक्तिशाली और स्वस्थ होते हैं।
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