शोधार्थी के महत्वपूर्ण गुण - Important Quality of Scholar

 शोधार्थी के महत्वपूर्ण गुण - Important Quality of Scholar


शोध सरल कार्य नहीं है जिसे प्रत्येक व्यक्ति सफलतापूर्वक कर सके। एक शोधकर्ता को


यथार्थता की स्थिति तक पहुंचने के लिए विशेष योग्यता तथा ज्ञान की आवश्यकता होती है। शोध कार्य हेतु सिर्फ कुछ पुस्तकीय ज्ञान का ही होना काफी नहीं माना जा सकता है। इसके लिए शोधकर्ता में कई बाहरी और आंतरिक गुणों का होना बहुत जरूरी माना जाता है। इसका कारण यह है कि शोध कार्य सामाजिक घटनाओं से जुड़ा हुआ होता है और सामाजिक घटनाएं अमूर्त, परिवर्तनशील, व्यक्ति प्रधान एवं मुश्किल होती हैं। अतः शोध कार्य से जुड़ा अध्ययन नैसर्गिक अथवा वास्तविक घटनाओं की तुलना में कहीं अधिक मुश्किल होता है। घटनाओं के अध्ययन का तात्पर्य वास्तव में मानव के द्वारा मानव के ही विषय में अध्ययन है।

इससे यह पता चलता है कि जिस समस्या या विषय के संदर्भ में शोधकर्ता शोध करता है उस समस्या या विषय का स्वयं एक हिस्सा होता है। इसलिए शोधकर्ता को पूर्ण रूप से शोध कार्य के लिए योग्य और प्रशिक्षित होना चाहिए, तभी वह अपने शोध कार्य में सफलता हासिल कर सकता है। उसमें वे सभी गुण होने चाहिए जो किसी शोध विशेष के लिए आवश्यक होते हैं। शोधकर्ता के व्यक्तित्व में कुछ स्वभाविक लक्षण विद्यमान होते हैं और कुछ लक्षणों को वह धीरे-धीरे परिश्रम तथा अभ्यास के द्वारा प्राप्त करता है। स्वाभाविक गुणों का अर्थ बुद्धि तथा स्वभाव संबंधी उन गुणों से है, जो मनुष्य को ऐसे कार्य करने की प्रेरणा तथा योग्यता प्रदान करते हैं। एक योग्य सफल शोधकर्ता में निम्नलिखित गुणों का होना आवश्यक है


(1) शोधार्थी के व्यक्तिगत गुण (Personal Quality of Scholar)


सामाजिक शोध एक शिक्षा संबंधी कार्य है, इसलिए इसका कोई भी संबंध शोधकर्ता की शारीरिक विशेषताओं से नहीं होता है।

यह विश्वास अनेक लोगों का है पर यह गलत है। शोध कार्य की सफलता में शारीरिक गुणों का भी अपना महत्व होता है, जैसा कि निम्नलिखित विवेचना से स्पष्ट होगा 


(A) मृदुभाषी होना :


सफल शोध के लिए शोधकर्ता को वाकपटुता में चतुर होना चाहिए एवं उसकी वाणी में उत्तरदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता होनी चाहिए। शोधकर्ता के उचित एवं सही व्यवहार से ही उत्तरदाता उसके संपर्क में आएंगे। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए उसे किसी भी प्रकार का भेदभावपूर्ण व्यवहार किसी के साथ भी नहीं करना चाहिए।

इसके साथ ही महत्वपूर्ण बात यह है कि शोधकर्ता को स्वयं अपने अध्ययन क्षेत्र में जाकर उत्तरदाताओं से अपनी वार्ता करते समय अपने उद्देश्य को स्पष्ट करना चाहिए। इस प्रकार व्यवहार कुशल होना एक सफल शोधकर्ता के लिए आवश्यक है। 


(B) आकर्षक व्यक्तित्व :


किसी के ऊपर एक स्वाभाविक प्रभाव लोगों पर आकर्षक व्यक्तित्व का पड़ता है। हंसमुख चेहरा, अच्छी आदतें, तथा आकर्षक व्यवहार प्रतिमान रखने वाला व्यक्ति किसी भी सूचनादाता से और अविश्वसनीय तथ्य प्राप्त करने में सफल हो सकता है। साफ-सुथरी भाषा के प्रयोग से लोगों पर प्रभाव पड़ता है और इसका पूरा-पूरा फायदा मिलता है। जितना ही अधिक व्यक्तित्व आकर्षक होगा उतनी ही अधिक सत्य, ठोस तथा महत्वपूर्ण सूचनाएं सुगमता से एकत्रित की जा सकती है। शोध कार्य की सफलता के लिए यह आवश्यक गुण है। 


(C) सहनशीलता :


अच्छे शोधकर्ता के अंतर्गत इस गुण का होना जरूरी है। अपने शोध कार्य के मध्य शोधकर्ता को कई प्रकार के मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। शोध कार्य के वक्त कई सूचनादाता शोधकर्ता के साथ बुरा व्यवहार करते हैं, उसे कई तरह की टीका-टिप्पणियां सुनाते हैं एवं स्पष्ट भाषा में किसी भी प्रकार का सहयोग ना देने की हट कर बैठते हैं। अतः शोधार्थी या शोधकर्ता के अंदर इन व्यवहारों को सहन करने की शक्ति होनी आवश्यक है। 


(D) अच्छा स्वास्थ्य:


एक शोधकर्ता के शारीरिक गुणों के अंतर्गत अच्छे स्वास्थ्य का सदैव बने रहना अत्यंत जरूरी माना जाता है। शोधकर्ता को अपने शोध कार्य के वक्त या शोध कार्य से संबंधित अनेक कामों के लिए लगातार भागदौड़, कठिन परिश्रम इत्यादि की जरूरत बनी रहती है

जिसके लिए अच्छे स्वास्थ्य का बना रहना अत्यंत आवश्यक है। अच्छे स्वास्थ्य के कारण शोधकर्ता हर परिस्थिति में तथ्य एकत्रित करने में सक्षम होता है एवं साथ ही साथ उचित तथ्य भी एकत्रित कर सकता है।


(E) अध्यवसायी :


अच्छे शोधकर्ता को अध्यवसायी अर्थात साधनाशील होना चाहिए। उसके अंदर किसी भी स्थिति में ना हारने का गुण होना चाहिए। शोध कार्य के दौरान अनगिनत ऊंची-नीची परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इस बीच कई बार निराशाजनक तथा स्वाभाविक दुर्घटनाएं भी घटती हैं। इन सब के मध्य शोधकर्ता को अपना साधनशील या अध्यवसाय उसे राह दिखा कर आगे ले जाती है। शोध कार्य के दौरान शोधकर्ता को एक ही सूचनादाता के पास कई बार जाना पड़ता है फिर भी सूचनादाता मिल नहीं पाता है, वह व्यक्तिगत काम में व्यस्त होने के कारण सवालों का उत्तर देने हेतु समय नहीं निकाल पाता है। अनेक बार सूचनादाता समय देने के पश्चात भी सवालों के उत्तर को किसी प्रकार से समाप्त करके शोधकर्ता को टालने का प्रयास करते हैं। इन सब स्थितियों से बचने के लिए शोधकर्ता को फोन, आदि करके सूचनादाता चाहिए। से निश्चित समय लेना चाहिए साथ ही जवाब पाने के लिए धैर्य को बनाए रखना।