पारसन्स के महत्वपूर्ण कृतियाँ - Important Works of Parsons
पारसन्स के महत्वपूर्ण कृतियाँ - Important Works of Parsons
पारसन्स ने 1937 से पहले कुछ निबंध लिखे, परंतु 1937 में उन्होंने अपनी पहली महत्वपूर्ण पुस्तक (दि स्ट्रक्चर ऑफ सोशल एक्शन) लिखी। इस पुस्तक में उन्होंने सामाजिक क्रिया के संबंध में महत्वपूर्ण विद्वानों के विचार प्रस्तुत किए। इसमें वेबर के व्यक्तिवाद एवं दुर्खाइम के समूहवाद को एकीकृत करने का प्रयास किया। 1949 में (एस्सेज इन सोशियोलॉजिकल थियरीज) नामक पुस्तक लिखी। यह मुख्य रूप से सामाजिक क्रिया और अंतर्क्रिया की दृष्टि से सामाजिक यथार्थ को देखने का प्रयास था। पुस्तक का एक संशोधित संस्करण 1954 में प्रकाशित हुआ ।
पारसन्स ने 1950 के आस-पास अपनी सैद्धांतिक दृष्टि बदल दी। वे अंतर्क्रियावाद से प्रकार्यवाद में आ गए। 1951 में पारसन्स ने एडवर्ड शील्स के साथ मिलकर (टुआई ए जेनेरल थियरी ऑफ एक्शन) नामक पुस्तक लिखी। अपनी बदली हुई प्रकार्यवादी सैद्धांतिक दृष्टि को उद्घाटित करते हुए 1951 में पारसन्स ने (सोशल सिस्टम) नामक पुस्तक लिखी। इसके दो वर्ष बाद 1953 में पारसन्स ने आर. एफत्र बेल्स एवं एडवर्ड शील्स के साथ मिलकर (वकिंग पेपर्स इन दि थियरी ऑफ एक्शन) नामक पुस्तक लिखी।
1955 में पारसन्स ने अनेक विद्वान के साथ मिलकर, जिनमें प्रमुख थे बेल्स, शील्स, जूडिथ, स्लेटर आदि, (फेमिली, सोशलाइनेशन एंड इंटरएक्शन) नामक पुस्तक लिखी। 1956 में पारसन्स ने एन.जे. स्मेलसर के साथ मिलकर (इकोनामी एंड सोसायटी) नामक पुस्तक लिखी। स्पेंसर ने दक्षिण में इस समस्या का अध्ययन किया था। मैक्स वेबर ने इसी शीर्षक से एक बड़ी पुस्तक लिखी थी जिसका प्रकाशन उनके मरणोपरांत 1922 में हुआ था।
पारसन्स ने इस बीच काफी निबंध लिखे। उनकी आलोचना भी होने लगी। अमेरिका में अनुभवाश्रित संख्यात्मक अध्ययनों का जोर था। पारसन्स व्यापक सिद्धांतों को पुस्तक कर रहे थे। 1964 में उनकी पुस्तक (सोशल स्ट्रक्चर एंड पर्सनालिटी) प्रकाशित हुई। इसके दो वर्ष बाद 1966 में उनकी पुस्तक (सोसायटीज इवाजुशनरी एंड कंपेरेटिव पर्सपेक्टिव) प्रकाशित हुई। इस समय तक आते-आते पारसन्स सामाजिक परिवर्तन के संबंध में उद्विकासवादी दृष्टि को अपना चुके थे। 1967 में उनकी पुस्तक (दि सोशिओलाजिकल थियरी एंड माडर्न सोशियोलॉजी) प्रकाशित हुई।
1971 में पारसन्स की पुस्तक (दि सिस्टम ऑफ मॉडर्न सोसायटीज) प्रकाशित हुई 1973 में जराल्ड प्लेट के नाथ पारसन्स ने (दि अमेरिकन यूनिवर्सिटी) लिखी। 1977 में उन्होंने (दि इवालुशन ऑफ सोसाइटीज) लिखी। 1977 में ही उन्होंने (सोशल सिस्टम एंड दि इवालुशन ऑफ एक्शन थियरी) लिखी ।
पारसन्स ने समय-समय पर अनेक निबंध लिखे। पारसन्स की लेखन क्षमता अपार थी। इन निबंधों में एमिल दुर्खाइम एवं पैरेटों के समाजशास्त्रीय योगदान के संबंध में उनका निबंध प्रभावी था। पारसन्स ने फासीबाद के चरित्र के संबंध में लिखा। पारसन्स ने बहुत पहले 1953 में ही किंग्सले डेविस एवं विलवर्ड मूर के स्तरीकरण के प्रकार्यवादी सिद्धांत के व्यापक टिप्पणी की थी। यह यही है कि पारसन्स ने बड़ी संरचनाओं एवं व्यापक समस्याओं के संबंध में चार बार लिखा, परंतु वे सामाजिक क्रिया की पृष्ठभूमि मनोवैज्ञानिक दृष्टि और व्यक्तिव दी परिप्रेक्ष्य से कभी निकल नहीं पाए।
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