आधुनिकीरण एवं भारतीय संविधान - Indian Constitution and Modernzation

 आधुनिकीरण एवं भारतीय संविधान - Indian Constitution and Modernzation


भारतीय संविधान भारतीय आधुनिकीकरण का शुभारंभ है। भूतकालीन आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक, राजनैतिक एवं सांस्कृतिक आदि क्षेत्र में परंपरागत व्यवस्था को नवीनीकरण के लिए दिशा एवं गति प्रदान की है। भारतीय संविधान का निर्माण आधुनिक भारत के निर्माण के लिए कीया गया है। भारतीय संविधान आधुनिकीकरण की आधारशिला है। भारतीय संविधान की उद्देशिका नवसमाज के निर्माण में नए मूल्यों के विकास का प्रारूप है। सार्वभौमत्व, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक, गणराज्य, न्याय, स्वतंत्रता, समता, बंधुता आदि मूल्यों का स्वीकार भारतीय संविधान की द्वारा किया गया है। संविधान की उद्देशिका संविधान का आईना है। उद्देशिका में सम्मिलित मुल्योंपर संविधान का निर्माण किया गया। भारतीय संविधान आधुनिक भारतीय समाज को सार्वभौमत्व प्रदान करता है। आधुनिक समाज की संरचना समाजवादी तत्वों के आधारपर करना चाहता है।

भारतीय समाज बहुधर्मीय, बहुभाषीय, बहुपंथीय, बहुक्षेत्रीय होने के कारण किसी एक पंथ या धर्म को विशेष स्थान न देकर सभी धर्मोको समानता प्रदान करता है। इस हेतु भारत को एक धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था के रूप में ढलना चाहता है। स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत भारत ने लोकतांत्रिक व्यवस्था का स्वीकार किया है। लोकतंत्र का स्वीकार करते हुए भारत ने राजेशाही सरंजामशाही का त्याग कर दिया था। नव समाज के निर्माण के लिए न्याय, स्वतंत्रता, समता, बंधुता आदि मूल्यों का स्वीकार किया गया है।


• सार्वभौमत्व


1947 से पूर्व भारत ब्रिटिश शासन के अधीनस्थ था। ब्रिटिशों ने 150 वर्ष तक भारत पर शासन किया। भारतीय जनता का आंदोलन एवं वैश्विक परिस्थिति का परिणाम भारत को आझादी प्राप्त हुई।

आझादी के उपरांत भारत सार्वभौम बना। यह नव समाज की निर्माण का प्रथम पायदान था। भारत का शासन अब भारत सरकार द्वारा किया जायेगा। भारतीय संविधान आधुनिक भारतीय समाज को सार्वभौमत्व प्रदान करता है। इससे आधुनिकीकरण को बढ़ावा मिला है।


• समाजवादी


समाज के सभी वर्गों के लिए समान समाज व्यवस्था का निर्माण करना समाजवाद कहलाता है। समाज के अंतिम वर्ग की उन्नति का दायित्व शासन स्वीकारता है। यह नव समाज एवं आधुनिकीकरण में सहायक हुआ।


• धर्मनिरपेक्ष


भारतीय समाज बहुधर्मीय, बहुभाषीय, बहुपंथीय, बहुक्षेत्रीय होने के कारण किसी एक पंथ या धर्म को विशेष स्थान न देकर सभी धर्मोको समानता प्रदान करता है। इस हेतु भारत को एक धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था के रूप में ढलना चाहता है।

धर्म निरपेक्षता के तत्वों के स्वीकार के उपरांत धर्म से संबंधित अनेक बदलाव आये। जो नव समाज बनाने में एवं आधुनिकीकरण में सहायक बने। 


• लोकतंत्र


स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत भारत ने लोकतांत्रिक व्यवस्था का स्वीकार किया है। लोकतंत्र का स्वीकार करते हुए भारत ने राजेशाही, सरंजामशाही का त्याग कर दिया था। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है। धर्म, पंथ, जाति, वर्ग, क्षेत्र, जन्मस्थान, लिंग आदि के संदर्भ बदल गए। नव समाज में सभी के संदर्भ में समानता का प्रारंभ हुआ।


• गणराज्य


आझादी के बाद भारत गणराज्य बना।

ब्रिटिश हुकूमत की समाप्ति के उपरांत भारतीय जनता का शासन लोकतंत्र की माध्यम से आरंभ हुआ। भारतीय जनता विकास की ओर बढ़ने लगी। आधुनिक शिक्षा के कारण आधुनिकीकरण में बढ़ोत्तरी हुई।


• न्याय


भारतीय संविधान ने समाज के सभी वर्गों के लिए समान न्याय तत्वों का स्वीकार किया। धर्म, पंथ, जाति, वर्ग, क्षेत्र, जन्मस्थान, लिंग आदि का भेद समाप्त करने का ऐलान किया। सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक न्याय प्रधान करने का विश्वास भारतीय संविधान द्वारा प्राप्त हुआ। न्यायालय के सामने सभी समान है।


• स्वतंत्रता


स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत भारतीय समाज को विकास की स्वतंत्रता प्राप्त हुई।

150 वर्षों की गुलामी ख़त्म हुई। विचार की अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता प्रदान की गई। यह आधुनिकीकरण के लिए महत्वपूर्ण है।


• समता


धर्म, पंथ, जाति, वर्ग, क्षेत्र, जन्मस्थान, लिंग आदि का भेद समाप्त कर समता प्रस्थापित करने की व्यवस्था की है। सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, राजनैतिक क्षेत्र में भेदभाव को ख़त्म कर दिया। प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्रदान की गई। आधुनिकीकरण के निर्माण में समता अधिक महत्वपूर्ण है।


• बंधुता


धर्म, पंथ, जाति, वर्ग, क्षेत्र, जन्मस्थान, लिंग आदि का भेद अमान्य किया गया।

सभी नागरिकों में बंधुता की भावना का प्रसार प्रचार का मूल्य स्वीकार किया गया। व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता का स्वीकार किया गया। आधुनिक समाज की नई व्यवस्था में बंधुता का मूल्य महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ।


• मौलिक अधिकार


भारतीय संविधान के भाग 3 (धारा-12 से 35), राज्य के नीति निदेशक तत्व ( धारा 36 से 51), भाग 4 क (धारा 51 ) में मूलभत अधिकार के संदर्भ में प्रावधान किया गया है। न्याय की समानता, सभी प्रकार के भेदभाव का अंत, अवसरों की समानता, विचार एवं अभिव्यक्ति स्वतंत्रता, व्यवसाय की स्वतंत्रता, मानव व्यापार पर प्रतिबंध, बाल मजदूरी पर प्रतिबंध, अल्पसंख्यको की शिक्षा एवं संस्कृति को संरक्षण आदि का प्रावधान भारतीय समाज के आधुनिकीकरण के लिए सहायक सिद्ध हुआ। के


• राज्य के नीति निदेशक तत्व


लोककल्यानकारी शासन व्यवस्था समान न्याय एवं निशुल्क न्यायिक सहायता, सत्ता का विकेंद्रीकरण शिक्षा का सार्वभौमिकरण वंचित जाती जनजाति के लिए विशेष प्रावधान, स्वास्थ्य योजनाओं की व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण, आंतरराष्ट्रिय शांति एवं सुरक्षा आदि राज्य के नीति निदेशक तत्व में सम्मीलित है।

यह नवसमाज के निर्माण के लिए आधार बने।


• मिश्र अर्थव्यवस्था


आधुनिक समाज की संरचना समाजवादी तत्वों के आधारपर करना चाहता है। विश्व में साम्यवाद एवं पूंजीवाद यह दो विचारधारा प्रचलित थी। अपने देश की परिस्थिति के अनुसार भारतीय राजनीतिज्ञों ने साम्यवाद एवं पूंजीवाद के उपयुक्त गुणों का स्वीकार किया। इस व्यवस्था को मिश्र अर्थव्यवस्था के नाम से जाना जाता है।


उक्त के आधार पर भारतीय समाज की अभिवृत्ति एवं मानसिकता का विकास आधुनिकीकरण के संदर्भ में किया गया।