अन्तः समूह तथा बाह्य समूह - inner group and outer group
अन्तः समूह तथा बाह्य समूह - inner group and outer group
अन्तः समूह व्यवहार के आधार पर समूह को दो भागों में विभाजित किया गया है अंतः (इन) समूह या हम समूह तथा बाह्य (आउट) समूह या वे समूह। इन दोनों समूहों की कुछ अपने अपने विशेषताएं हैं जिसके आधार पर इन्हें एक दूसरे से अलग किया जाता है। अन्तः समूह- अन्तः समूह वैसे समूह को कहा जाता है जिनके सदस्यों में आपस में सहयोग, निष्ठा एवं आदर का भाव अधिक होता है। ऐसे समूह के सदस्य अपने समूह के मानदंडों तथा रीति-रिवाजों को अधिक मान्यता देकर उसके अनुसार व्यवहार करते हैं इनमें एकता काफी होती है तथा उनका मनोबल काफी ऊंचा होता है।
रिवर (1985) के अनुसार, "एक ऐसा समूह जिसके सभी सदस्य समूह के साथ गहरा अपनापन का भाव तथा उत्कृष्टता का भाव रखते हैं तथा एकजुट होकर अन्य लोगों को अपने से अलग हटा देते हैं अन्तः समूह कहलाता है।"
बाह्य समूह- इस समूह से तात्पर्य ऐसे समूह से होता है जिसके सदस्यों के प्रति सहानुभूति निष्ठा आदि का भाव व्यक्ति में नहीं होता है।
ऐसे समूह के प्रति व्यक्ति में किसी प्रकार हम आवंटन भी नहीं होता है संक्षेप में कहा जा सकता है कि अपने समूह के अलावा जो और समूह होते हैं उसे हम बाह्य समूह (out group) कहते हैं इसलिए इसे वे समूह (they group) भी कहा जाता है।
रेबर (Reber, 1985) के अनुसार "आउट समूह से तात्पर्य वैसे समूह से होता है जिसमें एक या सभी व्यक्ति अंतर समूह का सदस्य नहीं होते हैं।" ईवांट (Ivant, 1978) के अनुसार "कोई भी समूह जिसका व्यक्ति सदस्य नहीं होता है आउट समूह कहलाता है।"
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