शोधार्थी के बौद्धिक गुण - Intellectual Quality of Scholar
शोधार्थी के बौद्धिक गुण - Intellectual Quality of Scholar
शारीरिक व निजी गुणों का होना एक अच्छे शोधकर्ता हेतु काफी नहीं माना जा सकता है। उसके अंदर कुछ बौद्धिक गुणों का भी होना जरूरी माना जाता है -
(A) अविलंब निर्णय क्षमता :
शोधकर्ता में अविलंब निर्णय लेने की योग्यता भी होनी चाहिए किसी भी क्षेत्र एवं किसी भी मामले में निर्णय लेने के लिए उसे दूसरे पर निर्भर नहीं रहना चाहिए बल्कि उसमें इतनी योग्यता होनी चाहिए कि वह स्वयं किसी भी मामले में निर्णय ले सकें। शोधकर्ता को अपने घर से दूर रहकर अपरिचित स्थितियों में काम करना पड़ता है, इसलिए यदि उन परिस्थितियों में आवश्यकतानुसार शीघ्र निर्णय लेने की योग्यता उसमें नहीं है
तो वह सफल शोधकर्ता नहीं बन सकता है। भिन्न-भिन्न परिस्थितियों में आवश्यकतानुसार लाभप्रद निर्णय लेने की योग्यता ही अपरिचित स्थितियों में सफलतापूर्वक बाधक समस्याओं का सामना करने में सहायक होती है।
(B) विचारों की स्पष्टता:
शोधकर्ता की विचारधारा विवेचनात्मक होनी चाहिए। उसमें यह योग्यता होनी चाहिए कि वह मुश्किल परिस्थितियों तथा पहलुओं को समझ कर उस संदर्भ में अपने मत को स्पष्ट रूप में प्रकट कर सके। इस योग्यता के बिना ना तो वह तथ्यों की विश्लेषणात्मक विवेचना स्पष्ट रूप में कर सकता है और ना ही रिपोर्ट में समस्या या उसके निवारण के संदर्भ में स्पष्ट विचारों को प्रकट कर सकता है। लोगों के समक्ष अपनी बातों को स्पष्ट रूप से रखने की योग्यता तथा उसे संबंधित व्यक्तियों को समझाने की क्षमता अध्ययन कार्य में बहुत सहायक होती है।
(C) बौद्धिक ईमानदारी :
सामाजिक प्रघटना के संबंध में स्पष्ट निर्णय देना बहुत कठिन है। इसका मुख्य कारण यह है कि शोधकर्ता जिन सामाजिक घटनाओं का अध्ययन करता है उसका वह खुद भी एक हिस्सा होता है। इसलिए उन घटनाओं के संबंध में जो विचार वह व्यक्त करता है, वे उसकी अपनी व्यक्तिगत भावनाओं, आदर्शों तथा मुल्यों पर आधारित हो सकते हैं। इसलिए सामाजिक शोधकर्ता को चाहिए कि समाज का एक अभिन्न अंग होने के उपरांत भी समाज की वास्तविकता को सही रूप में प्रस्तुत करें। यह कार्य तभी संपन्न हो सकता है जब उनमें बौद्धिक योग्यता है। बौद्धिक ईमानदारी होने पर शोधकर्ता समाज में व्याप्त धारणाओं के खिलाफ भी घटना विशेष की वास्तविकताओं एवं अपनी व्यक्तिगत सलाह को प्रस्तुत कर सकता है।
(D) तर्कशक्ति की क्षमता
शोधकर्ता को अपने अध्ययन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों एवं विभिन्न प्रकार के लोगों से संपर्क स्थापित करना होता है। उत्तरदाता ना केवल समस्या के प्रति बल्कि स्वयं अध्ययनकर्ता के उद्देश्य एवं कार्य प्रणाली आदि पर विवादास्पद मत व्यक्त करते हैं। अध्ययन क्षेत्र में उत्तरदाता टेढ़े-मेढ़े प्रश्न पूछ बैठते हैं। अतः यह आवश्यक है कि शोधकर्ता में सभी की बातों को धैर्य से सुनकर तर्कपूर्ण वार्तालाप करने की क्षमता होनी चाहिए, ताकि वह अपनी कुशल तर्कशक्ति के आधार पर हर प्रकार के तथ्यों को उत्तरदाताओं से पूछ कर प्राप्त कर सके अथवा उत्तरदाताओं के विवादास्पद प्रश्नों का जवाब दे सके।
(E) रचनात्मक कल्पना शक्ति :
शोधकर्ता के लिए बुद्धिमान होना अत्यंत आवश्यक होता है।
शोधकर्ता के लिए केवल बुद्धिमान होना ही काफी नहीं है बल्कि उससे बुद्धिमान होने के अतिरिक्त शोधकार्य में अंतर्निहित सारे संभावित परिस्थितियों के बारे में पहले से ही कल्पना कर लेने की ताकत होनी चाहिए। बिना कल्पना शक्ति के शोधकर्ता सामाजिक समस्या में ना तो दूरदर्शिता ला सकता है और ना ही अपने अध्ययन कार्य में अंतर्दृष्टि पैदा कर सकता है। दूरदर्शिता तथा अंतर्दृष्टि दोनों ही शोधकार्य में आवश्यक हैं। गहन तथा जटिल सामाजिक तथ्यों का विश्लेषण एवं निर्वचन रचनात्मक कल्पना शक्ति के द्वारा ही संभव है। इसलिए सफल शोधकर्ता हेतु रचनात्मक कल्पना शक्ति का होना अति आवश्यक है।
(F) गणितीय क्षमता :
सामाजिक शोधकर्ताओं को तत्वों के वर्गीकरण, सारणीयन ग्राफ, विवेचन आदि बनाने में गणितीय प्रक्रियाओं का प्रयोग करना होता है।
यदि विवेचन में त्रुटि रह जाती है तो निर्वचन तथा परिणाम संदेहास्पद एवं त्रुटिपूर्ण होते हैं। यह बहुत नीरस काम है, परंतु साथ ही इसके बिना अध्ययन कार्य में यथास्थान नहीं आ सकती। अतः शोधकर्ता में सांख्यिकीय अथवा गणितीय योग्यता होना एवं कंप्यूटर आदि से तरह-तरह के ग्राफ बनाने का गुण होना भी आवश्यक है। स्पार एवं स्वेन्सन ने परिशुद्धता कायम रखने को शोधकर्ता का आवश्यक गुण माना है। अतः शोधकर्ता के भीतर सांख्यिकीय योग्यता का होना जरूरी है।
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