गांव एवं नगर में पारस्परिक अंतःक्रिया - Interaction between Village and City
गांव एवं नगर में पारस्परिक अंतःक्रिया - Interaction between Village and City
गांव एवं नगर के बीच उपर्युक्त अंतरों के बावजूद भी यह दोनों जीवन एकदम से एक-दूसरे से भिन्न नहीं है। इन दोनों का ही जीवन परिवर्तित होता रहता है जिसके परिणाम स्वरूप आदान-प्रदान और अंतः क्रिया होती रहती है। ग्राम एवं नगर के पारस्परिक प्रभाव ने ग्रामीणकरण नगरीकरण ग्राम, नगरीकरण, ग्राम नगरीय नैरंतर्य आदि प्रक्रियाओं को जन्म दिया। इन प्रक्रियाओं के परिणामस्वरुप गांव एवं नगर की विशेषताओं का मिलाजुला रूप प्रकट हुआ है। औद्योगिकरण एवं आर्थिक सामाजिक विकास ने ग्रामों की आत्मनिर्भरता को समाप्त किया है। अब नगरों की कच्चे माल के लिए ग्रामों पर निर्भरता बढ़ी है। नगरों की प्रबलता और वहां उपलब्ध साधनों की सफलता ने ग्रामवासियों को नगरों की ओर आकर्षित किया है। ग्रामवासियों का नगरीकरण हो रहा है। आज नगरीकृत जीवन नगरी नहीं होकर नगरी जीवन से प्रभावित ग्रामीण जीवन है उसी प्रकार ग्रामीण जीवन नगरो से प्रभावित होकर नगरीकृत जीवन है। ग्राम एवं नगर के संपर्क और अंतःक्रिया के परिणामस्वरुप एक समन्वयपूर्ण अवस्था उत्पन्न हो जाती है जिसमें ग्रामीण एवं नगरीय विशेषताओं की सहउपस्थिति देखी जा सकती हैं। बड़े नगरों के चारों ओर आसपास बसे उपनगर में दोनों का मिश्रित जीवन देखने को मिलता है।
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