मध्यवर्ती समाज - intermediate society
मध्यवर्ती समाज - intermediate society
पारसन्स के अनुसार आदिम चरण के पश्चात दूसरा विकासात्मक सार्विकीय चरण है समाज का मध्यवर्ती प्रकार समाज का यह प्रकार सामाजिक विभेदीकरण के दबाव के फलस्वरूप अस्तित्व में आता है। पारसन्स के विचार में सामाजिक प्रणाली में इस तरह के दबाव का सर्वाधिक सामान्य कारण है जनसंख्या में वृद्धि। इससे समाज के आकार तथा रचना में बदलाव आता है। जैविक प्रणाली वाले समाजों में विभेदीकरण का स्वरूप दोहरे विभाजन का होता है अर्थात् इसमें इकाइयों के दो हिस्से हो जाते हैं। जैविक प्रणाली के समरूप सामाजिक प्रणाली में भी जनसंख्या वृद्धि के दबाव के कारण मानव बस्तियों का दोहरा विभाजन होता है और यह है शहरी तथा ग्रामीण। यह विभाजन और आगे बढ़ता हुआ व्यवसायों में विभेदीकरण लाता है, जिसमें अनेक प्रकार के कृषि से भिन्न व्यवसाय उभरते हैं। यह इसलिए होता है, क्योंकि कस्बों एवं शहरों के विकास के कारण आबादी उभरते हैं। जिससे नए वर्गों का सृजन होता है। इसके अंतर्गत अतिरिक्त संपत्ति को नियंत्रित करने और सत्ता तथा ऊँची सामाजिक प्रस्थिति प्राप्त करने वाले लोगों, कारीगरों शिल्पकारों, साहित्यकारों, पूजारियों, व्यापारियों, योद्धाओं आदि के अनेक वर्ग अस्तित्व में आते हैं।
आदिमकालीन अथवा आदिवासी समाज सामान्यतया वह समाज होता है जिसमें वर्गों तथा जातियों के बीच कोई विभाजन नहीं होता। इन समाजों में मुखियाओं को कुछ विशेषाधिकार अवश्य प्राप्त होते हैं, किंतु वे मुख्यतया सम्मानपरक ही होते हैं अर्थात् नेता को सम्मान प्राप्त होता है। उनकी जीवन-शैली में अन्य लोगों से कोई विशेष भिन्नता नहीं होती है। विकास के दूसरे चरण में वर्ग के आधार पर अथवा जैसे कि नए प्रकार के नियमों की आवश्यकता पड़ती है। समाज के इस चरण में पहले की भाँति केवल रीतियों और प्रयासों से समाज का प्रबंध करना संभव नहीं रहता। इसलिए समाज के शासन के लिए और अधिक नियम स्थिति में राजनीतिक प्रणाली अपेक्षाकृत अधिक व्यवस्थित रूप ग्रहण कर लेती है, जैसे कि सामंतवाद अथवा राजतंत्र, परंतु पारसन्स के अनुसार दो आधारभूत नई संस्थाएँ विकास के मध्यवर्ती अथवा राजतंत्र परंतु पारसन्स के अनुसार दो आधारभूत नई संस्थाएँ विकास के मध्यवर्ती चरण में समाज को विशिष्ट स्वरूप प्रदान करती है और 1. सामाजिक स्तर की व्यापक एवं जटिल प्रणाली का उदय और 2. समाज के सामाजिक नियंत्रण के सामान्य प्रतिमानों का उदय।
वार्तालाप में शामिल हों