मानवाधिकार के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे प्रयास - International efforts for human rights

मानवाधिकार के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे प्रयास - International efforts for human rights


अमेरिका के संविधान में यद्यपि भारत और पूर्व सोवियत संघ के संविधानों की तरह नागरिकों के मूल अधिकारों को किसी अध्याय में लिपिबद्ध नहीं किया गया है, तथापि संविधान तथा अधिकार पत्र में ऐसी अनेक व्यवस्थाएँ हैं जिनमें नागरिकों के अधिकारों तथा उनकी स्वतंत्रता की रक्षा की व्यवस्था की गयी है।


मूल अमेरिकी संविधान में नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के सम्बन्ध में कोई व्यवस्था नहीं थी। बाद में जेफरसन की इस धारणा से प्रभावित होकर कि अधिकार पत्र एक ऐसी चीज है जिसे लोगों को पृथ्वी पर प्रत्येक सरकार के विरुद्ध प्राप्त करने का अधिकार है और जिससे किसी न्यायोचित सरकार को इंकार नही करना चाहिए।


काँग्रेस ने 25 दिसम्बर 1789 को इस दृष्टि से 12 संशोधन प्रस्ताव राज्यों को अनुसमर्थन के लिए भेजे। इनमें से 10 संशोधनों को राज्यों का समर्थन प्राप्त हो गया और जिन्हें 1791 में लागू कर दिया। ये प्रथम दस संशोधन ही सामूहिक रूप से अधिकार पत्र कहलाते हैं जिनमें नागरिक स्वतंत्रताओं का पर्याप्त विवरण मिलता है। 


1. कानूनी सहायता संविधान के छठे संशोधन में यह व्यवस्था है कि अभियुक्त अपनी रक्षा के लिए किसी वकील की सहायता ले सकता है। किसी अभियुक्त की आर्थिक स्थिति कमजोर हो तो उसे राज्य की ओर से सहायता प्रदान की जाती हैं।


2. शीघ्र एवं खुले न्यायालय में सुनवाई संविधान के छठे संशोधन के अनुसार अभियुक्त को फौजदारी मामलों में शीघ्र एवं खुले न्यायालय में सुनवाई का अधिकार है। 


3. दोषारोपण के विरुद्ध संविधान के पाँचवें संशोधन में व्यवस्था है कि किसी अभियुक्त को फौजदारी मुकदमें में अपने विरुद्ध गवाही देने का बाध्य नहीं किया जा सकता है।


4. जूरी द्वारा जाँच अमेरिकी संविधान नागरिकों को या अभियुक्त को यह अधिकार प्रदान करता है कि फौजदारी मामलों की वह जूरी द्वारा शीघ्र व् सार्वजनिक जाँच करवा सकता है और दीवानी मामलों में मुक़दमे की राशि 20.000 डॉलर हो तो वहाँ भी इस अधिकार का प्रयोग किया जा सकता है।


पाँचवे गणराज्य के संविधान की प्रस्तावना में स्पष्ट कहा गया है कि फ्रांस के वासी 1789 ई. की घोषणा में परिभाषित और 1946 ई. के संविधान में सम्पुष्टित एवं संपूरित राष्ट्रीय संप्रभुता और मानव अधिकार के प्रति अपनी भक्ति की निश्चयपूर्वक घोषणा करते है। इस प्रकार फ्रांस के पाँचवे गणराज्य में 1789 की मानव अधिकारों की घोषणा में परिभाषित किये गये अधिकारों एवं स्वतंत्रताओं तथा 1946 जे चौथे गणराज्य के संविधान के अधिकारों को स्वीकारो किया गया है। इसके अतिरिक्त इस संविधान में मानव अधिकारों का संकेत मिलता है।


फ्रांस के नागरिकों को महत्वपूर्ण मौलिक अधिकार प्रदान करते हैं लेकिन अधिकारों की इस व्यवस्था में कमी करने वाला यह तत्व यह है कि इन अधिकारों का उल्लेख संविधान के किसी अध्याय में नहीं किया गया है. इन अधिकारों का उल्लेख प्रस्तावना में किया गया है जो संवैधानिक शक्ति या कोई अन्य न्याय योज्य स्थिति (justiciable) प्राप्त नहीं हो सकती है।


प्रस्तावना स्वयं में न तो शासन की शक्ति का स्त्रोत होती है और न ही इसके माध्यम से शासन की शक्ति को वंचित किया जा सकता है

अर्थात यदि शासन इन अधिकारों का उल्लंघन करता तो इनका रक्षक कोई नहीं है। नागरिक अधिकारों की रक्षा करना शासन का कर्त्तव्य है, उसे किसी कानूनी उपबंध का पालन करना अनिवार्य नहीं है।


अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाएँ - संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 68 में उपबंध दिया गया है कि आर्थिक और सामाजिक परिषद, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में तथा मानवाधिकारों की अभिवृद्धि के लिए, आयोग और ऐसे अन्य आयोगों की स्थापना करेगी, जिनकी परिषद् के कार्यों के पालन के लिए आवश्यकता है। इसके अनुसरण में आर्थिक और सामाजिक परिषद् ने सात आयोगों की स्थापना की है। यह है मानवाधिकार आयोग. सांख्यिकीय आयोग, नारकोटिक औषधि अपराध निवारण और दंड न्याय आयोगा।