शिक्षा एवं राजनीतीक संस्थाओं का अंतरसंबंध - Interrelationship of education and political institutions
शिक्षा एवं राजनीतीक संस्थाओं का अंतरसंबंध - Interrelationship of education and political institutions
शिक्षा एवं राजनितिक सत्ता या संस्थाओं का निकट संबंध होता है। विश्व के विविध देशों में विभिन्न प्रकार की शासनप्रनाली होती है। सभी प्रकार की शासनप्रनाली का शिक्षा एवं शैक्षिक संस्थानों पर राजनीती का प्रभाव पड़ता है। शिक्षा में राजनीती का हस्तक्षेप शैक्षिक विद्वानों को अमान्य है। किन्तु शिक्षा के लिए सभी प्रकार की सहायता राजनितिक संस्थाओं द्वारा की जानी चाहिए। शिक्षा नीति, लक्ष एवं उद्देश्य, पाठ्यक्रम, शिक्षण विधि, शिस्त, पाठ्य सहगामी गतिविधियाँ आदि के निर्धारण का स्वातंत्र्य शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत शिक्षाविदों को होना चाहिए। समाज की आवश्यकता के अनुसार शिक्षा किस प्रकार होनी चाहिए यह शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत व्यक्ति ही बता सकते है। देश की सत्ता में जो पक्ष रहता है उस पक्ष की राजनितिक विचारधारा का प्रभाव शिक्षा पर पड़ता है।
पूंजीवादी सत्ता में उच्च वर्गियों के लिए विशेष शिक्षा दिया जाता है। साम्यवादी सत्ता में श्रमिक, किसान, गरीब एवं सामान्य जनता के लिए शिक्षा की व्यवस्था की जाती है। अर्थात सत्ताधारी पक्ष अपनी राजनितिक विचारधारा के अनुसार शिक्षा नीति, नियोजन एवं क्रियान्वयन करता है। किन्तु शिक्षाविदों के अनुसार, शिक्षा सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय होनी चाहिए। सभी के लिए शिक्षा उपलब्ध होनी चाहिए। शिक्षाविदों को शिक्षा में राजनीतिक हस्तक्षेप अमान्य है किन्तु सहयोग अपेक्षित है। एकसत्ताक राजेशाही, महाजनशाही, सरदारशाही. सरंजामशाही, हुकुमशाही, साम्यवादी, अध्यक्षीय शासनप्रनाली. लोकशाही आदि शासनप्रनाली शिक्षा व्यवस्था निम्नवत पायी जाती है -
• राजेशाही शासन प्रणाली में शिक्षा
राजेशाही शासनप्रनाली में सभी सत्ता राजा के पास केंद्रित थी। राजपुत्रों के लिए विशेष शिक्षा का प्रयोजन किया जाता था। युद्ध कौशल, धर्म, राजनीती, प्रशासन, नेतृत्व क्षमता, शारीरिक शिक्षा आदि पर आधारित शिक्षण राजपुत्रों को दिया जाता था। राजा के पौत्र, सरदार के पौत्र, धनिक वर्ग के लिए उच्च शिक्षा की व्यवस्था की जाती है। सामान्य जनता के लिए सामान्य शिक्षा ही उपलब्ध की जाती है। राजा की सत्ता के विरुद्ध जनमत तयार न हो इसका विशेष ध्यान दिया जाता है। राजकीय हक्क के प्रति सामान्य जनता जागरुक न हो इसके लिए प्रयास किया जाता है। बहुजनों की शिक्षा की ओर दुर्लक्ष किया जाता है। राजा के द्वारा निर्मित नियमों का पालन करना सामान्य जनता के लिए अनिवार्य होता है।
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