जैंतिया जनजाति - Jaintia Tribe

 जैंतिया जनजाति - Jaintia Tribe


जैंतिया जनजाति को सिंटेंग अथवा पनार जनजाति के नाम से भी जाना जाता है। वास्तव में यह जनजाति खासी जनजाति की ही एक उप-जनजाति है, जो मेघालय के जैंतिया हिल में निवास करती है। इस समुदाय के लोगो के अनुसार उत्तर-पूर्व (मेघालय) में जैंतिया का अपना साम्राज्य था जिसे सिंटेंग साम्राज्य के नाम से जाना जाता था स्वतंत्रता के पश्चात् यही साम्राज्य उत्तर-पूर्व भारत के नाम से जाना जाता है।


इस समुदाय की अपनी भाषा जैंतिया है। इसके अतिरिक्त ये लोग खासी, असमी, बंगला एवं हिंदी भी बोलते हैं। खांसी जनजाति की ही तरह यह जनजाति भी प्रोट्रो-आट्रोलायड मोनखेमेर प्रजाति की जनजाति है। यह भी मातृवंशीय एवं मातृसत्तात्मक समुदाय है।

इस समुदाय में बच्चे अपनी माता के नाम से अपना उपनाम ग्रहण करते हैं। परिवार की संपत्ति माता से पुत्री को हंस्तातरित होती है। यह समुदाय भी गोत्र बर्हिविवाही समुदाय है अर्थात अपने गोत्र में विवाह वर्जित है।


इस समुदाय के अधिकांश परिवार अपने परंपरात्मक धर्म सेंटंग के अनुयायी हैं, परंतु कुछ लोगों ने क्रिष्चियन धर्म भी अपनाया है। इनके भोजन में चावल, मांस-मछली इत्यादि प्रमुख है। ये लोग भी चावल की शराब बनाते है, जिसका सभी धार्मिक आयोजनों में अनिवार्यतः उपयोग किया जाता है। जैंतिया समुदाय का परिधान भी खासी की ही भाँति है, पुरुष जिंकोंग एवं धोती पहनते है तो महिलाएं कई कपड़ों को लपेटकर साड़ी जैसा पहनावा पहनती हैं, त्यौहार एवं उत्सव इत्यादि में ये लोग चाँदी या सोने का मुकुट भी धारण करते हैं इस प्रकार वे अपनी पहचान को महान सिंटेंग साम्राज्य से जोड़ते है।