संयुक्त परिवार: लक्षण एवं विशेषताएं - Joint Family: Characteristics and Characteristics

संयुक्त परिवार: लक्षण एवं विशेषताएं - Joint Family: Characteristics and Characteristics


1. सामान्य निवास (Common Residence) - संयुक्त परिवार के लिए एक सामान्य निवास स्थान होना आवश्यक है। सामान्य निवास स्थान के अभाव में सदस्यों में सहयोगी संबंधों का बना रहना बहुत कठिन है। डॉ. आर पी देसाई ने सामान्य निवास स्थान को संयुक्त परिवार का एक लक्षण नहीं माना है परंतु उनका यह दृष्टिकोण उचित प्रतीत नहीं होता क्योंकि यदि सामान्य निवास स्थान नहीं होगा तो लोग एक जगह पर नहीं रहेंगे जिसके कारण सामान्य पाकशाला, संपत्ति एवं धार्मिक कृत्यों इत्यादि का उपयोग संयुक्त रूप से लोग नहीं कर पाएंगे, जबकि यही संयुक्तता संयुक्त परिवार का विशिष्ट लक्षण है।


2. सामान्य रसोईघर (Common Kitchen) - परिवार के सभी सदस्य एक ही रसोई में बना भोजन करते हैं। ऐसे परिवार में भोजन करने की भी कुछ प्रथाएं होती हैं। किस अवसर पर क्या बनेगा इसका निर्धारण भी परिवार की वयोवृद्ध स्त्री करती हैं। संयुक्त परिवार का भोजन संबंधी नियम यह होता है

कि पहले घर का कर्ता अर्थात मुखिया फिर अन्य पुरुष, बच्चों एवं वयोवृद्ध स्त्रियां भोजन करती हैं। सबसे अंत में अन्य सभी विवाहित स्त्रियां, पुत्रियां एवं विधवा स्त्रियां भोजन करती हैं। विवाहित स्त्रियों से यह अपेक्षा की जाती है कि अपने पति की ही थाली में ही भोजन करें।


3. सम्मिलित संपत्ति (Common Property) - संयुक्त परिवार का एक मुख्य लक्षण संपत्ति का सम्मिलित स्वामित्व है। पारिवारिक संपत्ति पर व्यक्ति विशेष का अधिकार न होकर घर का अधिकार होता है। इस संपत्ति का उपभोग परिवार के सामान्य लाभ के लिए होता है न कि व्यक्ति विशेष के लिए सभी सदस्यों की आय एक सामान्य कोष में जमा हो जाती है और परिवार का मुखिया प्रत्येक की आवश्यकता के अनुसार उस सम्मिलित कोष में से खर्च करता है। प्रत्येक अपनी योग्यता के अनुसार कमाता है और अपनी आवश्यकता के अनुसार खर्च करता है। संयुक्त परिवार में पुरुष सदस्य चाहे वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो या ना हो, चाहे विवाहित हो अथवा अविवाहित हो, विधवा हो या तलाकशुदा एवं परिवार के सभी बच्चे एक समान रूप से उपलब्ध सुख सुविधाओं का उपयोग करते हैं। इसमें किसी भी प्रकार का असमान वितरण नहीं किया जाता है।


4. सामान्य पूजा तथा धार्मिक कर्तव्य (Common Worship and Religious Duties) - संयुक्त परिवार का एक महत्वपूर्ण आधार सामान्य पूजा और धार्मिक दायित्व के निर्वाह का है। सभी सदस्य सामान्य पितृ-पूजा के कारण एक-दूसरे से बंधे रहते हैं। पितरों की पूजा घर में स्थान विशेष पर ही की जाती है। वह स्थान पवित्र माना जाता है और सभी सदस्य आध्यात्मिक रूप से उस स्थान से जुड़े रहते हैं। परिवार के सभी सदस्य धार्मिक उत्सव को सम्मिलित रूप से मनाते हैं, अनेक व्रत. धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। परिवार में समय समय पर अनेक संस्कार जैसे जन्मोत्सव, उपनयन, विवाह आदि सम्पन किए जाते हैं, जिनमें सभी सदस्य सम्मिलित रूप से भाग लेते हैं। संयुक्त परिवार का धार्मिक पक्ष सदस्यों को एक सूत्र में बांधे रखता है, उनमें समूह कल्याण की भावना को प्रोत्साहित करता है और सभी सदस्यों को एक दूसरे के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करने की प्रेरणा देता है। 


5. बड़ा आकार (Larger Size) - संयुक्त परिवार में कई पीढ़ियों के सदस्य एक साथ रहते हैं जैसे दादा, पिता, पुत्र, उनकी पत्नियां और अनेक नाते रिश्तेदार। इन सब लोगों के एक साथ रहने से घर का बड़ा होना स्वाभाविक है। संयुक्त परिवार में सदस्यों की संख्या काफी पाई जाती हैं। गांव में शहर की अपेक्षा आकार वाले संयुक्त परिवार देखने को मिलते हैं।


6. कर्ता का सर्वोच्च स्थान (Highest Position of Head of the family)- परिवार का कोई बुजुर्ग सदस्य मुखिया के रूप में कार्य करता है जिसे संयुक्त परिवार में कर्ता कहा गया है। परिवार के सभी सदस्यों में कर्ता की स्थिति सर्वश्रेष्ठ होती हैं, उसे अन्य सदस्यों का आदर प्राप्त होता है। सभी सदस्य उसकी आज्ञा का पालन करते हैं, उसके अनुशासन में रहते हैं। परिवार के प्रत्येक मामले में महत्वपूर्ण निर्णय उसी के द्वारा लिए जाते हैं। वह सदस्यों के अनुचित कार्य व व्यवहार को नियंत्रित करता है। परिवार से संबंधित सभी महत्वपूर्ण कार्य उसकी सलाह के अनुसार होता है। अन्य सभी क्षेत्रों में भी वह परिवार का प्रतिनिधित्व करता है। परिवार की एकता बहुत कुछ मात्रा में कर्ता के व्यक्तिगत गुणों पर निर्भर करती है।


7. सहयोगी व्यवस्था (Cooperative Organization) - संयुक्त परिवार, सदस्यों के पारस्परिक सहयोग पर आधारित होता है। सहयोग के अभाव में परिवार का अधिक समय तक संयुक्त बना रहना असंभव है। संयुक्त परिवार की प्रकृति समाजवादी ढंग की है.

इसमें प्रत्येक सदस्य अपनी योग्यता के अनुसार काम करता है, उत्पादन में योग देता है तथा आवश्यकतानुसार प्राप्त करता है। संयुक्त परिवार में "एक सबके लिए और सभी एक के लिए" नामक आदर्श की अभिव्यक्ति होती है। संयुक्त परिवार उत्पादन इकाई के रूप में कार्य करता है परिणामस्वरूप परिवार के विभिन्न सदस्यों में परस्पर सहयोग पाया जाता है।


8. एक निश्चित संस्तरण (A definite Hierarchy) - संरचनात्मक दृष्टि से संयुक्त परिवार के विभिन्न सदस्यों के अधिकारों और स्थितियों में भिन्नता पाई जाती हैं। जिनमें साधारणतः कोई परिवर्तन संभव नहीं होता। संयुक्त परिवार में सर्वोच्च स्थान कर्ता व दूसरा स्थान उसकी पत्नी का होता है। वह धार्मिक कार्यों का संचालन करती हैं और परिवार की अन्य स्त्रियों को विविध प्रकार के कार्य करने की आज्ञा देती है। इस संस्तरण में तीसरा स्थान कर्ता के भाइयों को दिया गया है जो उसे सहयोग प्रदान करते हैं। चौथा स्थान कर्ता के सबसे बड़े पुत्र को दिया जाता है जिसका धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। श्राद्ध के अवसर पर पिंड आदि अर्पित करने का दायित्व उसी का माना जाता है। संयुक्त परिवार में पांचवा, छठा और सातवां स्थान क्रमशः छोटे पुत्रों, पुत्रों की पत्नियों और पुत्रियों को प्रदान किया गया है।

संयुक्त परिवार की संरचना में विधवाओं की स्थिति सबसे निम्न मानी गयी है।


9. तुलनात्मक स्थायित्व (Comparative Permanence) - संयुक्त परिवार में अन्य प्रकार के परिवारों की तुलना में स्थायित्व पाया जाता है क्योंकि सभी सदस्य कर्तव्यपरायणता के सूत्र में बंधे रहते हैं, एक-दूसरे से में मिलकर सामूहिक रूप से कार्य करते हैं। इसमें सदस्य संख्या अन्य प्रकार के परिवारों की तुलना में अधिक होता है। किसी सदस्य की मृत्यु होने, अपंग या वृद्ध हो जाने पर अथवा किसी की नौकरी छोड़ जाने पर ऐसे परिवार की संरचना विघटित नहीं होती। ऐसे किसी भी स्थिति का अन्य सभी सदस्य मिलकर मुकाबला करते हैं। ऐसा दो कारणों से संभव है प्रथम, ऐसे परिवार में आर्थिक स्थिरता पाई जाती हैं, अनेक लोग कमाने वाले होते हैं जिनका आय सामान्य कोष में जमा होता है और उसी से संपूर्ण परिवार की आवश्यकता के अनुसार खर्च होता रहता है। द्वितीय, परिवार में अनेक पीढ़ियों के सदस्यों की एक साथ रहने से सांस्कृतिक निरंतरता बनी रहती है। सांस्कृतिक विशेषताएं पिता से पुत्र को और पुत्र से पौत्र को पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होती रहती हैं। ऐसी दशा में कहा जा सकता है कि परिवार में तुलनात्मक दृष्टि से अधिक स्थायित्व पाया जाता है।