संयुक्त परिवार:अर्थ एवं परिभाषा - Joint Family: Meaning and Definition

संयुक्त परिवार:अर्थ एवं परिभाषा - Joint Family: Meaning and Definition


संयुक्त परिवार की परिभाषा के संबंध में विभिन्न विद्वानों में मतभेद पाया जाता है। कुछ ने संयुक्त परिवार के संरचनात्मक तत्वों के आधार पर परिभाषित किया है कुछ ने कानूनी आधार पर। इस संदर्भ में श्रीमती इरावती कर्वे ने लिखा है कि."संयुक्त परिवार उन लोगों का एक समूह है जो सामान्यतः एक ही घर में रहते हैं, जो एक ही रसोई में बना भोजन करते हैं, जो संपत्ति के सम्मिलित स्वामी होते हैं, जो सामान्य पूजा में भाग लेते हैं और जो किसी न किसी प्रकार से एक-दूसरे से रक्त संबंधी होते हैं। (Kinship Organization in India. p. 10)" इस परिभाषा के अनुसार संयुक्त परिवार में वे ही लोग सम्मिलित हो सकते हैं जो रक्त संबंधी हो जबकि वास्तविकता यह है कि कुछ संयुक्त परिवार में अन्य संबंधी भी होते हैं, जैसे पत्नी का भाई, बहन अथवा अन्य कोई रिश्तेदार। यद्यपि परिवार की संपत्ति में इनका कोई हिस्सा नहीं होता, तथापि इन्हें संयुक्त परिवार का सदस्य माना जाता है। यह परिभाषा संयुक्त परिवार के संरचनात्मक आधारों को व्यक्त करने में अवश्य योग देती है। 


आर पी देसाई के अनुसार, "हम उस गृह को संयुक्त परिवार कहते हैं जिसमें एकांकी परिवार से अधिक पीढ़ियों (अर्थात तीन या अधिक) के सदस्य रहते हो, जिसके सदस्य एक दूसरे से संपत्ति, आय और पारस्परिक अधिकारों तथा कर्तव्य द्वारा संबद्ध हो।"

(The Joint family in India, Sociological Bulletin, 1956, p.148) 


बी.आर. अग्रवाल ने संयुक्त परिवार को परिभाषित करते हुए लिखा है कि, "संयुक्त परिवार के सदस्य परिवार और धर्म, पूंजी के सामूहिक विनियोग लाभ के सामूहिक उपयोग आदि के लिए परिवार के वयोवृद्ध सदस्य की सत्ता के अधीन होते हैं तथा जन्म, विवाह, मृत्यु के अवसर पर सामूहिक कोष में से खर्च किया जाता है।"

(In a Mobile Commercial Community. Sociological Bulletin, 1955, p. 141 142)


डॉ. एस.सी. दुबे के अनुसार, "यदि कई मूल परिवार एक साथ रहते हो, उनमें निकट का नाता हो. एक ही स्थान पर भोजन करते हो और एक आर्थिक इकाई के रूप में कार्य करते हैं तो उन्हें सम्मिलित रूप में संयुक्त परिवार में कहा जा सकता है।"


जौली के अनुसार, "न केवल माता-पिता तथा संतान, भाई तथा सौतेले भाई सामान्य संपत्ति पर रहते हैं बल्कि कभी-कभी इनमें से कई पीढ़ियों तक की संताने पूर्वज तथा समानांतर संबंधी भी सम्मिलित रहते हैं।"

(Hindu Law and Custom. p.178) 


बुलेटिन ऑफ दी क्रिस्चियन इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ सोसाइटी (1957. p.48). "संयुक्त परिवार से हमारा अभिप्राय उस परिवार से है, जिसमें कई पीढ़ियों के सदस्य एक-दूसरे के प्रति पारस्परिक कर्तव्य परायणता के बंधन में बंधे रहते हैं।"


इस प्रकार संयुक्त परिवार से हमारा तात्पर्य ऐसे परिवार से है जिसमें कई पीढ़ियों के लोग एक साथ निवास करते हैं अथवा एक ही पीढ़ी के सभी भाई अपनी पत्नियों, विवाहित बच्चों तथा अन्य संबंधियों के साथ सामूहिक निवास करते हैं जिनकी संपत्ति सामूहिक होती है, परिवार के सभी सदस्य जन्म, भोजन, उत्सव, त्यौहार और पूजन में सामूहिक रूप से भाग लेते हैं और कर्तव्य से बंधे होते हैं।