नातेदारी व्यवस्था अर्थ एवं परिभाषा - Kinship System Meaning and Definition
नातेदारी व्यवस्था अर्थ एवं परिभाषा - Kinship System Meaning and Definition
नातेदारी को समझे बिना हम किसी भी समाज के आन्तरिक स्वरूप को एवं सामाजिक अंतः क्रियाओं को अच्छी तरह से नहीं समझ सकते। सामाजिक अंतः क्रियाओं को समझे बिना हम किसी समाज को नहीं पहचान सकते। नातेदारी, विवाह, परिवार मानवशास्त्रीय अध्ययन की केंद्रीय विषय वस्तु रही है। अनेक मानवशास्त्रियों ने विश्व के विभिन्न भागों में बसने वाली जनजातियों के समाजों का अध्ययन कर अपनी रचनाएं प्रस्तुत की और इस विषय में हमारे ज्ञान में वृद्धि किया। इनमें मैक्लेनन, हेनरीमेन, लुईस मॉर्गन, रेडक्लिफ ब्राउन, मैलिनोवस्की, ईवान्स प्रिचाई. मुरडॅक, लेवी स्ट्रास. लुई ड्यूमा आदि मानवशास्त्री प्रमुख हैं, जिन्होंने इस विषय पर गहनता से अध्ययन किया है। नातेदारी से संबंधित कुछ परिभाषाएं इस प्रकार हैं-
चाल्स विनिक (Dictionary of Anthropology, Page3.2). के अनुसार “नातेदारी व्यवस्था में समाज द्वारा मान्यता प्राप्त उन संबंधों को समाविष्ट द्वारा मान्यता प्राप्त उन संबंधों को समाविष्ट करते हैं जो अनुमानित तथा रक्त संबंधों पर आधारित हो।"
मजूमदार व मदान के अनुसार सभी समाजों में मनुष्य अनेक प्रकार के बंधनों द्वारा आपस में समूहों में बंधे हुए होते हैं। इन बंधनों में सबसे अधिक सार्वभौमिक तथा आधारभूत बंधन वह है जो सन्तानोत्पत्ति पर आधारित होता है- सन्तानोत्पत्ति मानव की स्वभाविक इच्छा है और यही नातेदारी कहलाता है।"
रेडक्लिफ ब्राउन, के अनुसार “नातेदारी सामाजिक उद्देश्यों के लिए स्वीकृत वंश संबंध है जो कि सामाजिक संबंधों के परंपरागत संबंधों का आधार है।"
लूसीमेयर, के अनुसार नातेदारी में सामाजिक संबंधों को जैविक संबंधों में व्यक्त किया जाता है।"
(लूसीमेयर, सामाजिक विज्ञानों की भूमिका हिंदू, अनुवाद, पेज-65)
डॉ. रिवर्स, के अनुसार - "नातेदारी की मेरी परिभाषा उस संबंध से है जो वंशवालियों के माध्यम से निर्धारित व वर्णित की जा सकती है।"
(डॉ. रिवर्स, सोशल आर्गनाइजेशन, पेज-41)
रॉबिन फॉक्स, के अनुसार - "नातेदारी केवल मात्र स्वजन अर्थात् वास्तविक अथवा कल्पित समरक्ता वाले व्यक्तियों के मध्य संबंध से है।"
उपर्युक्त परिभाषाओं से स्पष्ट है कि नातेदारी में वे व्यक्ति सम्मिलित होते है जिनसे वंशावली के आधार पर संबंध होता है। वंशावली संबंध परिवार से उत्पन्न होता हैं और परिवार विवाह से उत्पन्न होता है। इस प्रकार रक्त संबंधों को नातेदारी की आंतरिक व्यवस्था और विवाह संबंधों को बाध्य व्यवस्था कहते है। लेवी स्ट्रास ने नातेदारी को केवल रक्त संबंध पर आधारित ही नहीं वरन् उनके अनुसार समाज का कोई भी स्वीकृत व्यक्ति नातेदार बन सकता है।
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