नोतेदारी की संज्ञाएं - Kinship Terms

नोतेदारी की संज्ञाएं - Kinship Terms


मजूमदार एवं मदान के अनुसार, "संबंध सूचक शब्द ऐसी संज्ञाएं होती हैं जिनका प्रयोग विभिन्न प्रकार के संबंधों के उल्लेख के लिए किया जाता है।"

(डी. एन. मजूमदार एवं टी. एन. मदान, एन इन्ट्रोडक्शन इ सोशल एन्थोपालजी पेज-108) 


जब हम किन्हीं लोगों के नातेदारी के नियमों तथा व्यवहारों को समझना चाहते हैं तो हमें अवश्य ही यह जानना होगा कि वे स्वजनों को किस प्रकार वर्गीकृत करते हैं, उनमें विभेद किस आधार पर करते है और उन्हें पुकारने के लिए किन शब्दों का प्रयोग करते है। नातेदारों को संबोधित करने के संज्ञा शब्द को विभिन्न श्रेणियों एवं उपश्रेणियों में विभाजित करते हैं। यह विभाजन कभी सामाजिक वास्तविकता के साथ सामंजस्य स्थापित करता है तो कभी- कभी नहीं भी करता।


नातेदारी सूचक शब्दों का अध्ययन भी उतना ही प्राचीन है जितना कि मानवशास्त्र। मॉर्गन पहले विद्वान थे जिन्होंने नातेदारी शब्दावली के अध्यन में महत्वपूर्ण योगदान किया है। इन्होंने न्यूयार्क राज्य की इराक्विस (Iroques) का जीवनपर्यन्त अध्ययन किया और पाया कि इनका नातेदारों का नामोल्लेख करने का तरीका पश्चिमी समाजों से भिन्न है। उदारहण के तौर पर पिता को सम्बोधित करने वाले शब्द से पिता-माता के भाई को पुकारते है। माँ को पुकारने वाले शब्द से माँ की बहन को भी पुकारा जाता है। मॉर्गन ने संसार के सभी भागों में प्रचलित नातेदारी सूचक शब्दों का अध्ययन किया और उन्हें मुख्य रूप से दो भागों में बाटा है।


1. वर्गात्मक संबंध सूचक संज्ञाएं (Classificatory Terminology)


2. विशिष्टात्मक संबंध सूचक संज्ञाएं (Description terminology)


1. वर्गात्मक पद्धति:- इसके अंतर्गत एक शाखीय एवं भिन्न शाखीय एवं भिन्न शाखीय कई व्यक्तियों और प्रायः विवाह मूलक संबंधियों के लिए एक ही संबंध सूचक शब्द का प्रयोग किया जाता है।

संबंध सूचक शब्द इन सभी संबंधियों को एक वर्ग के रूप में समान मानता है। उदाहरण- असम के सेमा नागा अजा' शब्द का प्रयोग माँ पिता के भाई की पत्नी एवं मौसी तीनों प्रकार संबंधियों के लिए करते हैं तथा 'अपू' शब्द का प्रयोग पिता, पिता के भाई, माँ की बहन (मौसी) के लिए करते हैं। ‘आमी' शब्द बुआ और सास के लिए किया जाता है। कूकी' लोगो में 'हेपू' शब्द दादा, नाना, मामा, ससुर, ममेरा भाई, साला भतीजा आदि विभिन्न आयु वर्गों एवं पीढ़ियों के लोगों के लिए किया जाता है। अंगामी नागाओं में 'बूरी' शब्द बड़े भाई, पत्नी की बहन, ज्येष्ठ एवं उनकी पत्नी, चाची, ताई आदि सभी के लिए किया जाता है। यहाँ हम देखते है कि विपरीत लिंगीय शब्दों के लिए एक ही शब्द काम में लिया जाता है।


2. विशिष्ट या वर्णनात्मक या व्यक्तिकात्मक पद्धति इस पद्धति के अंतर्गत संबोधन शब्द यथार्थ सूचक होते है और केवल उन्ही व्यक्तियों के लिए प्रयुक्त होते हैं जिनके संदर्भ में या जिनको संबोधित करते हुए बात की जाती है। उदाहरण पिताजी, माता जी, पुत्र, पुत्री इत्यादि इन सभी शब्दों का अर्थ किसी विशिष्ट व्यक्ति या संबंधी से है जो समाज में भी उसी संबंध से जाना जाता है।